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    हाईकोर्ट जज बोले- कॉलेज में पहली बार सिगरेट पी:फिर छोड़ नहीं पाया; हुक्का बार की याचिका खारिज की, कविता लिखी- मेरी गलती मत दोहराना

    23 hours ago

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    इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मंगलवार को हुक्का बार चलाने की याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा, यूपी में अब होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और दूसरे सार्वजनिक स्थानों के तय स्मोकिंग जोन में भी ग्राहकों को हुक्का नहीं दिया जा सकेगा। जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अबधेश चौधरी की बेंच ने कहा कि हुक्का बार चलाना और रेस्टोरेंट में हुक्का देना सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध नियम, 2008 के तहत प्रतिबंधित है। जस्टिस शेखर ने अपने फैसले में एक कविता भी लिखी। प्रदेश के Gen-Z से सिगरेट से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा, पहली सिगरेट को हल्के में न लें। यह पहली गलती आदत बन जाती है। उदाहरण देने के लिए उन्होंने कॉलेज के दिनों के अपने अनुभव भी साझा किए। जज ने सुनाई अपनी कहानी… 'मैंने कभी सिगरेट न पीने का संकल्प लिया था' जस्टिस शेखर बी. सराफ ने सुनवाई के दौरान अपने छात्र जीवन के अनुभव को कविता के माध्यम से साझा किया। उन्होंने युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि धूम्रपान की शुरुआत अक्सर मजाक या जिज्ञासा में एक सिगरेट से होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत में बदल सकती है। उन्होंने बताया कि लॉ कॉलेज में पढ़ाई के दिनों में वह धूम्रपान करने वालों का मजाक उड़ाते थे और उन्होंने कभी सिगरेट न पीने का संकल्प लिया था। हालांकि, एक वरिष्ठ के साथ चाय पीते समय मजाक में सिगरेट का एक कश लेने से इसकी शुरुआत हुई। इसके बाद कभी-कभार की सिगरेट धीरे-धीरे नियमित आदत में बदल गई। 'निकोटिन पैच लिए, च्विंगम भी चबाया, लेकिन सिगरेट छूट नहीं रही थी' उन्होंने अपने अनुभव में धूम्रपान के कारण होने वाली परेशानियों का भी उल्लेख किया। जज ने कहा कि बाद में इस आदत को छोड़ने के लिए निकोटिन पैच और च्विंगम जैसे उपाय भी किए, लेकिन इसे छोड़ना आसान नहीं रहा। जस्टिस शेखर बी. सराफ ने अपने अनुभव के माध्यम से युवाओं को संदेश दिया कि धूम्रपान की पहली शुरुआत को मामूली समझना आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकता है। अब हुक्का बार से जुड़ी याचिकाओं के बारे में पढ़िए… हुक्का तैयार करना और परोसना भी सेवा के दायरे में याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि जिन रेस्टोरेंट के पास वैध फूड एस्टेब्लिशमेंट लाइसेंस हैं, उन्हें तय स्मोकिंग जोन में हुक्का परोसने की अनुमति दी जाए। उन्होंने पुलिस के दखल पर रोक लगाने की भी मांग की थी। कोर्ट ने इस तर्क को नहीं माना। पीठ ने कहा कि 2017 के नियमों में बदलाव के बाद ‘कोई अन्य सेवा’ की जगह ‘कोई भी सेवा’ शब्द इस्तेमाल किया गया है। इसके तहत हुक्का तैयार करना, उसमें तंबाकू भरना, कोयला लगाना, ग्राहक को हुक्का देना और कोयला बदलना जैसी गतिविधियां सेवा मानी जाएंगी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि अगर तैयार हुक्का ग्राहक को दे दिया जाए और वह खुद उसका इस्तेमाल करे तो इसे सेवा देने के बजाय उपकरण किराए पर देना माना जाना चाहिए। कोर्ट ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया। भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दे सकते हैं… पुलिस को कार्रवाई का अधिकार हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ ग्राहक के खुद हुक्का इस्तेमाल करने से उसकी कानूनी स्थिति नहीं बदलती। हुक्का तैयार करने और परोसने में सेवा देने का तत्व मौजूद है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि फूड सेफ्टी विभाग और नगर निगम के अधिकारी हुक्का बार चलाने के लिए अलग से लाइसेंस जारी नहीं कर सकते। वहीं, नियमों का उल्लंघन होने पर पुलिस को COTPA के तहत तलाशी, जब्ती और दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार है। पीठ ने कहा कि सार्वजनिक जगहों पर बिना धुएं की हवा में सांस लेने का गैर-धूम्रपान करने वालों का मौलिक अधिकार, प्रतिबंधित धूम्रपान गतिविधियों से जुड़े कारोबार के अधिकार से ज्यादा महत्वपूर्ण है। मुख्य सचिव और DGP को भेजी जाएगी फैसले की कॉपी हाईकोर्ट ने माना कि हुक्का बार चलाना और रेस्टोरेंट में हुक्का उपलब्ध कराना लागू कानूनों का उल्लंघन है। सभी याचिकाएं खारिज करते हुए कोर्ट ने अपने फैसले की कॉपी उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और DGP को जरूरी कार्रवाई के लिए भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा- हुक्का सिगरेट से कम नुकसानदायक नहीं फैसले के अंत में कोर्ट ने हुक्का और तंबाकू के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि करीब एक घंटे के हुक्का सेशन में लगभग 200 कश लिए जा सकते हैं और इसके नुकसान को लेकर यह धारणा गलत है कि हुक्का सिगरेट से कम हानिकारक है। कोर्ट ने कहा कि हुक्का भी लत लगाने वाला और नुकसानदायक है। इसमें सिगरेट की तरह जहरीले रसायन हो सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि हुक्के के लिए भी स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी की जरूरत पर विधायी स्तर पर ध्यान दिया जाना चाहिए। यूपी में कब हुक्का बार पर लगी रोक ------------------------ यह खबर भी पढ़िए- पूर्व IAS दिव्या मित्तल की यूपी की राजनीति में एंट्री : बोलीं- डरूंगी नहीं, हिसाब मांगूंगी, किसी पार्टी का नहीं, आपका साथ चाहिए यूपी की पूर्व IAS दिव्या मित्तल राजनीति में उतरेंगी। उन्होंने मंगलवार सुबह 8.30 बजे फेसबुक पर वीडियो जारी करके इसका खुलासा किया। उन्होंने कहा- यूपी में ही रहूंगी। डरूंगी नहीं, सवाल करूंगी। मुझे पैसा और बाहुबल नहीं चाहिए। सिर्फ आप लोगों का साथ चाहिए। (पूरी खबर पढ़िए)
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