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    अलीगढ़ में 12 साल बाद हत्याकांड में फैसला:तीनों दोषियों को उम्रकैद, 30-30 हजार जुर्माना; आधी राशि मृतक की पत्नी को मिलेगी

    10 hours ago

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    अलीगढ़ के थाना गांधीपार्क क्षेत्र में वर्ष 2012 में हुए चर्चित हत्या कांड में करीब 12 साल 9 माह बाद अदालत ने फैसला सुनाया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-6 नवल किशोर सिंह ने किशनवीर, राकेश और रूपकिशोर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक दोषी पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने हत्या के मामले में उम्रकैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी। वहीं साक्ष्य मिटाने का दोषी पाते हुए पांच वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने आदेश दिया कि वसूली गई जुर्माना राशि का 50 प्रतिशत मृतक की पत्नी को दिया जाएगा। क्या था मामला? एडीजीसी कृष्ण मुरारी जौहरी के अनुसार, घटना 2 सितंबर 2012 की है। चोब सिंह 80 हजार रुपये में अपनी भैंस बेचकर लौटे थे। वह नगला मान सिंह की पुलिया पर बैठे थे, तभी गांव के ही किशनवीर, राकेश और रूपकिशोर उन्हें अपने साथ ले गए। आरोप है कि तीनों ने उन्हें शराब पिलाकर रुपये लूट लिए और बाद में हत्या कर शव को अकराबाद क्षेत्र के अधौन गांव के जंगल में फेंक दिया। पत्नी ने की थी शिनाख्त 5 सितंबर 2012 को अधौन गांव में एक अज्ञात शव मिलने की सूचना मिली। जानकारी मिलने पर मृतक की पत्नी विमलेश परिजनों के साथ पहुंचीं और शव की पहचान चोब सिंह के रूप में की। इसके बाद थाना गांधीपार्क में मुकदमा दर्ज कराया गया। 12 साल बाद आया फैसला मामला 17 अप्रैल 2013 को सत्र न्यायालय में विचारण हेतु पंजीकृत हुआ। पुलिस ने विवेचना पूरी कर आरोपपत्र दाखिल किया। करीब 12 वर्ष चली सुनवाई, गवाहों के बयान और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद गुरुवार को अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने टिप्पणी की कि मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड के स्थान पर आजीवन कारावास उचित है। हालांकि धारा 364/34, 392 और 411 आईपीसी के तहत आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। फैसले के बाद तीनों दोषियों को न्यायिक हिरासत में लेकर जिला कारागार भेज दिया गया।
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