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    Missing Children Report: West Bengal बच्चों के लिए सबसे असुरक्षित? NCRB रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

    3 hours from now

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    भारत भर में लापता बच्चों की बढ़ती संख्या एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की नवीनतम "लापता बच्चे" रिपोर्ट के अनुसार, 1 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच कुल 33,577 बच्चे लापता हुए। हालांकि अधिकारियों ने इनमें से कई बच्चों का पता लगा लिया है, फिर भी 7,777 बच्चे लापता हैं, जो इस समस्या की भयावहता को उजागर करता है।इसे भी पढ़ें: CEC Gyanesh Kumar की बढ़ी मुश्किलें, पक्षपात के आरोपों पर महाभियोग Motion को AAP का साथमिसिंग चिल्ड्रन महिला व बाल विकास मंत्रालय की रिपोर्टदेशभर में बच्चों के लापता होने के आंकड़े चिंताजनक हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की 'मिसिंग चिल्ड्रन' की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 1 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच देश में कुल 33,577 बच्चे गायब हुए। इनमें से 7,777 बच्चे अब तक नहीं मिले। रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे ज्यादा 19,145 बच्चे पश्चिम बंगाल में लापता हुए। इनमें से 15,465 बच्चों को ढूंढ लिया गया, जबकि 3,680 बच्चे अब भी नहीं मिले। मध्यप्रदेश में 4.256 बच्चे लापता हुए। इनमें से 1,059 बच्चों का अब तक पता नहीं चल पाया। बच्चों के लापत्ता होने के मामलों में हरियाणा देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। 1 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 तक हरियाणा में 2209 बच्चे लापता हुए, लेकिन इनमें से 353 का कोई सुराग नहीं लग पाया। हरियाणा में लापता बच्चों की संख्या पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ से कई गुना ज्यादा है।इसे भी पढ़ें: Iran War से US को अरबों का झटका, बढ़ते Oil Price के दबाव में President Trump ने दिए बड़े संकेतपश्चिम बंगाल में सबसे अधिक मामले दर्ज किए गएरिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में लापता बच्चों की संख्या सबसे अधिक रही, इस अवधि के दौरान 19,145 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 15,465 बच्चों का पता लगाया जा चुका है, जबकि 3,680 बच्चे अभी भी लापता हैं।2 केसः बेटियों के लौटने की राह देख रहा परिवारकेस 1 सहेली के घर गई, फिर नहीं लौटी अम्बाला की 14 वर्षीय लड़की 8 जनवरी को सहेली के घर जाने की बात कहकर निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। बस स्टैंड की सीसीटीवी फुटेज मिली, जिसमें वह जाते दिखी, पर आगेकेस 2 नाराज होकर घर से निकली, अब तक लापता-अम्बाला कैंट में 5 फरवरी को लड़की परिवार से नाराजा होकर घर से निकल गई और वापस नहीं लौटी। गुमशुदगी का केस है। पिता शहर में पर्चे बांटकर लोगों सेकड़ी निगरानी की आवश्यकताबाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि आंकड़े लापता बच्चों का पता लगाने के लिए मजबूत निगरानी प्रणालियों, पुलिस की त्वरित कार्रवाई और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता को उजागर करते हैं। अधिकारियों ने जनता से संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने और लापता बच्चों का पता लगाने और उन्हें उनके परिवारों से मिलाने में मदद करने वाली जानकारी प्रदान करने का आग्रह करना जारी रखा है।
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