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    बिना गिट्टी वाली पटरियों पर दौड़ेगी मेट्रो:कॉरिडोर-2 के अंडरग्राउंड ट्रैक में ढलाई शुरू, नहीं रहेगा मेंटेनेंस का झंझट

    2 hours ago

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    चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय(CSA) से बर्रा-8 तक बनने वाले कॉरिडोर-2 के अंडरग्राउंड सेक्शन में अब पटरियां बिछाने का काम शुरू हो गया है। टनलिंग का काम पूरा होने के बाद अब इंजीनियरिंग टीम ने ट्रैक निर्माण को गति दे दी है, जिससे जल्द ही शहर के इस हिस्से में मेट्रो दौड़ने का सपना हकीकत के और करीब आ गया है। अंडरग्राउंड ट्रैक का खास तकनीकी पहलू मेट्रो के लिए ट्रैक बिछाना सामान्य रेल लाइन जैसा नहीं होता। कॉरिडोर-2 के डिपो रैंप के पास विशेष रूप से 'फ्लैश बट वेल्डिंग' प्लांट को जमीन के भीतर ही स्थापित किया गया है। इसके जरिए रेल पटरियों को आपस में जोड़कर मजबूत किया गया और फिर विशेष उपकरणों की मदद से इन्हें टनल के भीतर पहुंचाया गया। पटरियां बिछने के बाद अब इन पर ट्रैक स्लैब की ढलाई का काम भी शुरू हो गया है, जो मेट्रो की आवाजाही के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा। क्यों खास है ये बैलास्ट-लेस ट्रैक? कानपुर मेट्रो में गिट्टी-रहित (बैलास्ट-लेस) ट्रैक का उपयोग किया जा रहा है। मेट्रो के एलिवेटेड और अंडरग्राउंड दोनों सेक्शनों में इस तकनीक का इस्तेमाल होता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें बार-बार रखरखाव की जरूरत नहीं पड़ती। चूंकि मेट्रो का संचालन दिन में 15 से 16 घंटे तक होता है, इसलिए ऐसी प्रणाली जरूरी है जो कम मेंटेनेंस में भी सुरक्षित और आरामदायक सफर सुनिश्चित कर सके। बैलास्ट-लेस ट्रैक की उम्र लंबी होती है और यह तेज रफ्तार वाली मेट्रो के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है। तेजी से चल रहा निर्माण, तय समय पर पूरा करने का लक्ष्य कॉरिडोर-2 के डिपो रैंप से रावतपुर स्टेशन के बीच शुरू हुआ यह निर्माण कार्य पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। यूपीएमआरसी की पूरी टीम और कार्यदायी संस्थाएं इसे निर्धारित समय के अंदर पूरा करने के लिए जुटी हैं। बता दें कि आईआईटी से कानपुर सेंट्रल तक मेट्रो पहले ही दौड़ रही है, जबकि कॉरिडोर-1 के सेंट्रल-नौबस्ता सेक्शन पर टेस्टिंग का काम चल रहा है। अब कॉरिडोर-2 (सीएसए-बर्रा 8) का सिविल निर्माण तेजी से आगे बढ़ने से शहर के घनी आबादी वाले इलाकों तक मेट्रो पहुंच आसान हो जाएगी। टनल निर्माण पूरा होने के बाद सिस्टम इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया ने भी रफ्तार पकड़ ली है। उम्मीद है कि जल्द ही कानपुरवासी शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक मेट्रो के जरिए बेहद कम समय में सुरक्षित यात्रा कर सकेंगे।
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