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    गोरखपुर नगर निगम में भाजपा-सपा के पार्षद आमने सामने:मेयर की अध्यक्षता में पारित हुआ निंदा प्रस्ताव, भड़के सपा पार्षद

    3 hours ago

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    गोरखपुर नगर निगम में बुधवार को महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा और समाजवादी पार्टी के पार्षद आमने-सामने आ गए। मामला उस निंदा प्रस्ताव से जुड़ा था। जिसे भाजपा पार्षदों ने नगर निगम सदन में पेश किया था। इस दौरान सपा पार्षदों और नेताओं ने जोरदार नारेबाजी की और करीब आधे घंटे तक हंगामा चलता रहा। जानिए पूरा मामला कुछ दिन पहले लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन पारित नहीं हो सके थे। इसी को लेकर गोरखपुर नगर निगम में भाजपा पार्षदों ने विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया। बैठक की अध्यक्षता महापौर डॉ मंगलेश कुमार श्रीवास्तव ने की। सपा पार्षदों का विरोध निंदा प्रस्ताव के विरोध में 10 से अधिक सपा पार्षद और पूर्व पार्षद सदन में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। सपा पार्षद जियाउल इस्लाम ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा— “हमारी पार्टी महिलाओं का सम्मान करती है। ये बीजेपी सरकार ने लोक सभा में महिला आरक्षण बिल को जानबूझकर पास नहीं होने दिया। और इसका ठीकरा सपा, कांग्रेस और दूसरी पार्टियों पर फोड़ दिया।” सपा पार्षदों ने महापौर की कुर्सी के सामने टेबल पर अपना ज्ञापन चिपका दिया। इसकी एक प्रति अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्र के माध्यम से महापौर तक भी भेजी गई। सपा नेताओं के तर्क सपा पार्षद जिलाउल इस्लाम ने कहा कि पहले की सरकारों ने स्थानीय निकायों और पंचायतों में महिलाओं को 33% आरक्षण दिया था। इसी वजह से नगर निगम में महिला महापौर भी चुनी गईं और कई महिलाओं को नेतृत्व का मौका मिला। पार्षद अशोक यादव, विजेन्द्र अग्रहरि, अशोक यादव और जुबेर अहमद ने कहा कि महापौर द्वारा इस मुद्दे पर बुलाई गई बैठक असंवैधानिक है। उनका कहना था कि नगर निगम सदन का उपयोग विकास कार्यों और जनहित योजनाओं के लिए होना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दल के हित के लिए। सपा पार्षदों की मुख्य मांगें भाजपा का पक्ष दूसरी ओर, महापौर मंगलेश श्रीवास्तव की अध्यक्षता में भाजपा पार्षदों ने विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि विपक्ष, खासकर इंडिया गठबंधन, महिला विरोधी मानसिकता रखता है। भाजपा पार्षदों ने कहा कि महिला आरक्षण के लिए यह संशोधन महत्वपूर्ण था, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण इसे पारित नहीं किया जा सका। उन्होंने इसे महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय बताया। सदन में नारेबाजी और टकराव बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ नारे लगाए। सपा की ओर से पूर्व जिला अध्यक्ष नगीना साहनी, हाजी शकील अंसारी समेत कई नेता मौजूद रहे, जबकि भाजपा पार्षदों ने पार्टी की नीतियों का समर्थन किया। सर्वसम्मति से लिया गया संकल्प अंत में नगर निगम के प्रतिनिधियों ने यह संकल्प लिया कि इस मुद्दे को जनता तक पहुंचाया जाएगा और महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। साथ ही विपक्ष के कथित रुख को उजागर करने की बात भी कही गई।
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