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    4 देशों के फर्जी दूतावास चलाने वाले को जमानत:गाजियाबाद में 9 महीने पहले STF ने पकड़ा था; पुलिस नहीं पेश कर सकी मजबूत सबूत

    16 hours ago

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    UP के गाजियाबाद में फर्जी दूतावास चलाने वाले आरोपी हर्षवर्धन जैन (49) को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने आरोपी हर्षवर्धन जैन को यह राहत दी है। राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए सरकारी वकील ने दलील दी और कहा- जांच के दौरान आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं, जो उसकी संलिप्तता को दर्शाते हैं। वहीं कोर्ट में बचाव पक्ष ने दलील दी। कहा- जैन के पास मौजूद अतिरिक्त पासपोर्ट और नंबर प्लेट केवल स्मृति चिन्ह (नॉवेल्टी आइटम) थे और उनका उपयोग किसी सरकारी पहचान के रूप में नहीं किया गया। साथ ही आरोपी के खिलाफ किसी व्यक्ति ने ठगी या धोखाधड़ी की कोई शिकायत दर्ज नहीं है। कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि चूंकि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, इसलिए आरोपी को आगे जेल में रखने का औचित्य नहीं बनता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत दी। बता दें उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने जुलाई 2025 में हर्षवर्धन को कविनगर के पॉश इलाके से गिरफ्तार किया था। जुलाई 2025 में छापेमारी की तस्वीरें देखिए… STF की छापेमारी में 12 डिप्लोमेटिक पासपोर्ट मिले थे 22 जुलाई 2025 में UP एसटीएफ ने छापा मारकर हर्षवर्धन जैन को अरेस्ट किया। उसके पास से VIP नंबर वाली 4 लग्जरी गाड़ियां जब्त की गई हैं। इसके साथ ही अलग-अलग देशों और कंपनियों की 34 मोहरें भी मिली थी। इसके अलावा, विदेश मंत्रालय की मोहर लगे नकली पेपर्स और 44.70 लाख रुपए नकद भी बरामद किए गए। STF SSP सुशील घुले ने बताया- हर्षवर्धन केबी 35 कविनगर में किराए का मकान लेकर अवैध रूप से ‘वेस्ट आर्कटिक दूतावास’ चला रहा था। वह खुद को वेस्टार्कटिका, सबोरगा, पुलावाविया, लोडोनिया देशों का कॉन्सुल एंबेसडर बताता है। हालांकि इन नामों का कोई देश दुनिया में नहीं है। उन्होंने बताया- हर्षवर्धन डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट लगी गाड़ियों से चलता था। लोगों को प्रभावित करने के लिए प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और कई अन्य बड़े लोगों के साथ अपनी मॉर्फ की हुई फोटो का इस्तेमाल करता था। उसका मुख्य काम कंपनियों और प्राइवेट व्यक्तियों को बाहर के देशों में काम दिलाने के नाम पर दलाली करना और शेल कंपनियों के जरिए हवाला रैकेट चलाना था। हर्षवर्धन के पास से दो फर्जी प्रेस कार्ड, दो फर्जी पैन कार्ड, माइक्रोनेशन देशों के 12 डिप्लोमेटिक पासपोर्ट, कई देशों की विदेशी मुद्रा, विभिन्न कंपनियों के दस्तावेज और 18 डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट भी बरामद किए गए थे। अब पढ़िए पकड़े जाने के बाद आरोपी हर्षवर्धन ने STF को क्या बताया 1- लंदन से MBA किया, पिता रोलिंग मिल के मालिक थे मेरी उम्र 47 साल है। मैंने गाजियाबाद से BBA और लंदन से MBA किया। मेरे पिता एचडी जैन उद्योगपति थे। वे गाजियाबाद की जैन रोलिंग मिल के मालिक थे। राजस्थान में बांसवाड़ा और काकरोली में इंदिरा मार्बल्स और जेडी मार्बल्स के नाम से माइनें थीं। इन खदानों से लंदन तक मार्बल एक्सपोर्ट किया जाता था। मैंने भी इन माइनों में काम किया है। 