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    मंत्री ने ऑटो चलाया, बोले-गरीबी का मजाक उड़ाया जा रहा:अखिलेश चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए, हम नहीं; 2027 में साइकिल को कचरेंगे

    11 hours ago

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    योगी सरकार में मंत्री और सुभासपा चीफ ओम प्रकाश राजभर ने रविवार को लखनऊ में ऑटो चलाया। वे ऑटो चलाकर पार्टी दफ्तर से अपने सरकारी आवास तक गए। मंत्री ने कहा, अखिलेश यादव बताए हैं कि ऑटो चलाते-चलाते सरकार चलाओ। संदेश यही है कि अब ऑटो वाले ओम प्रकाश राजभर। इससे पहले राजभर ने ऑटो चलाते हुए X पर फोटो पोस्ट किया। उन्होंने खुद को संघर्ष से निकला नेता बताते हुए अखिलेश की राजनीति को 'AC-PC और ट्विटर' वाली बताया। उन्होंने कहा, अखिलेश यादवजी, आप चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं, हम नहीं। हमारी इसी फोटो को लेकर आपके उज्जड्ड ट्रोलर लोग हमारी हंसी उड़ा रहे हैं, हमें हमारी औकात बता रहे हैं। 3 तस्वीरें देखिए… राजभर ने जो कुछ लिखा, हूबहू पढ़िए… ‘उड़ा लीजिए गरीबी का मजाक’ अखिलेश यादवजी, आप चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं… हम नहीं। हमारी इसी फोटो को लेकर आपके उज्जड्ड ट्रोलर लोग हमारी हंसी उड़ा रहे हैं, हमें हमारी औकात बता रहे हैं…। ये जान लीजिए कि हमारी ये फोटो ही हमारा अभिमान है, हमारी आन-बान-शान है... हमारे संघर्ष के दिनों की न जाने कितनी यादें बसी हैं इसमें। हमारा संघर्ष आज भी जारी है... छोड़िए... आपके समझ में नहीं आएगी बात...क्योंकि आपको विरासत में बड़ी-बड़ी गाड़ी, लॉन में टहलाते कुत्ते, विदेश में पढ़ाई, सत्ता का पॉवर, पहले से तैयार मुख्यमंत्री की गद्दी मिली है। जिसे आपने गद्दी मिलने के बाद बस केवल ट्विटर, एसी और पीसी वाली राजनीति में बदल दिया है। इसीलिए आपको ऑटो-रिक्शा चलाने वाले, ठेला-पटरी वाले, गरीब आदमी हंसी के पात्र लगते होंगे। ‘2017 की तरह 2027 में विदेशी साइकिल को कचरेंगे’ उड़ा लीजिए गरीबी का मजाक... और खूब उड़ भी लीजिए सातों आसमान तक... बस ये बात गांठ बांध लीजिए कि 2027 में यही टैम्पो, रिक्शा, ठेला और खोमचा वाले मिलके आपकी 2011 वाली विदेशी साइकिल को 2017 की तरह पलटेंगे भी और कचरेंगे भी... 'जनता का दुख दर्द सुनना ही मेरी राजनीति' अखिलेश जी, जब ये ओम प्रकाश राजभर गांव-गांव घूम कर अति पिछड़ा, दलित, वंचित की आवाज उठा रहा था...लाठी खा रहा था... गरीबों के हक की लड़ाई लड़ रहा था, तब आप अपने पावरफुल पिताजी के धन पर विदेश घूम रहे थे। आप लिखे और पढ़े हो सकते हैं लेकिन संस्कारी नहीं हैं। यही वजह है कि आप अपने पिता का अपमान कर राजनीति में आए और सत्ता हासिल की। वहीं, हमारे पिता जी ने हमें गरीबी में पाला है, लेकिन हम आपकी तरह अपने पिता जी का अपमान करके नहीं, बल्कि उनका आशीर्वाद लेकर राजनीति में आए हैं। हम अपने समाज के दर्द से निकले हुए हैं...। राजनीति हमारे लिए ट्विटर, एसी और पीसी नहीं है। 45 डिग्री की तपती दोपहरी में गांव की पगडंडियों पर चलकर जनता का दुख सुनना ही हमारी राजनीति है। ‘आपके लिए राजनीति ड्रामा’ आपके लिए राजनीति 'ड्रामा' होगी… हमारे लिए संघर्ष है। बचपन से आप सत्ता की गोद में खेले-कूदे हैं... हमने होश संभालने के साथ ही जिम्मेदारियां निभाई हैं, कभी ऑटो रिक्शे का हैंडल थामा, तो कभी आंदोलन का झंडा। याद रखिए शाहे बेखबर… जिस आदमी ने गरीबी, भूख, अपमान और संघर्ष को करीब से देखा हो, उसे सोशल मीडिया की हवा से डराया नहीं जा सकता। ओम प्रकाश राजभर सत्ता में पद पाने के लिए नहीं, अति पिछड़ा समाज के सबसे आखिरी पायदान पर खड़े आदमी की आवाज को ताकत देने के लिए राजनीति करता है। क्यों अखिलेश से नाराज हैं राजभर? सपा के कई समर्थक ओम प्रकाश राजभर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं। सुरेंद्र यादव नाम के X अकाउंट होल्डर ने लिखा, अरे ये तो दूर से ही ओमप्रकाश राजभरजी की वाइब दे रहा है। लगता है पहले ऑटो चलाते थे, फिर सोचा ‘जब बिना मीटर के लोग घूम सकते हैं, तो बिना मुद्दे के राजनीति क्यों नहीं। इनका ऑटो भी बड़ा यूनिक होगा। सवारी पूछे ‘किधर चलोगे?’ तो जवाब आए ‘जिधर सत्ता जाएगी उधर!’ मीटर डाउन कम, बयान डाउन ज्यादा करते लग रहे हैं। और चेहरा ऐसा कि ऑटो में भी बैठो तो लगेगा अभी कहेंगे ‘हमारी पार्टी निर्णायक भूमिका में है।’ मंत्री राजभर ने बताया था- कैसे ट्रैफिक इंस्पेक्टर के थप्पड़ ने बदली किस्मत हफ्ते भर पहले गाजीपुर में ओम प्रकाश राजभर ने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण किस्सा साझा किया था। उन्होंने बताया कि कैसे वाराणसी में एक पुलिस अधिकारी द्वारा मारे गए थप्पड़ों ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी और उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। राजभर ने बताया, वे वाराणसी में रात में ऑटो चलाते थे और दिन में पढ़ाई करते थे। अंधरापुल इलाके में एक रात उन्होंने मजबूरी में तीन की जगह पांच सवारियां बैठा ली थीं। एक तिराहे पर एक टीआई ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे ऑटो लेकर आगे बढ़ गए। कुछ देर बाद पुलिस अधिकारी ने उन्हें रोका और सबके सामने दो-तीन थप्पड़ मारे। इसके बाद उन्हें पुलिस लाइन ले जाया गया और कुछ देर बाद छोड़ दिया गया। राजभर के अनुसार, यह घटना उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई। इस अपमान ने उन्हें भीतर से झकझोर दिया। घर लौटते समय उन्होंने मन ही मन कसम खाई कि एक दिन यही व्यवस्था उन्हें सलाम करेगी। इसी दौरान उनकी मुलाकात कांशीराम से हुई, जिन्होंने उन्हें राजनीति और सामाजिक संघर्ष का मार्ग दिखाया। ऑटो चालक से लोगों की आवाज बनने तक का उनका सफर संघर्ष, संगठन और जमीनी राजनीति से भरा रहा। धीरे-धीरे उन्हें प्रदेश की राजनीति में पहचान मिली। साल 2017 में वही ओमप्रकाश राजभर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने। मंत्री बनने के बाद भी उनके मन में उस टीआई की याद ताजा रही, जिसने कभी उन्हें थप्पड़ मारे थे। मंत्री बनने के बाद ओमप्रकाश राजभर ने वाराणसी के जिलाधिकारी से उस टीआई के बारे में जानकारी निकलवाई। पता चला कि वे इलाहाबाद के रहने वाले थे और रिटायर हो चुके हैं। राजभर सीधे उनके घर पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने पहले पूर्व टीआई को सलाम किया। जवाब में अधिकारी ने भी उन्हें सलाम किया। फिर राजभर ने मुस्कुराते हुए कहा, अगर आपने उस दिन मुझे दो झापड़ नहीं मारे होते, तो शायद आज मैं मंत्री नहीं बन पाता। यह सिर्फ एक नेता की कहानी नहीं, बल्कि उस जिद, संघर्ष और आत्मसम्मान की कहानी है जो अपमान को भी सफलता की सीढ़ी बना देती है। ----------- यह खबर भी पढ़िए:- योगी बिजली संकट पर सख्त, बोले-लापरवाही हुई तो एक्शन तय:ऊर्जा मंत्री फील्ड में उतरें; गांव हो या शहर, बिजली सप्लाई नहीं रुकनी चाहिए यूपी में बिजली संकट पर सीएम योगी ने कहा है कि बिजली सप्लाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। किसी भी स्तर पर कोई चूूक हुई तो एक्शन तय है। उन्होंने ऊर्जा मंत्री और राज्य मंत्री को फील्ड में उतरकर कंट्रोल रूम का निरीक्षण करने को कहा है। सीएम ने साफ कहा कि गांव से लेकर शहर तक निर्बाध बिजली व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। पढ़ें पूरी खबर…
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