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    Impact of Global Tensions: विदेशी निवेशकों ने सरकारी बॉन्ड से ₹17,689 करोड़ निकाले, 20 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा प्रतिफल

    3 hours from now

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    पश्चिम एशिया (Middle East) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय बॉन्ड बाजार में खलबली मचा दी है। वैश्विक स्तर पर निवेशकों के बीच बढ़ते जोखिम (Risk-aversion) के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) से भारी निकासी की है।'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR) से बड़ी निकासीक्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCIL) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने 'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों से 17,689 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं।निवेश में गिरावट: 27 फरवरी को FAR प्रतिभूतियों में एफपीआई का निवेश 3,31,007.648 करोड़ रुपये था, जो 1 अप्रैल 2026 तक घटकर 3,13,318.661 करोड़ रुपये रह गया है।कारण: विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ने का डर और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने की आशंका ने विदेशी निवेशकों को बिकवाली के लिए मजबूर किया है।बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह निकासी ऐसे समय पर हुई जब घरेलू बॉन्ड प्रतिफल में तेज बढ़ोतरी हुई। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया जिससे मुद्रास्फीति जोखिम बढ़ने और उभरते बाजारों में वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने की आशंका बढ़ी है। इसी अवधि में भारतीय सरकारी बॉन्ड, विशेषकर 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल करीब 0.33 प्रतिशत बढ़ा।इसे भी पढ़ें: Assam की सियासत में Owaisi की एंट्री, CM Himanta को दी चेतावनी- मिलेगा साफ संदेश 27 मार्च को यह प्रतिफल सात प्रतिशत से अधिक हो गया था जो पिछले 20 महीनों का उच्चतम स्तर है और बॉन्ड बाजार में लगातार बिकवाली के दबाव को दर्शाता है। बॉन्ड बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंचे प्रतिफल से मौजूदा ‘बॉन्ड होल्डिंग’ कम आकर्षक हो जाती हैं। इसके कारण विदेशी निवेशक विशेषकर ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में जैसे एफएआर मार्ग के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में अपनी हिस्सेदारी घटाते हैं। एचडीएफसी बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, निकट अवधि में 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड प्रतिफल 6.90 से 7.20 प्रतिशत के दायरे में रह सकता है।
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