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    प्रयागराज में 'विरासत कला उत्सव' कवि सम्मेलन:देशभक्ति कविताओं पर झूम उठे श्रोता, तिरंगे का रंग छाया

    9 hours ago

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    प्रयागराज में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) ने अपने स्थापना दिवस पर 'विरासत कला उत्सव' के तहत एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने हास्य, व्यंग्य, ओज और संवेदनशील कविताओं से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। इस दौरान पूरा सभागार तालियों और ठहाकों से गूंजता रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. स्वतंत्र शर्मा (पूर्व कुलपति, राजा मान सिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय, ग्वालियर), अमर उजाला प्रयागराज के संपादक योगेश नारायण दीक्षित और वरिष्ठ साहित्यकार राम लखन शुक्ला ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर एनसीजेडसीसी के उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय, उपनिदेशक डॉ. आदित्य कुमार श्रीवास्तव और कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने अतिथियों एवं आमंत्रित कवियों को अंगवस्त्र और पौधा भेंट कर सम्मानित किया। कवि सम्मेलन की शुरुआत हरियाणा के सुंदर कटारिया की हास्य कविता से हुई। उन्होंने अपनी पंक्तियों, जैसे "बीवी को जो आँख दिखाने की हिम्मत ना कर पाते...", से श्रोताओं को खूब हंसाया। इसके बाद उत्तराखंड की कवयित्री काव्यश्री जैन ने देशभक्ति से ओतप्रोत अपनी रचना "अब तो ब्रह्मांड में लहराए तिरंगा मेरा, मैं जिधर देखूं नजर आए तिरंगा मेरा" सुनाई, जिसने पूरे सभागार को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। मध्य प्रदेश के कवि सुमित ओरछा ने हिंदी भाषा की महत्ता पर कविता प्रस्तुत की। उन्होंने कहा, "अंग्रेजी की बक-बक को कहो अब कौन सुनता है, जो हिंदी शुद्ध बोलोगे तो सब मुड़-मुड़ के देखेंगे।" दिल्ली के कुशल कुशलेन्द्र ने अपनी संवेदनशील कविताओं से श्रोताओं की सराहना प्राप्त की, वहीं बिहार के आयुष कश्यप ने "हमें अपने जड़ों को अब बचाने की जरूरत है..." जैसी पंक्तियों के माध्यम से सामाजिक सरोकारों पर प्रकाश डाला। लखनऊ के प्रख्यात मिश्रा ने अपनी ओजपूर्ण राष्ट्रभक्ति कविताओं से वातावरण में ऊर्जा भर दी। राजस्थान के डॉ. आदित्य जैन ने दार्शनिक अंदाज में कविता "कठिन होता है कर्मों से निपट निष्काम हो जाना..." प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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