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    अस्पताल के गेट पर पर्दे लगाकर महिला की डिलीवरी:शामली में सड़क पर बच्चे ने जन्म लिया, डेढ़ घंटे तक बंधक बनाए गए CMO

    12 hours ago

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    शामली में जिला अस्पताल के गेट पर एक महिला की डिलीवरी कराई गई। महिला को दर्द होने पर घर वाले उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां नर्स ने इलाज से मना कर दिया। परिजनों के मुताबिक, नर्स 50 हजार रुपए मांगने लगी। इसके बाद महिलाओं ने अस्पताल गेट पर ही चादर और साड़ी का पर्दा बनाकर डिलीवरी करवाई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया। भारतीय किसान यूनियन के सैंकड़ो कार्यकर्ता CMO अनिल कुमार के ऑफिस पहुंच गए। उन्हें करीब डेढ़ घंटे तक बंधक बनाए रखा। वहीं, हंगामे के बाद आरोपी स्टाफ नर्स मोनिका यादव को हटा दिया गया है। पहले 2 तस्वीरें देखिए… अब पूरा मामला विस्तार से… घटना शामली के जिला संयुक्त चिकित्सालय की है। बागपत के गांव असारा के रहने वाले उस्मान मजदूरी का काम करते हैं। उनकी पत्नी कोसर गर्भवती थीं। कोसर के पहले से 2 बच्चे हैं। यह उनका तीसरा बच्चा था। गुरुवार शाम को उन्हें प्रसव पीड़ा हुई तो घर वाले कांधला अस्पताल गए। वहां से रेफर किए जाने के बाद गुरुवार रात करीब 8 बजे जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल पहुंचने पर कोसर को दर्द अधिक बढ़ गया। घर वालों ने इलाज के लिए नर्सिंग ऑफिसर डॉ. मोनिका यादव से संपर्क किया। कोसर के परिवार वालों के मुताबिक, भर्ती करने के लिए मोनिका ने उनसे 50 हजार रुपए की मांग की। चादर और साड़ी का पर्दा बनाकर डिलीवरी घर वालों ने जब रुपए देने में असमर्थता जताई तो मोनिका ने कहा कि यहां ऑपरेशन नहीं हो पाएगा। इन्हें कहीं और रेफर करना पड़ेगा। इसके बाद साथ आई महिलाएं कोसर को लेकर अस्पताल के बाहर आ गईं। दर्द ज्यादा बढ़ने पर वहीं पर चादर और साड़ियों का पर्दा बनाकर लगाया। उसकी आंड़ में महिला की डिलीवरी कराई। जिला अस्पताल के ठीक सामने सड़क पर कोसर ने बच्चे को जन्म दिया। महिलाएं जब डिलीवरी कराने लगीं तो नर्स मोनिका भी ग्लव्स पहनते हुए बाहर निकलीं। वह लोगों को वीडियो बनाने से मना करने लगीं। लोगों से कहने लगीं- महिला दर्द से तड़प रही। आपको वीडियो बनाने में शर्म नहीं आ रही। बच्चे के जन्म के बाद अस्पताल में भर्ती किया बच्चे के जन्म के तुरंत बाद अस्पताल स्टाफ मौके पर पहुंचा और महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिला अस्पताल के सीएमएस किशोर आहूजा ने जांच कराने की बात कही है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया। शुक्रवार सुबह घटना से आक्रोशित भाकियू के जिलाध्यक्ष और खाप चौधरी सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सीएमओ कार्यालय का घेराव किया। CMO को उन्ही के ऑफिस में घंटों तक बंधक बनाए रखा। लंबे समय से अस्पताल में भ्रष्टाचार का आरोप प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में लंबे समय से भ्रष्टाचार और लापरवाही का खेल चल रहा है, जिससे आम जनता परेशान है। किसान यूनियन के नेताओं ने चेतावनी दी कि जब तक स्टाफ नर्स मोनिका यादव सहित सभी दोषी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित नहीं किया जाता, तब तक उनका धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा। घटना की जानकारी मिलते ही सीओ सिटी जितेंद्र कुमार, थाना अध्यक्ष आदर्श मंडी ज्ञानेंद्र सिंह पुलिसकर्मियों के साथ CMO कार्यालय पहुंचे। भाकियू कार्यकर्ता आरोपी नर्स और वार्ड ब्वाय पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद स्टाफ नर्स को उसकी जगह से हटा दिया गया। वार्ड ब्वाय के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आश्वासन दिया। मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई है। इसके बाद कार्यकर्ता मान गए और वापस चले गए। भाकियू नेता बोले- पथरी का दर्द बताकर टाला भाकियू कार्यकर्ता विनोद निर्वाल ने बताया कि एक गर्भवती महिला घंटों तक अस्पताल परिसर में तड़पती रही, लेकिन उसे समय पर इलाज नहीं मिला। डॉक्टरों ने उसे पथरी का दर्द बताकर टाल दिया, जिसके बाद महिला ने अस्पताल के गेट पर ही बच्चे को जन्म दिया। इस दौरान महिला के पास न तो पर्याप्त कपड़े थे और न ही कोई मेडिकल सहायता। उन्होंने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताया और दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने के साथ उन्हें बर्खास्त करने की मांग की है। साथ ही प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। बाउंसर पर लोगों को धमकाने का आरोप भाकियू के वरिष्ठ कार्यकर्ता दीपक शर्मा ने बताया कि हमारे गांव की एक महिला डिलीवरी के लिए अस्पताल आई थी, लेकिन इन लोगों ने उसे धक्के देकर बाहर निकाल दिया। बेचारी ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया। हम 18 तारीख को भी सीएमओ साहब से मिले थे और उन्होंने आश्वासन दिया था, लेकिन रात फिर वही घटना हुई। जिले में महिलाएं सड़कों पर डिलीवरी करने को मजबूर हैं। अस्पताल ने कुछ बाउंसर भी रखे हैं. जो लोगों को धमकाते हैं और वीडियो बनाने पर फोन छीन लेते हैं। यह अस्पताल नहीं, बूचड़खाना बन गया है। जब तक इसका समाधान नहीं होगा, हम यहां से नहीं हटेंगे। यहां कोई डॉक्टर या सुविधा नहीं है, बस लोगों को मेरठ या निजी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। अगर कोई इंतजाम नहीं है, तो इस पर ताला लगा देना चाहिए। -------------------------- यह खबर भी पढ़ें……… कुशीनगर में एसिड अटैक में युवती की मौत, मां गंभीर:हमलावर छत के रास्ते घुसे; सोते समय तेजाब से नहलाया कुशीनगर में एसिड अटैक में एक युवती की तड़प-तड़पकर मौत हो गई, जबकि उसकी मां बुरी तरह से घायल हैं। हमलावर रात में छत के रास्ते घर में घुसे। कमरे में सो रही मां-बेटी पर एसिड फेंक दिया। इसके बाद कमरे का दरवाजा बंद कर फरार हो गए। मां-बेटी के चीखने की आवाज सुनकर परिवार वाले भागते हुए कमरे में पहुंचे। वहां देखा तो दोनों दर्द से तड़प रही थीं। पढ़ें पूरी खबर…
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