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    अयोध्या में दफनाया गया 'आतंकी' रहमान का शव:पिता बोले- जमानत होने वाली थी; जेल में कैदी ने सोते वक्त की थी हत्या

    9 hours ago

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    अयोध्या में अब्दुल रहमान का शव कब्रिस्तान में दफनाया गया। जनाजा उठा तो अब्दुल की मां और बहन चीख पड़ीं। मां रोते-रोते बेसुध हो गई। जनाजे में गांव के करीब 200 लोग शामिल हुए। पहले नमाज अदा की गई, फिर घर से 500 मीटर दूर कब्रिस्तान में दफनाया गया। पिता अबु बकर ने कहा- बेटे की जमानत भी जल्द होने वाली थी। 5 फरवरी को ही बेटे से मुलाकात करके लौटा था। उसने बताया था कि दो-तीन दिन पहले एक नया कैदी उनके साथ बैरक में रखा गया है। जब परिवार ने उसकी स्थिति के बारे में पूछा तो उसने कहा था कि सब ठीक है, कोई परेशानी नहीं है। 9 फरवरी को उसकी मौत की सूचना मिली। 20 साल के अब्दुल रहमान की 8 फरवरी को फरीदाबाद की जेल में एक साथी कैदी ने हत्या कर दी थी। परिजन मंगलवार रात शव लेकर फरीदाबाद से 650 किलोमीटर दूर पैतृक गांव मंजनाई पहुंचे। अब्दुल पर राम मंदिर को उड़ाने की साजिश रचने के आरोप था। उसे गुजरात ATS ने मार्च 2025 में गिरफ्तार किया था। छानबीन के बाद दावा किया गया था कि अब्दुल अलकायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) के कुख्यात आतंकी अबू सूफियान के संपर्क में था। पहले लगा झूठ है, वकील से बात की तब यकीन हुआ अब्दुल रहमान के पिता अबु बकर ने कहा- सोमवार सुबह करीब 7:30 बजे फरीदाबाद जेल से फोन आया। उन्हें बताया गया कि उनके बेटे की किसी ने हत्या कर दी है और पत्थर से सिर पर वार किया गया है। साथ ही कहा गया कि वे तुरंत फरीदाबाद पहुंचें। अबु बकर ने कहा- पहले उन्हें लगा कि शायद यह गलत सूचना हो। इसके बाद उन्होंने अपने वकील से संपर्क किया। वकील ने संबंधित अधिकारियों से बात कर घटना की पुष्टि की, तब उन्हें यकीन हुआ कि यह खबर सही है। बेटे की जमानत भी जल्द होने वाली थी उन्होंने बताया कि जब वे फरीदाबाद पहुंचे तो वहां पुलिस ने कहा कि उनके बेटे की किसी से कोई दुश्मनी की जानकारी नहीं है। पुलिस ने भरोसा दिया कि मामले की पूरी जांच की जाएगी। अबु बकर के अनुसार, वह गुरुवार को ही बेटे से मुलाकात करके लौटे थे। उस समय अब्दुल रहमान ने बताया था कि उसे जेल में कोई दिक्कत नहीं है और सभी लोग मिलजुल कर रहते हैं। पिता ने कहा कि बेटे की जमानत भी जल्द होने वाली थी। मुलाकात के दौरान अब्दुल रहमान ने बताया था कि दो-तीन दिन पहले एक नया कैदी उनके साथ बैरक में रखा गया है। जब परिवार ने उसकी स्थिति के बारे में पूछा तो उसने कहा था कि सब ठीक है और कोई परेशानी नहीं है। अब्दुल रहमान के पिता ने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। जेल के अंदर भी लोग सुरक्षित नहीं पूर्व प्रधान पवन यादव ने कहा- फरीदाबाद जेल में हुई घटना की जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से मिली। वहां एक कैदी ने अब्दुल रहमान की हत्या कर दी। यह बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि इतनी हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर इस तरह की वारदात होना बड़ी बात है। जब जेल के अंदर ही लोग सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। पवन यादव ने कहा- यह घटना पूरी तरह से प्रायोजित लगती है। हाई सिक्योरिटी जेल में ऐसी घटना सामान्य नहीं मानी जा सकती। यदि जेल में ही कैदी सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर सुरक्षा व्यवस्था पर पुनर्विचार की जरूरत है। शव को खोलकर ठीक से देखने तक नहीं दिया अब्दुल रहमान के चाचा उस्मान ने कहा- प्रशासन का रवैया ठीक नहीं था। अधिकारियों ने उनसे कहा कि अगर बॉडी ले जाना चाहते हो तो ले जाओ। उस्मान ने कहा- उन्हें शव को खोलकर ठीक से देखने तक नहीं दिया गया, जिससे वे यह जान सकें कि शरीर पर कहां-कहां चोट के निशान थे। अब जानिए पूरा मामला…. गुजरात ATS ने आईबी की मदद से 2 मार्च 2025 को पकड़ा था अब्दुल रहमान मूल रूप से अयोध्या के मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र के मंजनाई गांव का रहने वाला था। 