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    बरेली में शिक्षा व्यवस्था पर व्यापार मंडल का दबाव:पारदर्शिता और जवाबदेही की उठी मांग

    3 hours ago

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    बरेली में सत्र 2026-27 की शुरुआत से पहले ही शिक्षा व्यवस्था पर बहस तेज हो गई है। उद्योग व्यापार सुरक्षा मंडल ने निजी स्कूलों की फीस, यूनिफॉर्म और नीतियों में कथित मनमानी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रशासन से सख्त हस्तक्षेप की मांग की है। मंडल के अध्यक्ष गौरव सक्सेना के नेतृत्व में जिला विद्यालय निरीक्षक को एक ज्ञापन सौंपा गया। इसमें निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराने के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का रोडमैप भी प्रस्तुत किया गया। मंडल ने उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम 2018 का हवाला देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य अभिभावकों को राहत देना है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा है। ज्ञापन में फीस वृद्धि को सबसे बड़ा मुद्दा बताया गया। मंडल ने कहा कि कानून के तहत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर अधिकतम 5% तक ही फीस बढ़ोतरी की अनुमति है, लेकिन कई स्कूल इस सीमा का उल्लंघन कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, शुल्क विनियमन समिति की पारदर्शिता, निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करने और अभिभावकों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण की भी मांग की गई। व्यापार मंडल ने शिक्षा के व्यावसायीकरण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने हर साल यूनिफॉर्म और किताबें बदलने की परंपरा पर रोक लगाने की मांग की, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि स्कूल छोड़ने पर सुरक्षा राशि को 30 दिनों के भीतर ब्याज सहित लौटाया जाए और सभी भुगतानों के लिए ई-पेमेंट अनिवार्य किया जाए। अन्य मांगों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत हुए प्रवेशों की जानकारी सार्वजनिक करना, प्ले-ग्रुप और किंडरगार्टन स्तर की फीस की जांच करना, तथा अभिभावकों की शिकायतों के गोपनीय और त्वरित समाधान सुनिश्चित करना शामिल है। व्यापार मंडल ने चेतावनी दी है कि यदि कोई स्कूल अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से ही किताबें या ड्रेस खरीदने के लिए बाध्य करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
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