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    किडनी बेचने वाला MBA स्टूडेंट गर्लफ्रेंड के सामने फूट-फूटकर रोया:कानपुर में पुलिसवालों के पैर पकड़े; बोला- मां को मत बताना

    9 hours ago

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    कानपुर में रुपए के लालच में अपनी किडनी बेचने वाला आयुष हैलट अस्पताल के ICU में एडमिट है। पुलिस ने आयुष से परिजनों को जानकारी देने की बात कही। इस पर वह पुलिसकर्मियों के पैर पकड़कर रोने लगा। कहा- सर, मेरी मां को कुछ मत बताना। मैं नौकरी करने की बात कहकर कानपुर आया था। पुलिस का कहना है कि इसके बाद आयुष ने बिहार के बेगूसराय में रहने वाली अपनी गर्लफ्रेंड से हमारी बात कराई। वह आयुष से मिलने कानपुर आई। गर्लफ्रेंड को देखते ही आयुष की आंखों से आंसू निकल पड़े। वह फूट-फूटकर रोने लगा। उसने कहा- मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। गर्लफ्रेंड ने सिर पर हाथ फेरकर दिलासा दिया। कानपुर में किडनी गैंग के डॉक्टरों के चंगुल में फंसे MBA स्टूडेंट आयुष ने अपनी किडनी बेच दी। इसके बाद भी जब रुपए नहीं मिले, तो उसने मामले का पर्दाफाश कर दिया। किडनी निकलने के बाद उसकी तबीयत पूरी तरह सही नहीं है। उसे मेडिकल टीम की निगरानी में रखा गया है। आयुष बिहार के समस्तीपुर और लड़की बेगूसराय की है। इधर 6 लोगों को गिरफ्तर कर जेल भेजने के बाद पुलिस ने इस गैंग से जुड़े चार फरार डॉक्टरों के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया है। एक टीम मेरठ रवाना हुई है। वहां से पुलिस को जरूरी इनपुट मिला है। गर्लफ्रेंड ने आयुष से पूछा- आखिर किडनी क्यो डोनेट की? दरअसल, किडनी डोनेट मामले में छापेमारी के बाद पुलिस ने आयुष को हैलट अस्पताल के सुपर स्पेशसिलयिटी के 6वें फ्लोर में बने आईसीयू में एडमिट कराया गया है। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे पुलिस की कड़ी सुरक्षा में आयुष की गर्लफ्रेंड को उससे मिलवाया गया। बिहार से कानपुर पहुंचने के बाद उसकी सुरक्षा में रावतपुर थाने के तीन पुरुष, एक महिला दरोगा और एक कांस्टेबल थे। 3 दरोगा आयुष की गर्लफ्रेंड के साथ आईसीयू में थे, जबकि दो पुलिसकर्मी पीजीआई के नीचे मौजूद थे। गर्लफ्रेंड ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए उसे ढांढ़स बंधाते हुए उसके आंसू पोछे। लड़की ने आयुष से पूछा- आखिर किडनी क्यो डोनेट की? जिस पर उसने कहा कि फीस के लिए पैसे जमा नहीं हो रहे थे। इसी कारण वह दो महीने से परेशान था। इस दौरान उसकी मुलाकात शिवम अग्रवाल से हो गई, उसकी बातों में आकर उसने किडनी ट्रांसप्लांट कर दी। गर्लफ्रेंड बोली- आयुष की मां परेशान हैं आयुष की गर्लफ्रेंड ने उससे नाराजगी जाहिर की। इस पर आयुष ने उसका हाथ पकड़ कर बेड से उठने का प्रयास किया, लेकिन दर्द की वजह से उठ नहीं सका। लड़की ने डॉक्टरों और हॉस्पिटल स्टाफ से आयुष के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उसने आयुष को बताया कि उसकी मां काफी परेशान है। उनके साथ आने की बात कह रही थीं। उसने पुलिस को बताया कि आयुष का छोटे भाई ऋषभ भी है। वह प्राइवेट जॉब करता है। करीब एक घंटे तक आईसीयू में रहने के बाद वह जैसे ही बाहर निकली, तो उसे मीडियाकर्मियों ने घेर लिया। इसके बाद वह दोबारा आईसीयू में चली गई। फिर पुलिसकर्मियों ने उसे अस्पताल के पिछले गेट से बाहर निकलवाया। गर्लफ्रेंड देहरादून के उसी ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में पढ़ती है, जहां आयुष पढ़ता है। वह दूसरे सेमेस्टर में है, जबकि आयुष फोर्थ सेमेस्टर में है। आईसीयू के बाहर दिन भर बैठा रहा पारूल का भाई मेरठ निवासी रिसीवर पारुल तोमर के पति