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    CJM कोर्ट से SP सिटी बदायूं के खिलाफ परिवाद खारिज:पूर्व पत्नी बोली- धोखे से तलाक पर साइन कराए, 2012 में हुई थी शादी

    4 hours ago

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    वाराणसी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) मनीष कुमार की कोर्ट ने बदायूं के वर्तमान एसपी सिटी को राहत दे दी। एसपी सिटी अभिषेक कुमार सिंह के खिलाफ उनकी पूर्व पत्नी के दाखिल मुकदमा दर्ज करने के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि आवेदिका के लगाए गए धोखे से तलाक के आरोप आधारहीन हैं और यह प्रार्थना पत्र मात्र दबाव बनाने के उद्देश्य से दिया गया था। अदालत में अभिषेक कुमार सिंह के अधिवक्ता अंशुमान त्रिपाठी ने पक्ष रखा। पहले बताते हैं पूरा मामला… अभिषेक कुमार सिंह वर्तमान में बदायूं में एसपी सिटी के रूप में कार्यरत हैं। उनका शादी वर्ष 2012 में वाराणसी की ऋषिका सिंह से हुआ था। वैवाहिक विवाद के बाद मामला लखनऊ हाईकोर्ट पहुंचा। जहां सुलह-समझौता केंद्र के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच 46 लाख रुपए और एक फ्लैट पर समझौता हुआ था। इसके बाद लखनऊ फैमिली कोर्ट में आपसी सहमति से तलाक की डिक्री पारित हुई और ऋषिका सिंह ने समझौते की पूरी राशि भी प्राप्त कर ली थी। धोखे से हस्ताक्षर कराने का आरोप तलाक की प्रक्रिया पूरी होने के कुछ समय तक सब ठीक चला। इसके बाद ऋषिका सिंह ने वाराणसी के शिवपुर थाने और फिर कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया । बताया कि अभिषेक कुमार सिंह ने उन्हें बहला-फुसलाकर और धोखे से कागजात पर साइन कराकर तलाक लिया है। उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा-173 (4) के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। कोर्ट ने दलील सुनकर दिया आदेश अभिषेक कुमार सिंह के अधिवक्ता अंशुमान त्रिपाठी ने कोर्ट में दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए दलीलें दीं। कोर्ट को बताया कि आवेदिका हाईकोर्ट और फैमिली कोर्ट की हर प्रक्रिया में स्वयं उपस्थित थीं। उन्होंने समझौते की शर्तों के अनुसार धनराशि और लाभ स्वीकार किए। लखनऊ खंडपीठ में 'कूलिंग पीरियड' समाप्त करवाने के लिए भी स्वयं याचिका दाखिल की थी। सीजेएम मनीष कुमार ने समस्त दस्तावेजों का अनुशीलन करने के बाद आदेश में स्पष्ट किया कि आवेदिका प्रत्येक स्तर पर व्यक्तिगत रूप से शामिल थीं, इसलिए धोखे का आरोप मान्य नहीं है। इस आधार पर कोर्ट ने उनके प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया।
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