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    झांसी में गैस नहीं मिल रही, होटलों पर लगे ताले:दुकानदार बोले- लकड़ी की भट्टी से नहीं बन पा रहा, मैन्यू से तवा रोटी भी गायब

    6 hours ago

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    झांसी में कॉमर्शियल एलपीजी गैस की किल्लत अब होटल कारोबार पर असर डालने लगी है। गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिलने से शहर के कई होटल और ढाबों का संचालन प्रभावित हो गया है। कुछ जगहों पर होटल अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं, जबकि कई संचालक मजबूरी में लकड़ी और कोयले की भट्टी पर खाना बना रहे हैं। स्थिति यह है कि जिन होटलों में पहले रोजाना ग्राहकों की भीड़ रहती थी और खाने के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ता था, वहां अब सन्नाटा दिखाई दे रहा है। गैस की कमी के कारण होटल संचालकों को मेन्यू सीमित करना पड़ रहा है और कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है। होटल संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित है। दुकानदारों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ईरान से जुड़े युद्ध और उससे प्रभावित सप्लाई चेन के कारण गैस की उपलब्धता पर असर पड़ा है। इसका सीधा असर अब स्थानीय बाजार और होटल कारोबार पर दिखाई देने लगा है। कई होटल संचालकों ने बताया कि बिना गैस के बड़े पैमाने पर खाना बनाना संभव नहीं है। ऐसे में मजबूरी में लकड़ी और कोयले की भट्टी का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन इससे काम सुचारु रूप से नहीं चल पा रहा। लकड़ी की भट्टी पर खाना बनने में ज्यादा समय लगता है और धुएं की वजह से कर्मचारियों को भी परेशानी होती है। शहर के कई होटलों ने सीमित मेन्यू के साथ काम चलाने की कोशिश की, लेकिन लगातार गैस नहीं मिलने से कुछ संचालकों ने अस्थायी रूप से होटल बंद कर दिए हैं। होटल मालिकों का कहना है कि अगर जल्द ही कॉमर्शियल एलपीजी की सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो उन्हें और भी होटल बंद करने पड़ सकते हैं। गैस संकट का असर ग्राहकों पर भी पड़ रहा है। जिन जगहों पर पहले दिनभर रौनक रहती थी, वहां अब ग्राहक कम दिखाई दे रहे हैं। कुछ होटल संचालक सिर्फ दाल-चावल या सीमित व्यंजन बनाकर काम चला रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण गैस सप्लाई इसी तरह प्रभावित रही तो आने वाले दिनों में झांसी में होटल कारोबार को बड़ा नुकसान हो सकता है। वहीं, होटलों में काम करने वाले कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर भी संकट गहराने लगा है। होटलों से गायब हुई तबा रोटी गैस संकट का असर अब होटलों के मेन्यू पर भी दिखाई देने लगा है। झांसी के कई होटलों से तबा रोटी लगभग गायब हो गई है। होटल संचालकों का कहना है कि तबा रोटी बनाने के लिए गैस वाले बड़े चूल्हे का इस्तेमाल होता है, लेकिन कॉमर्शियल एलपीजी नहीं मिलने के कारण वह चूल्हा नहीं जल पा रहा है। ऐसे में होटल संचालक मजबूरी में सिर्फ तंदूरी रोटी बनाकर ही काम चला रहे हैं। इसके कारण ग्राहकों के पास भी खाने के विकल्प कम हो गए हैं। लकड़ी के दाम में 200 रुपए तक उछाल कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी रुकने का असर अब ईंधन के दूसरे विकल्पों पर भी दिखाई देने लगा है। होटल संचालकों ने गैस के विकल्प के तौर पर लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल शुरू किया तो इनके दाम भी बढ़ गए। झांसी में एक सप्ताह पहले जो लकड़ी 500 से 600 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही थी, उसके दाम बीते दो दिन में बढ़कर करीब 800 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। इससे होटल संचालकों की लागत भी बढ़ने लगी है। इलाइट चौराहा और गोविंद चौराहा इलाके में कई होटलों में खाने की उपलब्धता घट गई है, जबकि कुछ होटल अस्थायी रूप से बंद भी कर दिए गए हैं। घरेलू सिलेंडर पर मुनाफाखोरी, 1800-2000 में ब्लैक गैस संकट के बीच घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। दैनिक भास्कर की टीम जब हालात जानने शहर के होटलों पर पहुंची तो कुछ जगहों पर होटल संचालक कॉमर्शियल गैस की जगह घरेलू सिलेंडर से खाना बनाते मिले। होटल मालिकों ने बताया कि उनके पास पहले से रखा एक सिलेंडर था, फिलहाल उसी से काम चला रहे हैं। इसके बाद गैस नहीं मिली तो होटल बंद करना पड़ेगा। कुछ दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे हॉकर्स से 1800 से 2000 रुपए तक में घरेलू सिलेंडर ब्लैक में खरीद रहे हैं। उनका कहना है कि अगर ऐसा नहीं करेंगे तो होटल बंद हो जाएगा और वहां काम करने वाले कर्मचारियों का रोजगार भी खत्म हो जाएगा।
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