विकास तोमर बुधवार को कानपुर नहीं पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने उनसे फोन पर बात की। बुधवार को पारुल का भाई दिव्यांक कानपुर आया। वह बिजनौर के धौलपुर का रहने वाला है। वह हैलट के सुपर स्पेशलियटी पीजीआई के 6वें फ्लोर में बने आईसीयू में दिन भर बाहर बैग लेकर बैठा रहा। उसे मिलने नहीं दिया गया। उसने बताया कि डॉ. अफजल बहन को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए कानपुर लाया था। किडनी डोनेट में कितने पैसे दिए गए? इस सवाल पर उसने कहा कि जीजा ने पैसे दिए थे, हम नहीं जानते। इसके बाद उसने किसी भी सवाल का जवाब देने से इंकार कर दिया। आयुष ने पुलिस को बताया- इस तरह गैंग के चंगुल में फंसा डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि आयुष कुमार अब बातचीत करने की स्थिति में है। बुधवार को उससे पूछताछ की गई। डीसीपी के मुताबिक आयुष ने बताया कि 6 लाख रुपए में किडनी का सौदा हुआ था। आधे रुपए नकद और बाकी ऑपरेशन के बाद अकाउंट में डालने को कहा गया था। ऑपरेशन के बाद साढ़े तीन लाख रुपये ही खाते में दिए गए। आयुष के मुताबिक सबसे पहले वह अली नाम के एक व्यक्ति के संपर्क में आया। उसने डॉ. अनुराग उर्फ अमित से बात कराई। इसके बाद डॉ. वैभव से बात हुई। फिर उसने डॉ. अफजल से मिलवाया। डॉ. अफजल ने आयुष की पूरी मेडिकल रिपोर्ट मंगवाई। उसके बाद उसे एजेंट शिवम से मिलवाया। शिवम ने इसकी पूरी रिपोर्ट नोएडा में डॉ. रोहित को भेजी। डॉ. रोहित के कहने पर ही कानपुर के आहूजा अस्पताल में ऑपरेशन करने की बात बनी। पूरी बात होने पर ही आयुष कानपुर आया। मेरठ में अल्फा अस्पताल चलाता है डॉ. अफजल डीसीपी के मुताबिक, डॉ. अफजल मेरठ में अल्फा अस्पताल का संचालक है। डॉ. अफजल के अलावा डॉ. वैभव और डॉ. अनुराग उर्फ अमित मेरठ के ही रहने वाले हैं। इसीलिए उनकी तलाश में एक टीम मेरठ भेजी गई है। डॉ. रोहित का पता लगाने के लिए शिवम की कॉल डिटेल निकाली जा रही है। यह लोग देश छोड़कर भाग न जाएं, इसलिए लुकआउट नोटिस जारी कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि आयुष का कहना है कि दो गाड़ियों से 8 डॉक्टरों की टीम आहूजा हॉस्पिटल आई थी। जिसमें डॉ. अफजल, डॉ. वैभव और डॉ. अनुराग समेत 5 लोग एक गाड़ी में थे। जबकि दूसरी कार में 3 लोग मौजूद थे। सीसीटीवी फुटेज में मिले नंबरों के आधार पर जांच आगे बढ़ी, तो पुलिस को पता चला कि एक गाड़ी लखनऊ और दूसरी गाजियाबाद की ओर रवाना हुई है। गाजियाबाद में टैक्सी वाले को यूपीआई से किराया ट्रांसफर किया गया है। इसके बाद डॉक्टर समेत पूरे मेडिकल स्टॉफ ने मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया है। डीसीपी वेस्ट ने बताया कि आरोपियों की तलाश में लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा में पुलिस टीम लगी हुई है। देर रात तक गिरफ्तारी की संभावना है। आयुष गिड़गिड़ाकर बोला- सर बाकी रुपए दिलवा दीजिए बिहार के समस्तीपुर का रहने वाले आयुष कुमार ने पुलिस को अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बताई। कहा- घर की जमीन गिरवी रखी है। इसके चलते उसे लोन नहीं मिला। साइबर अपराधियों के चक्कर में भी फंस गया। उनके कहने पर म्यूल अकाउंट खुलवाया था। साइबर अपराधियों ने 20 हजार रुपए देने को कहा था, वह भी नहीं दिया। पिता के न रहने पर घर की स्थिति खराब है। पढ़ाई न छूट जाए इसके लिए किडनी बेचने का फैसला लिया था, लेकिन उसे पैसा भी नहीं दिया गया। उसने पुलिस अधिकारियों से हाथ जोड़कर गुहार लगाई के शेष रकम दिलवा दीजिए। 