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    सुपीरियर ग्रुप पर चौथे दिन भी इनकम टैक्स का शिकंजा:बरेली की शराब फैक्ट्री में मंगलवार रात से दिल्ली-लखनऊ के अफसरों ने डाल रखा है डेरा, जांच जारी

    5 hours ago

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    बरेली के परसाखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया स्थित सुपीरियर शराब फैक्ट्री में आयकर विभाग की कार्रवाई शुक्रवार को चौथे दिन भी जारी रही। मंगलवार रात करीब 8 बजे शुरू हुई यह छापेमारी अब भी थमी नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली और लखनऊ से आई टीमों ने फैक्ट्री परिसर के भीतर ही डेरा डाल रखा है। सुरक्षा के मद्देनजर फैक्ट्री के मुख्य गेट बंद कर दिए गए हैं और केवल अधिकृत कर्मचारियों को ही कड़ी पूछताछ के बाद अंदर जाने दिया जा रहा है। सर्वर और मोबाइल फोन की हो रही फॉरेंसिक जांच आयकर विभाग का मुख्य फोकस फैक्ट्री के वित्तीय लेखा-जोखा और स्टॉक रजिस्टर पर है। अकाउंट विभाग के कंप्यूटरों और सर्वर से डेटा का मिलान किया जा रहा है ताकि टैक्स चोरी या अघोषित आय का पता लगाया जा सके। सूत्रों का कहना है कि अधिकारियों ने मैनेजमेंट से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तियों के मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस भी कब्जे में लिए हैं, जिससे वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ा जा सके। गोपनीयता के साथ चल रही रेड, अफसर साधे हैं चुप्पी जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए आयकर विभाग के अधिकारियों ने अब तक मीडिया से कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा गया है। फैक्ट्री के गेट पर सन्नाटा पसरा है और टीमें अंदर रिपोर्ट तैयार करने में जुटी हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जांच केवल बरेली यूनिट तक सीमित है या इसका दायरा दिल्ली और नागपुर स्थित ग्रुप के अन्य ठिकानों तक भी फैला हुआ है। प्रदीप अग्रवाल के व्यापारिक साम्राज्य पर नजर सुपीरियर ग्रुप उत्तर प्रदेश में अल्कोहल और बेवरेज सेक्टर का एक दिग्गज नाम है। पूर्व राज्यसभा सांसद स्वर्गीय मुरली मनोहर अग्रवाल के पुत्र प्रदीप अग्रवाल इस ग्रुप का संचालन करते हैं। कोका-कोला बॉटलिंग और एथेनॉल उत्पादन जैसे बड़े कारोबार से जुड़े होने के कारण, आयकर विभाग की इस बड़ी कार्रवाई पर पूरे व्यापारिक जगत की निगाहें टिकी हुई हैं। 23 साल पुराना रिकॉर्ड खंगाला जा रहा ​सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आयकर की टीमें केवल मौजूदा साल नहीं, बल्कि वर्ष 2003 तक के पुराने रिकॉर्ड और बही-खाते मंगवाकर उनकी जांच कर रही हैं। अधिकारियों को अंदेशा है कि लंबे समय से टैक्स फाइलिंग में हेराफेरी की जा रही थी। ​करोड़ों की टैक्स चोरी का अनुमान ​बाजार और व्यापारिक हलकों में चर्चा है कि यह जांच 100 से 200 करोड़ रुपये की संभावित टैक्स चोरी से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, आयकर विभाग ने अभी आधिकारिक तौर पर किसी आंकड़े की पुष्टि नहीं की है, लेकिन जिस बड़े पैमाने पर दस्तावेजों की सघन तलाशी ली जा रही है, उससे बड़े खुलासे की उम्मीद जताई जा रही है।
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