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    कॉजपा ने Delhi Police पर लगाया नेताओं की हिरासत जानबूझकर लंबी खींचने का आरोप

    36 minutes from now

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    कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पार्टी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की ‘अवैध गिरफ्तारी’ को जानबूझकर लंबा खींच रहे हैं। पार्टी ने दावा किया कि अदालत की कार्यवाही में देरी की जा रही है और जमानतदारों की गारंटी को ‘अस्पष्ट’ आधार पर खारिज किया गया है। इस बीच, मामले की सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट को मिली कथित धमकियों के संबंध में पुलिस ने गैर-संज्ञेय रिपोर्ट दर्ज की है।कॉजपा के दोनों नेता जंतर-मंतर में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में हैं। जंतर-मंतर को हाल ही में निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया था। दोनों नेताओं ने वहां के बंद दरवाजों को फांदकर प्रवेश किया था।उन्हें 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया और 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘प्रशासन आशु और सौरव की अवैध गिरफ्तारी को लंबा खींचने और उनकी रिहाई रोकने के लिए अदालत की कार्यवाही में देरी करने की हर तरह की अनुचित कोशिश कर रहा है।’’ दीपके ने कहा, ‘‘उन्हें जेल में रखने का कोई कानूनी आधार नहीं है, इसलिए उन्हें हिरासत में बनाए रखने के लिए देरी करने के तरीके अपनाए जा रहे हैं।’’ कॉजपा की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने भी दिल्ली पुलिस और राज्य के अधिकारियों पर विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) के समक्ष कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि दोपहर 12 बजे निर्धारित सुनवाई में कई घंटे की देरी हुई।इन आरोपों पर पुलिस की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। दिन की कार्यवाही के बाद संवाददाताओं से बातचीत में सिंह ने कहा कि एसईएम और सरकारी अभियोजक शाम करीब साढ़े पांच बजे पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेताओं की रिहाई पर विचार करने के बजाय कार्यवाही को मजिस्ट्रेट को मिले कथित धमकी भरे संदेश की ओर मोड़ दिया गया।सिंह ने कहा, ‘‘लगातार चार दिन तक पेश नहीं होने वाले सरकारी अभियोजक अचानक आज पहुंचे और उन्होंने कार्यवाही को कथित धमकी भरे संदेश की ओर मोड़ने की कोशिश की।’’ उन्होंने कहा कि कॉजपा के वकीलों ने मजिस्ट्रेट से संदेश भेजने वाले की पहचान करने और उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया, लेकिन उनकी दलीलें नहीं सुनी गईं। सिंह ने कहा, ‘‘हमारे वकीलों ने कहा कि अगर किसी ने आपको धमकी दी है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई कीजिए। आदेश में उसका नंबर दर्ज कीजिए और हमें उसका नाम बताइए।’’ उन्होंने सवाल किया कि कथित धमकी भरे संदेश का दास और रांका से जुड़े मामले की कार्यवाही पर क्या असर होना चाहिए।उन्होंने कहा कि इस संबंध में कोई सत्यापन या सहायक दस्तावेज अदालत के रिकॉर्ड में पेश नहीं किए गए। सिंह ने पूछा, ‘‘इसका आशुतोष और सौरव के मामले से क्या लेना-देना है?’’ दिल्ली पुलिस ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर धमकी देने के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ गैर-संज्ञेय रिपोर्ट दर्ज की है। गैर-संज्ञेय रिपोर्ट आम तौर पर ऐसे अपराधों के संबंध में दर्ज की जाती है, जिनमें पुलिस कानून के तहत वारंट के बिना आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकती या मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जांच नहीं कर सकती।कथित धमकियों और उनमें शामिल लोगों के बारे में तत्काल जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी। कॉजपा की कानूनी प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों नेताओं की ओर से पेश जमानतदारों के सत्यापन में देरी की गई और चार जमानतदारों को ‘‘अस्पष्ट’’ आधार पर खारिज कर दिया गया। उन्होंने बैंक की मुहर वाली सावधि जमा रसीद (एफडीआर) के लिए अतिरिक्त मंजूरी की जरूरत पर भी सवाल उठाया।सिंह ने कहा, ‘‘सत्यापन के संबंध में रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं है। सौरव और आशुतोष के संबंध में भी रिकॉर्ड पर कुछ नहीं है।’’ दोनों नेताओं की हिरासत जानबूझकर लंबी खींचने का आरोप लगाते हुए सिंह ने कहा, ‘‘उन्हें रिहा नहीं करने की जो साजिश रची गई थी, वह आज पूरी तरह साफ दिखाई दी। हम सभी ने इसे देखा।आज मामले पर कोई चर्चा नहीं हुई। मामले के गुण-दोष पर कोई बहस नहीं हुई।’’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘यह अवैध गिरफ्तारी है। यह राज्य की साजिश है।दिल्ली पुलिस की साजिश है कि वे सौरव और आशुतोष को जेल में रखना चाहते हैं।’’ सिंह ने कहा कि वकील कई घंटे तक इंतजार करते रहे। उन्होंने सवाल किया कि उच्च अदालतों के निर्देश के मुताबिक निचली अदालत का रुख करने के बावजूद बार-बार देरी क्यों की जा रही है। दास और रांका को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।वे जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के एक दिन बाद वहां दाखिल हुए थे। कॉजपा नेताओं का कहना था कि उन्होंने वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया था और नारे लगाए थे। यह संगठन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है।कॉजपा ने शनिवार को कहा था कि उसने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से सलाह ली है और चेतावनी दी थी कि यदि रविवार तक दास और रांका को रिहा नहीं किया गया, तो वह कानूनी कार्रवाई करेगी।
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