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    Israel से भारत की दोस्ती पर सवाल उठाने वाले राजनीतिक दलों को Jaishankar ने दिया करारा जवाब

    3 hours from now

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    भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जिस बेबाकी और ठोस अंदाज में भारत की विदेश नीति का पक्ष रखा है, उसने यह साफ कर दिया है कि नया भारत अब किसी दबाव में झुकने वाला नहीं, बल्कि अपने हितों के लिए हर मोर्चे पर आक्रामक और संतुलित रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। हम आपको बता दें कि बुधवार शाम हुई सर्वदलीय बैठक में जयशंकर की ओर से दिया गया बयान भारत की बदलती सामरिक सोच का जबरदस्त प्रदर्शन था। उन्होंने साफ कहा कि इजराइल ने भारत को सैन्य संघर्षों के दौरान महत्वपूर्ण मदद दी है और वह रक्षा प्रौद्योगिकी का भरोसेमंद साझेदार रहा है। यह बयान अपने आप में बहुत बड़ा संकेत है, क्योंकि अब तक इस तरह की बातों को खुले तौर पर स्वीकार करने से बचा जाता रहा था।असल में यह बयान उस समय आया जब विपक्ष की ओर से अमेरिका और इजराइल के साथ भारत की नजदीकियों पर सवाल उठाए जा रहे थे। जयशंकर ने इन सवालों का जवाब केवल शब्दों से नहीं, बल्कि तथ्यों से दिया। उन्होंने बताया कि अमेरिका भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और उच्च स्तर की तकनीक का स्रोत है, जबकि इजराइल रणनीतिक और तकनीकी सहयोग में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। भारत ने एक साथ कई मोर्चों पर अपनी ताकत दिखाई है। जहां एक ओर इजराइल के साथ मजबूत रक्षा संबंध हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ भी भारत ने अपने रिश्तों को मजबूती से बनाए रखा है। जयशंकर ने यह स्पष्ट किया कि ईरान ने भारत के प्रति मित्रतापूर्ण रुख दिखाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य से चार भारतीय जहाजों को गुजरने की अनुमति दी, जबकि वहां युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। साथ ही पांच और जहाज रास्ते में हैं।देखा जाये तो यह घटनाक्रम केवल कूटनीति नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का खेल है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की धुरी है। ऐसे में भारत के जहाजों को वहां से सुरक्षित मार्ग मिलना यह दिखाता है कि भारत ने अपनी रणनीतिक स्थिति कितनी मजबूत कर ली है।जयशंकर ने ईरान से जुड़े एक और संवेदनशील मुद्दे पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने उन आरोपों को खारिज किया कि भारत ने ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या पर चुप्पी साधी। उन्होंने बताया कि भारत ने समय पर शोक संवेदना व्यक्त की और विदेश सचिव ने संवेदना पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए।यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत ने किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने की बजाय पूरे क्षेत्रीय परिदृश्य को ध्यान में रखा। संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में रहने वाले अस्सी लाख भारतीयों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए भारत ने अपने कदम बहुत सोच समझकर उठाए।और यही वह रणनीतिक परिपक्वता है जो भारत को अन्य देशों से अलग करती है। जब ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों से खाड़ी देशों में नाराजगी थी, तब भारत ने संतुलन बनाए रखा। न तो ईरान से दूरी बनाई और न ही खाड़ी देशों की अनदेखी की। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने 2000 Paratroopers को Middle East में भेजा, Iran बोला तगड़ा जवाब देंगेभारत की समुद्री रणनीति भी इस पूरे घटनाक्रम में उभरकर सामने आई। ईरान के नौसैनिक जहाज को कोच्चि बंदरगाह पर सुरक्षित ठिकाना देना और संभावित खतरे से बचाना यह दिखाता है कि भारत केवल जमीन पर ही नहीं, समुद्र में भी निर्णायक भूमिका निभा रहा है।अब इस पूरी कहानी का दूसरा महत्वपूर्ण अध्याय फ्रांस में खुलने जा रहा है, जहां जयशंकर जी-7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। यह केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने का मंच है। यहां भारत न केवल अपनी बात रखेगा, बल्कि अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता के जरिए नए समीकरण भी बनाएगा।रणनीतिक दृष्टि से देखें तो भारत ने एक साथ तीन बड़े शक्ति केंद्रों अमेरिका, इजराइल और ईरान के साथ अपने रिश्तों को संतुलित रखा है। यह किसी भी देश के लिए आसान नहीं होता, लेकिन भारत ने इसे संभव कर दिखाया है।बहरहाल, इस पूरी कूटनीतिक चाल का सीधा संदेश है कि भारत अब वैश्विक एजेंडा तय करने वाला देश बन चुका है। भारत अपनी शर्तों पर संबंध बनाएगा, अपने हितों को सर्वोपरि रखेगा और जरूरत पड़ने पर हर मोर्चे पर सख्त रुख अपनाएगा। यह नया भारत है जो न तो दबाव में आता है, न ही भ्रम में पड़ता है। यह वह भारत है जो वैश्विक राजनीति के शतरंज पर हर चाल सोच समझकर चलता है और हर बार खेल को अपने पक्ष में मोड़ देता है।
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