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    कानपुर DM ने 3 बाबू को बनाया चपरासी:एक मिनट में 25 शब्द नहीं टाइप कर पाए, मृतक आश्रित कोटे से पाई थी नौकरी

    4 hours ago

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    कानपुर में तीन बाबू का डिमोशन करके उन्हें चपरासी बना दिया गया है। इन बाबुओं ने एक मिनट में 25 शब्द टाइप नहीं कर पाए। दरअसल, तीनों को 2023 में मृतक आश्रित कोटे से नौकरी मिली थी। नियमों के मुताबिक जॉइनिंग के एक साल के अंदर टाइपिंग टेस्ट पास करना अनिवार्य होता है, लेकिन ये लोग दो साल में हुए 2 टाइपिंग टेस्ट भी पास नहीं कर पाए। इसके बाद डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने कार्रवाई की है। चपरासी बनाए गए बाबुओं में प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव हैं। इन लोगों की वेतन वृद्धि भी रोक दी गई है। पहली बार नहीं पास कर पाए, तब सुधार का मौका मिला था कलेक्ट्रेट में तैनात प्रेमनाथ यादव, नेहा श्रीवास्तव और अमित कुमार यादव को साल 2023 में मृतक आश्रित के पद पर नौकरी मिली थी। इन्होंने एक साल के बाद साल 2024 में टाइपिंग टेस्ट दिया था।लेकिन, ये एक मिनट में 25 शब्द नहीं लिख पाए थे। उस समय प्रशासन ने इन लोगों को सुधार का मौका देते हुए सैलरी इंक्रीमेंट रोक दिया था। इसके बाद 2025 में दोबारा परीक्षा आयोजित की गई, लेकिन इस बार भी तीनों कर्मचारी एक मिनट में 25 शब्द टाइप नहीं कर पाए। इसके बाद डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने इन बाबुओं का डिमोशन कर दिया है। अब ये बाबू चपरासी का काम देखेंगे। डीएम बोले- कलेक्ट्रेट जैसे दफ्तरों में टाइपिंग जरूरी लगातार दूसरी बार फेल होने के बाद डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने मामले की समीक्षा कर कार्रवाई के निर्देश दिए। आदेश के तहत तीनों कर्मचारियों को जूनियर क्लर्क के पद से हटाकर चतुर्थ श्रेणी में भेज दिया गया। आदेश लागू होते ही उनका पद घटा दिया गया। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा- कलेक्ट्रेट जैसे दफ्तरों में टाइपिंग काम बेहद महत्वपूर्ण होता है। फाइलों की नोटिंग और दस्तावेज तैयार करने के लिए यह बुनियादी कौशल जरूरी है। ऐसे में मानक पूरा न करने पर कार्रवाई करना जरूरी था। कर्मचारियों के बीच चर्चा बनी खबर इस कार्रवाई के बाद कलेक्ट्रेट समेत अन्य विभागों में हलचल तेज हो गई है। कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि अब कामकाज की गुणवत्ता और कार्यकुशलता को लेकर सख्ती बढ़ना तय है। जहां एक वर्ग इस फैसले को जरूरी कदम मानते हुए इसे प्रशासनिक सुधार और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में अहम बता रहा है, वहीं कुछ कर्मचारियों का मानना है कि कार्रवाई से पहले उन्हें और समय या बेहतर ट्रेनिंग दी जानी चाहिए थी, ताकि वे निर्धारित मानकों को पूरा कर सकें। ---------------------- ये खबर भी पढ़िए- कानपुर में 20 साइबर ठगों को दौड़ाकर पकड़ा: एक और 'मिनी जामताड़ा' का भंड़ाफोड़; 17 गाड़ियों से 70 पुलिसवाले पहुंचे यूपी में एक और 'मिनी जामताड़ा' का भंड़ाफोड़ हुआ है। कानपुर पुलिस 17 गाड़ियों के साथ फिल्मी स्टाइल में पहुंची। ड्रोन से रेकी करते हुए पूरे इलाके को चारो ओर से घेर लिया। फिर खेतों में बनीं झोपड़ियों में से 20 साइबर ठगों को अरेस्ट किया। इन झोपड़ियों से ही ये लोग ठगी का धंधा चलाते थे। पुलिस के अनुसार, साइबर ठग देशभर में लोगों को कभी पुलिस अधिकारी बनकर तो कभी आवास योजना या बैंक लोन के नाम पर झांसा देते थे। पढ़ें पूरी खबर…
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