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    एमिटी विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कृषि सम्मेलन का समापन:सतत कृषि, खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन पर विचार-विमर्श हुआ

    2 hours ago

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    लखनऊ में एमिटी विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'पैथोजेन्स, प्लांट हेल्थ एंड फूड सिक्योरिटी' का समापन हो गया है। इस सम्मेलन में सतत कृषि, खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। देश-विदेश के विशेषज्ञों ने कृषि के भविष्य और नई तकनीकों पर अपने विचार साझा किए। यह आयोजन एमिटी फूड एंड एग्रीकल्चर फाउंडेशन, एमिटी विश्वविद्यालय और इंडियन सोसाइटी ऑफ माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। विशेषज्ञों ने कृषि क्षेत्र के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने जोर दिया कि बदलते पर्यावरणीय परिस्थितियों में नई तकनीकों का समावेश ही किसानों के लिए राहत का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। परंपरा का मेल ही भारत की वास्तविक पहचान समापन सत्र में राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आधुनिकता और परंपरा का मेल ही भारत की वास्तविक पहचान है। मंत्री सिंह ने तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच हरियाली को बचाने की चुनौती के बारे में बताया।उन्होंने टैरेस और किचन गार्डन जैसे प्रयासों को इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इस सम्मेलन से जनकल्याण के लिए नए विचार सामने आए हैं, ठीक वैसे ही जैसे समुद्र मंथन से अमृत निकला था।उन्होंने किसानों से केवल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि भूमि की उर्वरता और गुणवत्ता बनाए रखने पर भी ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित किया सम्मेलन के दौरान कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सात किसानों को सम्मानित किया गया। इन किसानों ने गुणवत्तापरक खेती और अन्य किसानों को प्रशिक्षण प्रदान कर एक मिसाल कायम की है। इसके अतिरिक्त, पोस्टर प्रजेंटेशन और शोध कार्यों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को भी पुरस्कार प्रदान किए गए।कार्यक्रम में प्रो. अनिल वशिष्ठ, डॉ. एस.एस चाहल, प्रो. पोखर रावल, डॉ. ललित महात्मा और प्रो. शालिनी सिंह विसेन सहित कई शिक्षाविद और वैज्ञानिक उपस्थित थे।
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