20 साल के अब्दुल को गुजरात ATS ने 2 मार्च 2025 को अरेस्ट किया था। छानबीन के बाद दावा किया था कि अब्दुल अलकायदा इन इंडियन सब कांटिनेंट (AQIS) के कुख्यात अबू सूफियान के संपर्क में था। अब्दुल की गिरफ्तारी के समय जांच एजेंसियों को उसके पास से दो जिंदा हैंड ग्रेनेड मिले थे, जिनको बम निरोधक दस्ते ने निष्क्रिय किया था। राम मंदिर से जुड़े वीडियो भी मिले थे उसके पास कुछ विडियो भी मिले थे, जिनमें राम मंदिर से जुड़ी कुछ डिटेल थी। जांच में पता चला था कि करीब डेढ़ साल से अब्दुल रहमान सोशल मीडिया अकाउंट पर भड़काऊ वीडियो अपलोड करता था। सबसे पहले अब्दुल ने टिकटॉक पर अपना अकाउंट बनाकर भड़काऊ वीडियो डालना शुरू किया। टिकटॉक पर बैन लगा तो अब्दुल इंस्टाग्राम पर एक्टिव हो गया। भड़काऊ वीडियो से अबू सुफियान की नजरों में चढ़ा अब्दुल इंस्टाग्राम पर भी अब्दुल रहमान ने कई भड़काऊ वीडियो और तकरीरें डालना शुरू किया। इसके चलते कई बार उसके इंस्टाग्राम अकाउंट को स्ट्राइक डाउन किया गया। भड़काऊ वीडियो को देखकर अब्दुल अबू सूफियान की नजरों में चढ़ा। इसके बाद अब्दुल रहमान को अलकायदा इन इंडियन सब-कांटिनेंट (AQIS) ने ब्रेनवॉश कर आतंक की ऑनलाइन ट्रेनिंग देनी शुरू की। सोशल मीडिया से ही जांच एजेंसियों के रडार पर आया अब्दुल रहमान के बार-बार अकाउंट पर स्ट्राइक आने के बाद वह जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया था। हरियाणा STF, गुजरात एसटीएफ और यूपी एसटीएफ ने उसे ट्रैक करना शुरू कर दिया। अबू सूफियान ने अपने हैंडलर के जरिए फरीदाबाद में 2 हैंड ग्रेनेड और डेटोनेटर एक गड्ढे में छिपा दिए थे। इसके बाद उसे 4 अप्रैल को अयोध्या जाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन 2 मार्च को ही गुजरात एटीएस और हरियाणा एसटीएफ ने उसे दबोच लिया था। अब जानिए कैसे हुई अब्दुल रहमान की हत्या… सिक्योरिटी बैरक में थी तीन कैदी, एक यूपी, दो जम्मू कश्मीर से तिंगाव ACP अशोक वर्मा ने बताया कि सिक्योरिटी बैरक में केवल तीन ही बंदी थे, एक यूपी का अब्दुल रहमान, दो जम्मू कश्मीर के अरूण चौधरी और शोएब रियाज। अरूण चौधरी और शोएब रियाज को एक साथ ही जम्मू कश्मीर से सुरक्षा कारणों के चलते नीमका जेल में शिफ्ट किया गया था। पहले तीनों कैदी अलग-अलग बैरक में थे। मगर, 15 दिन पहले ही तीनों को एक साथ इस सिक्योरिटी बैरक में रखा गया था। राम मंदिर बनने से नाराज था, अरुण से होता था झगड़ा जेल सूत्रों के मुताबिक अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट और अब्दुल रहमान के बीच में राम मंदिर को लेकर 10 दिन से विवाद चल रहा था। राम मंदिर बन जाने से वह अक्सर नाराज रहता था। वह अपने धर्म को ही सबसे ऊपर बताता था। दूसरी तरफ अरुण चौधरी को पता चल गया था कि अब्दुल रहमान ने अलकायदा इन इंडियन सब-कांटिनेंट (AQIS) के कुख्यात आतंकी अबू सूफियान के संपर्क में आकर अयोध्या में राम मंदिर उड़ाने की साजिश रची थी। इसी बात को लेकर दोनों में झगड़ा होता था। सोते समय मुंह दबाया, सिर पर नुकीले पत्थर से कई वार किए जेल सूत्रों के मुताबिक सोमवार की सुबह 2 से 3 के बीच का समय था। उस समय अब्दुल रहमान और शोएब रियाज सो रहे थे, लेकिन अरुण चौधरी जगा हुआ था। उसने चुपके से अब्दुल रहमान का मुंह दबाया और उसरे सिर के पीछे के हिस्से पर नुकीले पत्थर से कई वार किए। इसी दौरान आवाज सुनकर शोएब रियाज जाग गया और उसने शोर मचाकर बैरक के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मीयों को बुला लिया। 10 मिनट बाद ही जेल अधिकारी भी पहुंच गए। घायल अब्दुल रहमान को जेल अस्पताल में लेकर जाया गया, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। हत्या के बाद शांत बैठा रहा, पहले ही तैयार कर लिया था हथियार जेल सूत्रों की माने तो हत्या के बाद अरुण शांत बैठा रहा, जबकि शोएब रियाज काफी डर गया था। डर के कारण उसने अरुण को रोकने की कोशिश तक नहीं की। सूत्रों की माने तो राम मंदिर को लेकर रोज-रोज हो रहे विवाद से अरुण काफी खफा हो गया था। इसलिए उसने दिन में ही एक पत्थर को नुकीला बनाकर हथियार बना लिया था। यह पत्थर वह जेल परिसर से ही उठाकर लाया था। उसने इसी से अब्दुल रहमान पर एक के बाद एक कई वार किए। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… हिस्ट्रीशीटर के साथ भागने वाली सिपाही की लव स्टोरी:मेरठ में बुआ के घर पहली मुलाकात; बोली- दुल्हन तो सिर्फ अंकित की बनूंगी मेरठ की रहने वाली सिपाही संध्या भारद्वाज के अपहरण केस की छानबीन करते हुए पुलिस उसकी लव स्टोरी तक पहुंच गई। अपनी शादी वाले दिन वह खुद हिस्ट्रीशीटर अंकित चौहान के साथ गई थी। दोनों कोर्ट मैरिज करना चाहते थे, लेकिन पुलिस की घेराबंदी बढ़ गई। यही वजह है किडनैपिंग के सिर्फ 8 घंटे के अंदर 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