3 संदिग्धों को पुलिस ने उठाया कानपुर में किडनी के अवैध ट्रांसप्लांट मामले में 6 को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस अब फरार चार लोगों की तलाश में जुटी है। उन सभी के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया है। फरार डॉक्टरों को पकड़ने के लिए पुलिस की एक टीम मेरठ गई है। इस पूरे खेल में अल्फा अस्पताल के संचालक डॉ. अफजल के साथ डॉ. रोहित उर्फ राहुल, डॉ. वैभव और डॉ. अनुराग उर्फ अमित की पुलिस को तलाश है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि मेरठ के अल्फा हॉस्पिटल में 100 से अधिक ट्रांसप्लांट कराए गए हैं। इस अस्पताल का संचालक किडनी कांड में फरार डॉ. अफजल ही है। इसलिए पुलिस उसकी तलाश में लगी है। इसके बाद मेरठ के लिए एक टीम रवाना हो गई है। इसके साथ ही बुधवार को पुलिस 3 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। डीसीपी वेस्ट एमए कासिम आबिदी ने बताया- एजेंट शिवम अग्रवाल ने पूछताछ में बताया कि डॉ. अफजल ने अपने हॉस्पिटल में भी अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट कराने की बात कबूली है। साथ ही जांच में सामने आया है कि कानपुर के IMA की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा के आहूजा अस्पताल का रजिस्ट्रेशन सितंबर 2025 में हुआ था, जबकि रजिस्ट्रेशन से पहले भी अस्पताल में कई ट्रांसप्लांट किए गए है। ट्रांसप्लांट के लिए ऑपरेशन थिएटर देते थे शहर के अस्पताल पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया है कि एजेंट शिवम अग्रवाल के संपर्क में शहर के आहूजा, प्रिया, मेड लाइफ समेत 6-7 अस्पताल थे। इनमें वह किडनी ट्रांसप्लांट के लिए ऑपरेशन थिएटर उपलब्ध कराते थे, साथ ही पोस्ट ऑपरेटिव केयर भी देते थे। डीसीपी वेस्ट के मुताबिक, डॉ रोहित और डॉ अफजल की गिरफ्तारी के लिए मेरठ, नोएडा, दिल्ली पुलिस टीमें रवाना की गई है। मेरठ पुलिस ने को-ऑर्डिनेट कर अल्फा अस्पताल का लेखा-जोखा लिया जा रहा है। इसके साथ ही अस्पताल में लगे कैमरों की डीवीआर भी जब्त की जाएगी। हालांकि कानपुर की तरह मेरठ के भी अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे बंद कर ऑपरेशन कराए जाने की आशंका है। मरीजों के ऑपरेशन के लिए डॉक्टरों की टीम लाने वाले डॉ. रोहित की गिरफ्तारी के बाद अन्य अस्पतालों के नाम भी सामने आएंगे। साउथ अफ्रीका की महिला को किसने डोनेट किया, इसकी जांच साउथ अफ्रीका की महिला अरेबिका के किडनी ट्रांसप्लांट के मामले में पुलिस के हाथ अभी कोई सुराग नहीं लगा है। एसीपी कल्याणपुर आशुतोष कुमार ने बताया कि साउथ अफ्रीकन महिला को किडनी किसने डोनेट की, वह शहर में कहां और कितने दिन रुकी, इसकी भी जांच की जा रही है। प्रिया, मेड लाइफ और आहूजा हॉस्पिटल के डीवीआर कब्जे में ले लिए गए है। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल डाटा का एनालिसिस भी किया जा रही है, जिससे साउथ अफ्रीकन महिला के बारे में जानकारी मिल सके। अब भास्कर के सबसे बड़े सर्वे में हिस्सा लीजिए… यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए… ------------------------------ ये खबर भी पढ़िए… चोर का पीछा कर रहे सिपाही के दोनों पैर कटे:गोंडा स्टेशन पर आरोपी हिरासत से भागा, सिपाही पकड़ने दौड़ा तो ट्रेन की चपेट में आया यूपी के गोंडा रेलवे स्टेशन पर पुलिस हिरासत से भाग रहे चोर को पकड़ने की कोशिश में GRP सिपाही ट्रेन की चपेट में आ गया। उसके दोनों पैर कट गए। एक पैर कटकर अलग हो गया, जबकि दूसरा खाल के सहारे लटका है। घटना मंगलवार रात 12 बजे की है। जख्मी होने के बाद भी सिपाही आकाश सिंह (29) ने चोर सुनील कुमार (35) को पकड़ लिया। चीख-पुकार सुनकर जीआरपी स्टेशन से पुलिसवाले आ गए। उन्होंने चोर को दबोच लिया। पढ़ें पूरी खबर…
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