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    चंदौली में शिव महापुराण कथा का आयोजन:शिवम शुक्ला महाराज ने सुनाए पतिव्रता धर्म और गणेश जन्म के प्रसंग

    2 hours ago

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    चंदौली जिले के मसोई गांव में आयोजित सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के छठवें दिन शिवम शुक्ला महाराज ने विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने कथा के दौरान पतिव्रता धर्म और भगवान गणेश के जन्म की कथा विस्तार से सुनाई। महाराज शिवम शुक्ला ने पतिव्रता धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि जो स्त्री इस धर्म का पालन करती है, वह धन्य है। ऐसी स्त्री सभी लोकों को पवित्र करती है और उसके दर्शन मात्र से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि पतिव्रता स्त्री को अपने पति के बाद ही शयन करना चाहिए, क्योंकि पत्नी का पति से पहले सोना पतिव्रत धर्म के विरुद्ध माना जाता है। इसके अतिरिक्त, पतिव्रता स्त्री को सौभाग्य के प्रतीक चिन्ह जैसे सिंदूर और बिंदी प्रतिदिन धारण करने चाहिए। महाराज ने आधुनिक समय में महिलाओं द्वारा मांग में सिंदूर न लगाने की प्रवृत्ति पर भी टिप्पणी की। राम कथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पतिव्रता स्त्री को अपने पति के भोजन करने के बाद ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। इसके उपरांत, महाराज ने भगवान गणेश के जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि माता पार्वती ने अपनी सुरक्षा के लिए भगवान गणेश को उत्पन्न किया था। एक बार जब माता पार्वती स्नान कर रही थीं, तो उन्होंने गणेश जी को द्वार पर खड़े होकर किसी को भी अंदर आने से रोकने का आदेश दिया। ग णेश जी ने माता की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान शिव को अंदर जाने से रोक दिया। इस पर क्रोधित होकर भगवान शिव ने त्रिशूल से गणेश जी का मस्तक उनके शरीर से अलग कर दिया। जब माता पार्वती को यह ज्ञात हुआ, तो वे अत्यंत क्रोधित हो गईं और साक्षात काली का रूप धारण कर संसार का प्रलय करने लगीं। सभी देवताओं द्वारा क्षमा याचना करने पर, भगवान शिव ने गणेश जी के धड़ पर हाथी का मस्तक लगाकर उन्हें पुनः जीवित किया। भगवान शिव ने गणेश जी को आशीर्वाद दिया कि आज से वे प्रथम पूजनीय होंगे।
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