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    जर्जर गोंडा-घाघरा पुल के मरम्मत कार्य में तेजी:ज्वाइंटर-अप्रोच की खुदाई, 15 जून तक काम पूरा करने का लक्ष्य

    5 hours ago

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    गोंडा-घाघरा संजय सेतु के मरम्मत कार्य में तेजी लाई गई है पुल के जर्जर ज्वाइंटर और अप्रोच को मशीनों की मदद से तोड़कर मरम्मत का काम किया जा रहा है। कार्यस्थल पर बड़ी संख्या में मशीनें और मजदूर लगाए गए हैं, ताकि 15 जून तक यह कार्य पूरा किया जा सके। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने कार्यदायी संस्था को 15 जून तक हर हाल में मरम्मत कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। मरम्मत के दौरान खोदी गई पक्की सड़क का निर्माण भी कार्य पूरा होने के बाद किया जाएगा, ताकि वाहनों के आवागमन में कोई बाधा न आए। पुल की खराब स्थिति के कारण आम जनता को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इस समस्या को देखते हुए शासन ने मरम्मत कार्य के लिए करीब ढाई करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी। कार्यस्थल पर सुरक्षा और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी अनंत मौर्य ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संजय सेतु की मरम्मत का कार्य निर्धारित समय सीमा, यानी दो माह के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए। इसके लिए कार्यदायी संस्था को आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की मरम्मत से क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा और दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी। प्रशासन द्वारा कार्य की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। इस मरम्मत कार्य से क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है, क्योंकि पहले यहां आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती थी।NHAI के अनुसार संजय सेतु के कई हिस्सों को तोड़कर नए सिरे से मरम्मत की जाएगी इस कार्य का मुख्य उद्देश्य पुल के ढांचे को अगले 20 से 25 वर्षों के लिए मजबूत बनाना है। घाघरा नदी पर एक नए पुल का प्रस्ताव फिलहाल भारत सरकार के पास लंबित है। जानकारों का मानना है कि यदि नया पुल स्वीकृत भी हो जाता है, तो उसे बनकर तैयार होने में कम से कम तीन साल का समय लगेगा। NHAI के अनुसार संजय सेतु के कई हिस्सों को तोड़कर नए सिरे से मरम्मत की जाएगी इस कार्य का मुख्य उद्देश्य पुल के ढांचे को अगले 20 से 25 वर्षों के लिए मजबूत बनाना है।घाघरा नदी पर एक नए पुल का प्रस्ताव फिलहाल भारत सरकार के पास लंबित है। जानकारों का मानना है कि यदि नया पुल स्वीकृत भी हो जाता है, तो उसे बनकर तैयार होने में कम से कम तीन साल का समय लगेगा।यही कारण है कि NHAI वर्तमान संजय सेतु की रिपेयरिंग को प्राथमिकता दे रहा है।ताकि यातायात पूरी तरह ठप न हो।
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