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    '5-साल से जॉइनिंग नहीं दी, अब पद 1/3 कर रहे':लखनऊ में एडेड शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी बोले- हमारा मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है

    4 hours ago

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    लखनऊ में निशातगंज स्थित SCERT कार्यालय परिसर के बाहर जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों ने बुधवार को जोरदार प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि करीब 1900 पदों पर वैकेंसी निकाली और परीक्षा कराने से पहले उसे 1200 कर दिया। रिजल्ट के बाद उसे 600 ही किया जा रहा है। इसकी परीक्षा में करीब 42 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी पास हुए थे। परीक्षा पास की, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी हो गया, परिवारवालों को इसकी खुशखबरी भी सुना दी और अब नियुक्ति नहीं हो पा रही है। नवंबर 2025 में स्कूल लिस्ट के साथ हमे शॉर्टलिस्ट कर दिया गया, मगर अब तक जॉइनिंग नहीं हुई। वैकेंसी निकलने के 5 साल बाद भी हम जॉइनिंग नहीं कर पाए। 3 तस्वीरें देखिए- पढ़िए पूरा मामला क्या है- अभ्यर्थियों के अनुसार, 1 जनवरी 2021 को 1894 पदों पर भर्ती निकली जिसे बाद संशोधित 1262 पदों के लिए कर दिया गया। संबंधित भर्ती की 17 अक्टूबर 2021 को प्रदेशभर में परीक्षा कराई गई। इसमें लगभग 3 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें से 42 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी सफल हुए। 6 सितंबर 2022 को रिजल्ट आया, उसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन हुआ। 1262 सहायक अध्यापक पदों और 253 प्रधानाध्यापक पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली गई। उसके बाद हाईकोर्ट से वैकेंसी रोक दी गई। अब पढ़िए अभ्यर्थियों ने क्या कहा- विवादित स्कूलों में नियुक्ति क्यों दी? रायबरेली से आए जितेंद्र पाल ने कहा कि पिछले हम 5 साल से नौकरी के लिए भटक रहे हैं। जिस कारण से हाईकोर्ट ने रोक लगाई है इसका मामला 2013 से सरकार के संज्ञान में था। सरकार ने 2021 में इन विवादित स्कूलों को भर्ती प्रक्रिया में क्यों शामिल किया? इस त्रुटि को पहले ही क्यों नहीं दूर किया गया? विभाग और सरकार की लापरवाही का खामियाजा हम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। अब 1262 में 628 बच्चों को बाहर किया जा रहा है। मात्र 634 पदों पर नियुक्ति की बात हो रही है। नियुक्ति निकालने के बाद परीक्षा होने के बाद सबकुछ प्रक्रिया हो गई तो अब नियम बदला जा रहा है। यह सरासर हम अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है। हम लोग घर परिवार से भी बिल्कुल बेबस हो चुके हैं। समाज में हम लोग जवाब नहीं दे पा रहे हैं। हमारी मनोदशा कोई समझने को तैयार नहीं है। पहले 1894, फिर 1262 और अब 634 पद कर रहे देवरिया से आए देवेश पांडे ने कहा कि 2021 से नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 1894 से पद घटकर 1262 हुए। अब उसे भी घटाकर 634 किया जा रहा है। यह स्वीकार नहीं है। विभाग की गलतियों से हम लोग परेशान हो रहे हैं। हम लोग मजदूर और जिस परिवार से आते हैं, उसकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। हमने भर्ती के सारे मापदंडों को पूरा किया। अगर चुनाव से पहले नौकरी नहीं मिली तो हम लोग भाजपा को हटाने वाले हैं। यह सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य को बढ़ावा नहीं देना चाहती। पिछले 8 साल में इन्होंने न प्राइमरी में और न ही माध्यमिक में कोई भर्ती दिया है। यह जब सुप्रीम कोर्ट का डंडा होता है तब भर्ती देते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य की सरकार विद्यालयों को बंद कर दें, सबको संविदा पर कर दिया जाए। इनको परमानेंट टीचर और गवर्नमेंट एम्पलाई नहीं चाहिए। उनको सैलरी देनी पड़ती है। जो सरकार युवाओं की हित की बात करेगी, हम उसके साथ हैं। पिछले 10 साल से लोग वादे दे रहे हैं। कोई भी भर्ती इनकी साफ-सुथरी नहीं रहती है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भर्ती चली जाती है, सीबीआई जांच बैठ जाती है। बच्चों को धरना देना पड़ता है। तब कहीं दो-चार लोगों को किस्मत से नौकरी मिलती है। यह युवाओं की विरोधी सरकार है, उद्योगपतियों को बढ़ावा देती है। शिक्षातंत्र को तबाह करना चाहते हैं।
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