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    गोंडा में 58 सेंटीमीटर नीचे आया घाघरा का जलस्तर:फिर भी किसानों की फसलें काट रही नदी; 4 गांवों में सबसे ज्यादा कटान

    4 hours ago

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    गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर तेजी से घटने लगा है, लेकिन नदी के घटते पानी के साथ तटीय इलाकों में कटान तेज हो गया है। शनिवार सुबह 10:30 बजे घाघरा खतरे के निशान से 58 सेंटीमीटर नीचे बह रही थी। नदी लगातार किसानों की गन्ने और धान की फसलों के साथ खेतों की जमीन काट रही है। इससे तटवर्ती गांवों के किसानों की चिंता बढ़ गई है। तरबगंज तहसील के नवाबगंज क्षेत्र में दत्तानगर, साखीपुर, चहलवा और बाणीमाझा में सबसे ज्यादा कटान हो रहा है। पिछले महीने कटान की वजह से 10 से अधिक ग्रामीण अपने कच्चे मकान छोड़कर दूसरी जगह चले गए थे। अब नदी खेतों की ओर बढ़ रही है, जिससे किसानों को अपनी फसल और जमीन दोनों बचाने की चिंता सता रही है। शनिवार सुबह 9:30 बजे घाघरा नदी में कुल 1,66,018 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसमें गिरजा बैराज से 1,07,287, शारदा बैराज से 39,395, सरयू बैराज से 4,103 और सुहेली बैराज से 15,233 क्यूसेक पानी शामिल है। जलस्तर घटने के बावजूद नदी तटबंध के किनारे तक पहुंच रही है। बाढ़ खंड की टीमें तटबंध की सुरक्षा के लिए 24 घंटे निगरानी कर रही हैं। दत्तानगर समेत 4 गांवों में सबसे ज्यादा कटान नवाबगंज के दत्तानगर, साखीपुर, चहलवा और बाणीमाझा में नदी का कटान लगातार जारी है। किसानों की गन्ने और धान की फसलें नदी की चपेट में आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन्हीं फसलों की कमाई से परिवार का खर्च चलता है और बच्चों की पढ़ाई होती है। फसल के साथ खेत की जमीन कटने से उनके सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो रहा है। फसल बचाने की जगह खुद काटकर पशुओं को खिला रहे किसान नदी की कटान से परेशान किसान फसल को बहने से बचाने के लिए खुद ही गन्ना और धान काट रहे हैं। कई किसान काटी गई फसल पशुओं को खिला रहे हैं। ग्रामीण नदी की धार रोकने के लिए पेड़ों की टहनियां और फूस डालकर अस्थायी बचाव का प्रयास भी कर रहे हैं। कटान से 10 से ज्यादा परिवार छोड़ चुके हैं कच्चे मकान नवाबगंज क्षेत्र में कटान का असर सिर्फ खेतों तक नहीं है। पिछले महीने 10 से ज्यादा ग्रामीण अपने कच्चे मकान छोड़कर दूसरी जगह चले गए थे। अब नदी तटबंध के किनारे तक पहुंच रही है, जिससे ग्रामीणों को आगे भी खतरे की चिंता बनी हुई है। 48 घंटे में ज्यादातर प्रभावित आबादी के बाढ़ से मुक्त होने की उम्मीद गोंडा जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि नदी का जलस्तर तेजी से कम हो रहा है। बाढ़ से थोड़ी बहुत प्रभावित आबादी के अगले 48 घंटे में बाढ़ से मुक्त होने की उम्मीद है। हालांकि नवाबगंज के एक-दो गांव अभी भी प्रभावित रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि जहां कटान हो रही है, वहां उसे रोकने का काम किया जा रहा है। साथ ही संबंधित तहसीलों से नुकसान की रिपोर्ट मंगाई जा रही है, जिसके आधार पर प्रभावित लोगों को आर्थिक मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।
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