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    डीएम ने बैंकों के खराब प्रदर्शन पर नाराजगी जताई:जालौन में दो दिन में शत-प्रतिशत ऋण वितरण के दिए सख्त निर्देश

    7 hours ago

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    जालौन की बैंकिंग व्यवस्था को लेकर जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार शाम को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला समन्वय समिति (डीसीसी) एवं जिला स्तरीय समीक्षा समिति (डीएलआरसी) की बैठक में उन्होंने विभिन्न बैंकों के प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए ऋण वितरण में लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई और जिम्मेदार अधिकारियों को चेतावनी दी। समीक्षा के दौरान सामने आया कि जनपद के 12 बैंकों का ऋण-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) बेहद कम है। विशेष रूप से भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और आईडीबीआई बैंक का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया। जिलाधिकारी ने इस पर नाराजगी जताते हुए भारतीय रिजर्व बैंक को कार्रवाई के लिए पत्र भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनपद का सीडी रेशियो राष्ट्रीय औसत 60 प्रतिशत तक पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। डीएम ने किसानों को ऋण वितरण में भी उदासीनता पर चिंता व्यक्त की और पशुपालन व मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में ऋण वितरण बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा को इस दिशा में तेजी लाने को कहा। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना की समीक्षा में 1700 लक्ष्य के सापेक्ष 1758 स्वीकृतियां तो मिलीं, लेकिन मात्र 1482 मामलों में ही ऋण वितरण होने पर डीएम ने नाराजगी जताई। उन्होंने सभी बैंकों को दो दिन के भीतर शत-प्रतिशत ऋण वितरण सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। सीसीएल के लंबित मामलों पर भी जिलाधिकारी ने सख्ती दिखाई। इंडियन बैंक के 283, यूपी ग्रामीण बैंक के 147 और एसबीआई के 34 प्रकरण लंबित पाए गए। डीएम ने निर्देश दिए कि इन सभी मामलों का निस्तारण अगले ही दिन किया जाए, अन्यथा जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई होगी। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3526 करोड़ रुपये के वार्षिक क्रेडिट प्लान को मंजूरी दी गई। जिलाधिकारी ने कहा कि बैंकिंग व्यवस्था जनपद के आर्थिक विकास की रीढ़ है और सभी बैंक समन्वय के साथ कार्य करते हुए किसानों, युवाओं और उद्यमियों को समय पर ऋण उपलब्ध कराएं। बैठक में परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी, एलडीएम अनुराग सक्सेना, आरबीआई के एजीएम ऋषव सक्सेना सहित सभी बैंक प्रबंधक मौजूद रहे।
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