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    आंगनबाड़ी कर्मचारियों की मांगें अनसुनी, अब आंदोलन होगा तेज:मैनपुरी में अधिकारों के लिए सड़कों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

    1 hour ago

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    आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर निर्णायक संघर्ष का संकेत दिया है। आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो उनका आंदोलन और तेज तथा उग्र रूप लेगा। ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके बावजूद, ये कर्मचारी आज अपने मूल अधिकारों से वंचित हैं। कुपोषण से लड़ने वाली ये महिलाएं स्वयं आर्थिक तंगी और असुरक्षित कार्य परिस्थितियों का सामना कर रही हैं। संयुक्त मोर्चा ने बताया कि वे वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठा रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। 8 मार्च 2026 को महिला दिवस पर हुए प्रदर्शन के दौरान भी सरकार ने जल्द समाधान का भरोसा दिया था। हालांकि, 30 अप्रैल तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिसके बाद अब आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है। ज्ञापन में प्रमुख मांगों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, वेतनमान, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सुविधाएं लागू करने की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त, रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष करने, पदोन्नति प्रक्रिया को नियमित और पारदर्शी बनाने तथा आयु सीमा की बाध्यता समाप्त करने की बात भी कही गई है। पोषण ट्रैकर के लिए 5जी मोबाइल खरीदने हेतु 20 हजार रुपये और हर महीने 2500 रुपये डेटा भत्ता देने की मांग भी उठाई गई है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह सुविधा प्रदान नहीं की गई, तो वे ऑनलाइन कार्य बंद कर देंगे। ज्ञापन में यह आरोप भी लगाया गया है कि प्रोत्साहन राशि के भुगतान में अव्यवस्था और भ्रष्टाचार व्याप्त है, जिसे नियमित मानदेय में जोड़ा जाना चाहिए। साथ ही, किराए के भवनों का भुगतान सीधे भवन स्वामी को करने, केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।
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