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    गगनयान मिशन के ड्रोग पैराशूट का क्वालिफिकेशन टेस्ट सफल:ज्यादा लोड डालकर किया चेक; ये एस्ट्रोनॉट्स की धरती पर वापसी में जरूरी

    4 hours ago

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    भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए ड्रोग पैराशूट का क्वालिफिकेशन लेवल लोड टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा हुआ। क्वालिफिकेशन लेवल टेस्ट में अधिकतम उड़ान भार से ज्यादा लोड डालकर पैराशूट की मजबूती और सुरक्षा मार्जिन की जांच की गई। इस टेस्ट के बाद पक्का हुआ कि भारत मजबूत और बड़ी क्षमता वाले रिबन पैराशूट को डिजाइन और बनाने में पूरी तरह सक्षम है। साथ ही पैराशूट असली मिशन जैसी परिस्थितियों में भी सुरक्षित और ठीक तरह से काम करेगा। गगनयान मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाने के लिए ड्रोग पैराशूट बहुत जरूरी है। जब कैप्सूल पृथ्वी के वातावरण में लौटता है, तो यही पैराशूट उसकी तेज गति को कम करने में मदद करता है। यह टेस्ट बुधवार (18 फरवरी) को चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड (RTRS) सुविधा में किया गया। यह डायनेमिक टेस्ट डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की स्पेशल हाई-स्पीड एयरोडायनेमिक और बैलिस्टिक मूल्यांकन सुविधा RTRS में पूरा हुआ। इसमें इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गनाइजेशन (ISRO) के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC), DRDO की एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADRDE) और TBRL की टीमों ने भाग लिया। गगनयान मिशन के बारे में जानें… इसरो का गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को स्वदेशी तकनीक से अंतरिक्ष में भेजकर सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना है। इसमें भारत में विकसित क्रू मॉड्यूल, सर्विस मॉड्यूल और जीवन रक्षक प्रणालियों का उपयोग होगा। मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में कुछ समय बिताने के बाद सुरक्षित लैंडिंग करेंगे। गगनयान के सफल होने से भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता रखने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा। गगनयान मिशन से भारत को क्या हासिल होगा गगनयान मिशन से जुड़ी अन्य खबरें… 24 अगस्त 2025: चिनूक हेलिकॉप्टर ने 4km की ऊंचाई से अंतरिक्ष से वापसी के क्रू मॉड्यूल को समुद्र में गिराया भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारी में ISRO ने पहला इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-1) सफलतापूर्वक पूरा किया था। यह टेस्ट गगनयान मिशन के लिए तैयार किए गए पैराशूट सिस्टम की असली परिस्थितियों की जांच करने के लिए किया गया। इसका मकसद गगनयान मिशन से पहले पैराशूट खुलने के प्रोसेस को चेक करना था। ये प्रोसेस मिशन के समय अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी तय करेगी। टेस्ट के दौरान लगभग 5 टन वजनी डमी क्रू कैप्सूल को वायुसेना के चिनूक हेलिकॉप्टर से 4 किमी की ऊंचाई से छोड़ा गया। पूरी खबर पढ़ें… ------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… इसरो चीफ बोले- भारत का चांद पर मानव मिशन 2040 तक, 2027 में गगनयान मिशन लॉन्च होगा इसरो चीफ वी. नारायणन ने कहा कि भारत ने 2040 तक अपने नागरिकों को चंद्रमा पर उतारने का टारगेट तय किया है। वहीं, भारत का पहला मानव स्पेस मिशन ‘गगनयान’ 2027 में लॉन्च होना है। नारायणन ने बताया कि इसरो 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की स्थापना और 2026 तक तीन बिना मानव वाले गगनयान मिशन लॉन्च करने पर काम कर रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
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