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    बरेली का बस स्टैंड बना यात्री की कब्रगाह:मेयर बोले- रोडवेज अफसर दोषी, नगर आयुक्त ने माना- स्लैब हटाकर दोबारा नहीं लगाया गया

    3 hours ago

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    यूपी के बरेली में 'स्मार्ट सिटी' के दावों की कलई एक बार फिर खुल गई है। यहाँ सिस्टम की घोर लापरवाही ने एक बेगुनाह युवक की जान ले ली। बरेली के सबसे व्यस्ततम इलाकों में शुमार सैटेलाइट बस स्टैंड पर एक खुले नाले ने काल का रूप धर लिया, जिसमें गिरकर हरदोई के एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई। यह महज़ एक हादसा नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक सुस्ती का नतीजा है जिसने एक साल से 'मौत का जाल' बिछा रखा था। करीब 30 घंटे तक चले मैराथन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद, जिसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और नगर निगम की पूरी फौज जुटी रही, अंततः गुरुवार तड़के 3 बजे शव को बाहर निकाला जा सका। यह हादसा नहीं, सरकारी हत्या है तौहीद की मौत की खबर मिलते ही हरदोई से बरेली पहुँचे उसके परिवार में कोहराम मचा हुआ है। तौहीद के भाई नदीम ने आँखों में आंसू और गले में रुंधे हुए स्वर के साथ सिस्टम पर गंभीर आरोप लगाए। नदीम ने कहा, "मेरा भाई कोई लावारिस नहीं था। वह रुद्रपुर की कंपनी 'अशोक लीलैंड' में ट्रक ड्राइवर था। वह हाल ही में चेन्नई से ट्रक लेकर लौटा था और घर आने के लिए बहुत उत्साहित था। मंगलवार को उसने फोन पर बताया था कि वह बस पकड़कर बरेली पहुँच रहा है और सुबह तक घर होगा। हमें क्या पता था कि बरेली का बस स्टैंड उसके लिए कब्रगाह बन जाएगा।" नदीम ने आगे आक्रोश जताते हुए कहा, "जब हम मौके पर पहुँचे तो देखा कि नाला पूरी तरह खुला था। वहां कोई रोशनी नहीं थी, कोई चेतावनी बोर्ड नहीं था। मेरे भाई की जेब से रोडवेज का टिकट मिला है। यह बरेली नगर निगम की घोर लापरवाही है। अधिकारियों ने महज एक स्लैब न लगाकर मेरे भाई की जान ले ली। हम इसे हादसा नहीं मानेंगे, यह सीधे तौर पर प्रशासनिक हत्या है। हमारी मांग है कि जिम्मेदार इंजीनियरों और अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हो। तौहीद अपने छह भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर था, पूरे घर की जिम्मेदारी उसके कंधों पर थी। अब उसके बूढ़े पिता रहीस और माँ सलमानों का सहारा कौन बनेगा?" मेयर का कड़ा रुख: "रोडवेज अधिकारियों की लापरवाही से गई जान, सीएम से होगी शिकायत" ​हादसे के बाद बरेली के मेयर डॉ. उमेश गौतम ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (रोडवेज) के अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि वह दोषियों को सजा दिलवाकर ही दम लेंगे। ​मेयर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, "यह घटना अत्यंत हृदयविदारक है, लेकिन इसके लिए रोडवेज के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। सैटेलाइट बस स्टैंड रोडवेज का परिसर है। उनकी यह प्राथमिक जिम्मेदारी बनती थी कि जब उनके बस स्टैंड के पास नाला खुला पड़ा था, तो वे उसे ढकवाते या कम से कम वहां सुरक्षा बैरिकेडिंग लगवाते। उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा की पूरी तरह अनदेखी की।" ​उन्होंने आगे कहा, "रोडवेज के अधिकारी अब यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि उन्होंने नगर निगम को पत्र लिखे थे। मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या पत्र लिखना ही काफी था? क्या एक व्यक्ति की जान की कीमत सिर्फ एक कागज का टुकड़ा है? अगर नगर निगम की ओर से देरी हो रही थी, तो रोडवेज के अधिकारियों को मुझसे या नगर आयुक्त से व्यक्तिगत रूप से मिलकर शिकायत करनी चाहिए थी। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना बेहतर समझा। मैं इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा हूँ और व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर रोडवेज के इन लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग करूँगा। हम तौहीद के परिवार को न्याय दिलाकर रहेंगे।" चूक हुई है, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा इस दर्दनाक हादसे पर घिरे नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए सफाई दी। उन्होंने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि मामला बेहद दुखद है और प्रशासन इसकी तह तक जाएगा। नगर आयुक्त ने बताया, "सैटेलाइट बस स्टैंड के पास तीन मुख्य नालों का जंक्शन पॉइंट है। यहाँ नाले की गहराई करीब 15 फीट है और पानी का बहाव बहुत तेज रहता है। हमने सीसीटीवी फुटेज और मौके पर मौजूद चश्मदीदों के बयानों का संज्ञान लिया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि युवक नाले के ऊपर रखे एक स्लैब पर बैठा था और अचानक पीछे की ओर लुढ़ककर नाले में गिर गया।" जब उनसे लापरवाही के बारे में सीधा सवाल किया गया, तो उन्होंने स्वीकार किया, "यह सच है कि नाले की सफाई के लिए पूर्व में स्लैब को तोड़कर किनारे रखा गया था ताकि चेंबर से कचरा निकाला जा सके। सफाई के बाद उसे दोबारा यथास्थान मजबूती से फिक्स नहीं किया गया, जो कि लापरवाही है। जिस भी स्तर पर लापरवाही पाई जाएगी, उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।" परिवहन निगम के पत्रों के दावे पर उन्होंने कहा, "रोडवेज के अधिकारी कह रहे हैं कि उन्होंने पत्र लिखे थे। हम अपने रिकॉर्ड चेक करवा रहे हैं। यदि कार्यालय में ऐसा कोई पत्र प्राप्त हुआ था और उस पर संज्ञान नहीं लिया गया, तो संबंधित लिपिक और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उन्हें निलंबित किया जाएगा। हम मृतक के परिवार के प्रति संवेदना रखते हैं और जांच के बाद न्याय सुनिश्चित करेंगे।" प्रशासन और नगर निगम से 5 चुभते सवाल घटनाक्रम: मौत के 30 घंटों की टाइमलाइन
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