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    अंतरराष्ट्रीय साहित्य कला संगम ने मनाई फूलों की होली:संभल में लोकगीत और कविताओं के बीच सांस्कृतिक आयोजन

    1 hour ago

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    संभल में अंतरराष्ट्रीय साहित्य कला संगम ने शनिवार को डॉ. रितु सक्सेना के आवास पर सांस्कृतिक और गीत-संगीतमय होली का आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसमें अध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार गुप्ता, मुख्य अतिथि सविता चौरसिया, संस्था अध्यक्ष डॉ. विजयलक्ष्मी शर्मा, महामंत्री पूनम शुक्ला और प्रायोजक डॉ. रितु सक्सेना शामिल हुए। संस्था अध्यक्ष डॉ. विजयलक्ष्मी शर्मा ने माता सरस्वती और भारत माता की वंदना प्रस्तुत की। उप मंत्री पूजा शर्मा ने गौ सेवा की विधि संपन्न की। संस्थापक डॉ. डीएन शर्मा ने होली के सांस्कृतिक और अंतरराष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे हमारी सांस्कृतिक विरासत की अनमोल धरोहर बताया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत पूनम शुक्ला की कविता 'फागुन की अग्नि जली धरा पर, सत्य कभी न जल पाया' से हुई। इसके बाद डॉ. रितु सक्सेना ने राधा-कृष्ण गीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। पूजा शर्मा ने लोकगीत 'होलिया में उड़े रे गुलाल' पर अपनी प्रस्तुति दी। मुरादाबाद से आए कलाकार मनीष और नेहा ने ब्रज के लोकगीत पर मयूर नृत्य प्रस्तुत किया। इस दौरान लाल गुलाब की पंखुड़ियों के बीच सभी ने सामूहिक नृत्य कर फूलों की होली का आनंद लिया। मुख्य अतिथि सविता चौरसिया ने होली को भाईचारे और सौहार्द्र का प्रतीक बताते हुए महाकवि नीरज की प्रसिद्ध होली कविता सुनाई। बाल विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य शमनीष पवार ने कहा कि यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। कार्यक्रम का संचालन पूनम रेनू तिवारी ने किया, जबकि अध्यक्षता डॉ. अरविंद कुमार गुप्ता ने संभाली। डॉ. डीएन शर्मा ने आयोजन की सराहना करते हुए अतिथियों, पदाधिकारियों और प्रायोजक डॉ. रितु सक्सेना द्वारा किए गए जलपान की विशेष प्रशंसा की। इस सांस्कृतिक समारोह ने युवाओं और समाज को होली के सच्चे अर्थ, भाईचारे और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का एक अनूठा अनुभव प्रदान किया।
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