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    एचसी वर्मा ने कहा-रटने से नहीं विश्लेषण से आएगी फिजिक्स:AI की वजह से बदलने वाली है परिस्थितियां, बोले- 10 साल तक मैं स्कूल नहीं गया

    2 hours ago

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    IIT के इंजीनियर हों, NIT के पासआउट हों या 12वीं साइंस के छात्र इन सभी की जुबान पर डॉ. एच.सी. वर्मा का नाम जरूर होता है। ये वही डॉ. एच.सी. वर्मा हैं, जिनकी लिखी फिजिक्स की मशहूर किताब ‘Concept of Physics’ आपने पढ़ी होगी। आज वह काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के साइंस सभागार में अचित्य पुस्तक के‌ लोकार्पण पर पहुंचे थे। उनको सुनने के लिए सभागार पूरी तरह से भर गया। छात्रों को रोकने के लिए आयोजकों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। डॉ. वर्मा को साल 2021 में विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया था। पद्मश्री डॉ. एच.सी. वर्मा मूल रूप से बिहार के दरभंगा जिले के रहने वाले हैं। बचपन में उनकी विज्ञान और गणित में विशेष रुचि नहीं थी, लेकिन जब उन्होंने स्नातक की पढ़ाई के लिए पटना साइंस कॉलेज में प्रवेश लिया, तो अचानक उनका विज्ञान के प्रति लगाव बढ़ गया। वे फिजिक्स पढ़ने में अधिक समय देने लगे। B.Sc के दौरान विज्ञान के प्रति बढ़ी रुचि छात्रों के बीच डॉ. वर्मा ने बताया कि उन्होंने पटना से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद GATE परीक्षा क्वालीफाई की। इसके बाद उन्होंने IIT कानपुर में M.Sc के लिए प्रवेश लिया। M.Sc करने के बाद उन्होंने वहीं से पीएचडी (डॉक्टरेट) पूरी की। इसके बाद उन्होंने पटना साइंस कॉलेज में पढ़ाना शुरू किया और बाद में IIT कानपुर में प्रोफेसर बन गए। ‘बच्चों को स्कूल जाने से पहले पता होते हैं न्यूटन के गति के नियम’ प्रोफेसर वर्मा ने कहा- बच्चे को न्यूटन की गति के तीनों नियम भी स्कूल जाने से पहले पता होते हैं। अगर कोई बच्चा कोई गेंद कहीं छिपा देता है और उससे कहा जाता है कि गेंद लेकर आओ तो वह वहीं जाता है, जहां गेंद रखी गई है। यानी उसे न्यूटन का पहला नियम पता है। जो चीज जहां रखी है, वह वहीं होगी। अ थिंग विच इस एट रेस्ट, विल बी एट रेस्ट एंड अ थिंग विच इस एट मोशन, विल बी इन मोशन, जब तक उसकी चाल बदलने के लिए बल न लगाया जाए। उसे मालूम है कि दिन गुजर जाएं, रात गुजर जाएं, लेकिन गेंद अपने आप से नहीं जाएगी। अगर वह चीज वहां से चली जाएगी तो इसका मतलब है कि किसी ने उसे हटाया है। बच्चे को पता होता है कि अगर उसे गेंद दूर फेंकनी है तो किस गति से फेंकनी होगी और कम दूरी पर फेंकनी है तो किस गति से जाएगी। अगर आप बच्चे से कहेंगे कि दौड़ते हुए जाओ और जाकर कमरे में जो दीवार है उससे लड़ जाओ जाकर। क्या वह आपकी बात मानेगा। नहीं मानेगा। क्योंकि उसे न्यूटन का तीसरा नियम मालूम है। उसे मालूम है कि मैं जितनी तेजी से सिर दीवार पर मारुंगा, उतनी ही तेजी से दीवार मुझे पलट कर दर्द देगी। बचपन में मेरे खुद के कभी अच्छे नंबर नहीं आए' अनुशासन की एक चीज होती है- परीक्षा। क्लास में मैंने कभी शरारत नहीं की, अवहेलना नहीं की। लेकिन क्लास के बाहर खूब अवहेलना की। कहा जाता है कि क्लास में जो पढ़ाया गया मैंने ध्यान से सुना, समझा, जिनको नहीं समझ आया, उनको समझाया भी। लेकिन उसको परीक्षा तक याद क्यों रखूं। मैं तो अपने रास्ते चलूंगा। इस कारण से मेरे स्कूल में घटिया किस्म के नंबर आते थे। 30 फीसदी के करीब नंबर आते थे। मेरे ग्रेड कार्ड में छठवी, सातवीं, आठवीं में कई सारे लाल पेन से अंडरलाइन थे।" मुझे नहीं पता था कि कालांतर में वे अच्छे दस्तावेज साबित होने वाले हैं। मुझे लगता है कि अगर आज वो मेरे पास होते तो अच्छा होता। जब हम घर आए ग्रेड कार्ड लेकर। मेरे पिता से लेकर मेरे भाई ने मुझे खूब सुनाया। माताजी परेशान रहती थीं, ज्योतिषियों के पास जाती थीं। जन्मपत्री दिखाया करती थीं। यह तो इस तरह से फेल होता रहता है, आगे क्या करेगा। जिस समय परीक्षा होती थीं, उस समय सबका तनाव बढ़ा रहता था, सिर्फ मेरे अलावा। हम यही सोचते थे कि अब जो कुछ भी कहा जाएगा वह 15-20 मिनट चलेगा। उस पर कई बातें हो जाया करती थीं। लेकिन आखिर तक सब खत्म। Concept of Physics: बेस्टसेलिंग किताब डॉ. एच.सी. वर्मा बताते हैं कि पढ़ाने के दौरान उन्होंने देखा कि छात्र फिजिक्स की जटिल भाषा को समझ नहीं पा रहे हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने किताब लिखने का निर्णय लिया। करीब 8 साल की मेहनत के बाद वे ‘Concept of Physics’ लेकर आए। यह फिजिक्स की बेस्टसेलिंग किताबों में से एक है। IIT-JEE (Main) से लेकर स्कूली छात्र तक इस किताब से तैयारी करते हैं। इसके अलावा उन्होंने क्वांटम फिजिक्स और सॉल्यूशंस से जुड़ी किताबें भी लिखीं। उन्होंने नाभिकीय ऊर्जा पर भी काम किया, जिसके लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। सीखने की क्षमता विकसित करना जरूरी डॉ. एच.सी. वर्मा का कहना है कि भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी काबिलियत साबित की है। पोखरण से लेकर अब तक वैज्ञानिकों का काम सराहनीय रहा है। छात्रों को सफलता का मंत्र देते हुए वे कहते हैं कि केवल पास होने के लिए पढ़ने से बेहतर है सीखने के लिए पढ़ना—इससे सफलता जल्दी मिलती है। विद्यार्थी IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की तैयारी करते हैं और चयन नहीं हो पाता, उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। कोई संस्थान आपकी काबिलियत तय नहीं करता। अगर आपके अंदर सीखने की क्षमता नहीं है, तो आप संसाधनों का सही उपयोग भी नहीं कर पाएंगे।
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