Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    भातखण्डे विश्वविद्यालय में दो विषयों पर संवाद कार्यक्रम:भारतीय न्याय संहिता और महिला नेतृत्व पर हुई चर्चा

    6 hours ago

    2

    0

    भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय में दो महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में 'भारतीय न्याय संहिता एवं ई-एफआईआर' और 'महिलाओं के नेतृत्व में विकास' पर गहन चर्चा हुई। शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों और छात्रों ने इन आयोजनों में सक्रिय रूप से भाग लिया, जो जयशंकर प्रसाद सभागार में संपन्न हुए। पहले सत्र में 'भारतीय न्याय संहिता एवं ई-एफआईआर' विषय पर चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने की। उच्च न्यायालय लखनऊ की वरिष्ठ अधिवक्ता बुलबुल गोडियाल ने मुख्य वक्ता के रूप में न्याय व्यवस्था में हो रहे बदलावों को सरल भाषा में समझाया। डिजिटल साक्ष्यों को भी अब कानूनी मान्यता उन्होंने बताया कि ई-एफआईआर के माध्यम से शिकायत दर्ज करना अब अधिक आसान और पारदर्शी हो गया है। इसके साथ ही, व्हाट्सएप मैसेज जैसे डिजिटल साक्ष्यों को भी अब कानूनी मान्यता मिल रही है, जो न्याय प्रक्रिया को आधुनिक बना रहा है।अधिवक्ता गोडियाल ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी थाने में एफआईआर दर्ज नहीं होती है, तो संबंधित अधिकारी या न्यायालय के माध्यम से न्याय प्राप्त किया जा सकता है। महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही दूसरे सत्र का विषय 'महिलाओं के नेतृत्व में विकास' था। इस दौरान प्रो. कुमकुम धर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वैदिक काल से ही महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में रही हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कृषि, हस्तशिल्प, उद्योग और कॉर्पोरेट जैसे विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है, जो देश के विकास के लिए आवश्यक है। लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रो. अमिता बाजपेयी ने जोर देकर कहा कि नेतृत्व का आधार लिंग नहीं, बल्कि योग्यता होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी अभी भी कम है, जबकि अवसर मिलने पर महिलाओं ने हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।कार्यक्रम के समापन पर कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कुलाधिपति के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय की प्रगति की सराहना की। उन्होंने महिलाओं और छात्रों के हित में लिए जा रहे निर्णयों को सराहा।
    Click here to Read more
    Prev Article
    श्री जी सरकार मित्र मंडल ने कराया सामूहिक विवाह:संगठन के वार्षिक उत्सव पर हुआ कार्यक्रम, हर साल होता है कीर्तन का आयोजन
    Next Article
    सहारनपुर में 12वीं में बुशरा ने टॉप किया:456 अंक के साथ जिले में पहला स्थान मिला, अक्षित दूसरे और मानव तीसरे नंबर पर रहे

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment