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    Dr. Ram Manohar Lohia Birth Anniversary | सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि, कहा- 'सप्त क्रांति' के प्रणेता का समर्पण सदैव प्रेरित करेगा

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    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। योगी आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर समाजवादी चिंतक एवं ‘सप्त क्रांति’ के प्रणेता डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘सामाजिक न्याय, समता एवं राष्ट्रहिंदी के प्रति उनका समर्पण हमें एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु सदैव प्रेरित करता रहेगा।’’ लोहिया का जन्म 1910 में आज ही के दिन हुआ था। लोहिया एक स्वतंत्रता सेनानी और गांधीवादी विचारों को मानने वाले थे। उन्होंने वंचित समुदायों के राजनीतिक सशक्तीकरण के लिए भी काम किया और कांग्रेस के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट करने का काम किया। उनका निधन 1967 में हुआ था।इसे भी पढ़ें: US-Iran Conflict Update | पश्चिम एशिया महायुद्ध और बढ़ा! Donald Trump का 48 घंटे का अल्टीमेटम और ईरान की 'टोटल शटडाउन' की धमकी | Strait of Hormuz डॉ. राम मनोहर लोहिया: एक संक्षिप्त परिचय23 मार्च, 1910 को जन्मे डॉ. लोहिया भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा दिग्गजों में से एक थे, जिन्होंने वैचारिक धरातल पर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज़ उठाई।गांधीवादी विचारधारा: वे महात्मा गांधी के विचारों से गहरे प्रभावित थे और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई।विपक्ष की एकजुटता: डॉ. लोहिया ने कांग्रेस के प्रभुत्व वाले दौर में विपक्षी दलों को एकजुट करने का ऐतिहासिक कार्य किया, ताकि लोकतंत्र में एक मजबूत विकल्प बना रहे।सामाजिक सशक्तिकरण: उन्होंने पिछड़ों, दलितों और वंचित समुदायों के राजनीतिक सशक्तीकरण के लिए निरंतर संघर्ष किया।सप्त क्रांति का विचार: समाज में व्याप्त असमानता को दूर करने के लिए उन्होंने 'सप्त क्रांति' का सिद्धांत दिया, जो आज भी भारतीय समाजवाद का आधार माना जाता है।इसे भी पढ़ें: पश्चिमी देशों में फूट? ईरान ने इज़रायल की ओर दागी मिसाइलें, संदेश लिखा- 'धन्यवाद, स्पेनिश प्रधानमंत्री' | Iran Missile Attack Israel  विरासत और प्रेरणा1967 में दुनिया को अलविदा कह देने वाले डॉ. लोहिया की विरासत आज भी उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में अत्यंत प्रासंगिक है। मुख्यमंत्री के संबोधन ने स्पष्ट किया कि वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर, डॉ. लोहिया का राष्ट्र के प्रति समर्पण और समतावादी समाज का सपना हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है।  
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