2- चंद्रास्वामी ने आर्म्स डीलर अदनान खशोगी से मिलाया साल 2000 में मेरी मुलाकात चर्चित व्यक्ति चंद्रास्वामी से हुई। उनके माध्यम से मैं आर्म्स डीलर अदनान खशोगी (निवासी सऊदी अरब) और एहसान अली सैयद से लंदन में मिला। एहसान अली सैयद के साथ मिलकर लंदन में मैंने एक दर्जन से अधिक कंपनियां बनाईं, जिनका इस्तेमाल दलाली के लिए किया गया। 2006 में दुबई में रहने वाले अपने चचेरे भाई के माध्यम से मैं उमालकुईन चला गया। वहां मैंने शफीक निवासी हैदराबाद और इब्राहीम अली-बिन-शरमा निवासी दुबई के साथ मिलकर और भी कंपनियां बनाईं। इनके जरिए अलग-अलग देशों में काम दिलाने के नाम पर दलाली करने लगा, जिससे मुझे अच्छा पैसा मिलने लगा। 3- 2011 में विदेश से सैटेलाइट फोन लेकर आया, तब पकड़ा गया इसी दौरान मैंने गल्फ और अफ्रीका के कई देशों की यात्राएं कीं और वहां भी दलाली का काम किया। 2011 में मैं साउथ अफ्रीका में कारोबार कर रहा था। वहां से एयरपोर्ट अधिकारियों को बिना सूचना दिए गाजियाबाद सैटेलाइट फोन लेकर आ गया। जैसे ही मैंने वह फोन ऑन किया, केंद्रीय एजेंसियों ने मेरी लोकेशन ट्रेस कर ली। मुझे गाजियाबाद से हिरासत में लेकर दिल्ली ले जाया गया। वहां गहन पूछताछ की गई। एजेंसियों को मुझमें किसी प्रकार की देशविरोधी गतिविधि नहीं मिली, इसलिए मुझे छोड़ दिया गया। इस मामले में गाजियाबाद के कविनगर थाने में FIR दर्ज हुई थी। 2012 में मुझे सबोरगा नामक एक माइक्रोनेशन (स्वघोषित देश) का एडवाइजर बनाया गया। 2016 में वेस्ट आर्कटिक ने मुझे अवैतनिक एम्बेसडर नियुक्त किया। इसी प्रकार पुलावाविया और लोडोनिया नामक माइक्रोनेशन से भी मैंने एम्बेसडर का पद लिया। 4- काम दिलाने के नाम पर दलाली और धोखाधड़ी करता था इन सभी पदों का इस्तेमाल मैं कंपनियों और निजी लोगों को काम दिलाने के नाम पर दलाली और धोखाधड़ी में करने लगा। प्रभाव जमाने के लिए मैंने गाजियाबाद के घर में अवैध रूप से अलग-अलग देशों के झंडे लगा रखे थे। गाड़ियों पर डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट लगाकर फर्जी दूतावास चला रहा था। यहीं से मैं धोखाधड़ी, दलाली और हवाला के जरिए काम करता था। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… गर्लफ्रेंड को दफनाने गया प्रेमी, तभी कब्रिस्तान पहुंचा पति; बोला- पत्नी की हत्या हुई है, झांसी के स्पा सेंटर में जॉब करती थी झांसी के स्पा सेंटर में काम करने वाली एक युवती की संदिग्ध हालत में मौत हो गई। बॉयफ्रेंड उसकी लाश लेकर दफनाने कब्रिस्तान पहुंचा। तभी युवती का पति वहां आ गया। उसने हंगामा करते हुए पत्नी की हत्या का आरोप लगाया। इसके बाद फोन करके पुलिस बुला ली। पढ़िए पूरी खबर
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