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    भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी ने ट्रेड डील का विरोध किया:सहारनपुर में किसानों ने सरकार से कृषि को बाहर रखने की मांग की

    15 hours ago

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    गुरुवार को सहारनपुर कलेक्ट्रेट पर भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने प्रदर्शन किया। संगठन ने केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न देशों के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौतों का कड़ा विरोध करते हुए इन्हें किसानों के हितों के खिलाफ बताया। संगठन का कहना है कि वर्तमान में देश का किसान बढ़ती खेती लागत, फसलों के उचित दाम न मिलने, प्राकृतिक आपदाओं और कर्ज के बोझ जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में विदेशी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रवेश देने से किसानों की स्थिति और खराब हो जाएगी। भाकियू चढ़ूनी के अनुसार, भारत में खेती किसानों की आजीविका का साधन है, जबकि विदेशों में इसे बड़े व्यापार के रूप में देखा जाता है। यदि सस्ते विदेशी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में आते हैं, तो इससे देशी किसानों की उपज के दाम गिर जाएंगे और उनकी आय पर सीधा असर पड़ेगा। संगठन ने आशंका जताई कि इन ट्रेड डील्स के जरिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे कृषि क्षेत्र में निजीकरण और कॉर्पोरेट नियंत्रण बढ़ेगा। इससे किसानों की स्वतंत्रता प्रभावित होने के साथ-साथ देश की खाद्य सुरक्षा पर भी खतरा मंडराएगा। किसान यूनियन ने चेतावनी दी कि ऐसी नीतियों से किसानों की आत्महत्याओं में बढ़ोतरी हो सकती है और बड़ी संख्या में किसान मजदूर बनने को मजबूर होंगे, जिससे बेरोजगारी भी बढ़ेगी। भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी ने सरकार से मांग की है कि कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और किसानों से जुड़े सहायक व्यवसायों को किसी भी मुक्त व्यापार समझौते से बाहर रखा जाए। इसके साथ ही, संगठन ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करने और किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की भी मांग की। भाकियू चढ़ूनी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार किसानों के हितों को नजरअंदाज कर ऐसे समझौते करती है, तो किसान इसे अपने लिए "डेथ वारंट" मानेंगे। किसान नेताओं ने कहा कि जरूरत पड़ने पर देशभर के किसान आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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