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    कानपुर मेट्रो का 'हेल्थ चेकअप':स्टेशनों पर फाइव स्टार होटल जैसी सफाई, गुटखा-पान पर नो एंट्री; दिव्यांगों के लिए अलग टॉयलेट्स

    2 hours ago

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    कानपुर मेट्रो अब केवल रफ्तार ही नहीं, बल्कि सेहत और स्वच्छता के मामले में भी नए रिकॉर्ड बना रही है। 7 अप्रैल को मनाए जाने वाले 'विश्व स्वास्थ्य दिवस' से पहले मेट्रो प्रशासन ने स्टेशनों की सफाई व्यवस्था की जो तस्वीर पेश की है, वह शहर के अन्य सार्वजनिक स्थानों के लिए नजीर है। मोतीझील से लेकर कानपुर सेंट्रल तक के सभी 14 स्टेशनों पर स्वच्छता के ऐसे कड़े मानक तय किए गए हैं कि यात्रियों को विश्वस्तरीय अनुभव मिल रहा है। गुटखा-तंबाकू पर 'सर्जिकल स्ट्राइक', गंदगी की जगह नहीं कानपुर की पहचान बन चुके पान-मसाले और तंबाकू को मेट्रो परिसर से पूरी तरह बाहर रखा गया है। मेट्रो के अंदर गुटखा, पान, बीड़ी और सिगरेट का उपयोग सख्त वर्जित है। सुरक्षा जांच के दौरान ही यात्रियों से ऐसे उत्पाद जमा करा लिए जाते हैं। इस सख्ती का असर यह है कि न तो स्टेशनों की दीवारों पर दाग दिखते हैं और न ही फर्श पर कूड़ा। यह नीति न केवल गंदगी रोक रही है, बल्कि संक्रामक बीमारियों के प्रसार को रोकने में भी मददगार साबित हो रही है। दिव्यांगों का खास ख्याल,व्हीलचेयर फ्रेंडली शौचालय अक्सर सार्वजनिक परिवहन में दिव्यांगों की सुविधाओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन कानपुर मेट्रो ने यहां बाजी मारी है। सभी स्टेशनों पर दिव्यांग यात्रियों के लिए अलग से आधुनिक शौचालय बनाए गए हैं। इनमें व्हीलचेयर की आसान आवाजाही के लिए रैंप और सहारा देने के लिए मजबूत हैंडरेल्स लगाई गई हैं। फिलहाल 14 स्टेशनों पर यह सुविधा चालू है, जबकि सेंट्रल से नौबस्ता के बीच बन रहे 7 नए स्टेशनों पर भी इसी तरह के हाई-टेक शौचालय तैयार किए जा रहे हैं। सफाई कर्मियों का सम्मान, चौबीसों घंटे निगरानी मेट्रो स्टेशनों के फर्श, रेलिंग और कोच की चमक बनाए रखने के लिए हाउसकीपिंग स्टाफ चौबीसों घंटे तैनात रहता है। खास बात यह है कि सफाई के काम को बोझ न मानकर उत्साह से किया जाए, इसके लिए यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक हर महीने सबसे अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित करते हैं। अधिकारियों की टीमें नियमित रूप से स्टेशनों का औचक निरीक्षण करती हैं ताकि सफाई के मानकों में रत्ती भर भी कमी न आए। निर्माण से संचालन तक स्वच्छता का संकल्प यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार का कहना है कि मेट्रो ने निर्माण के पहले दिन से ही स्वच्छता को अपनी प्राथमिकता में रखा है। उनका मानना है कि स्वच्छता ही स्वस्थ जीवनशैली की नींव है। कानपुर मेट्रो की इस पहल को शहरवासियों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। यात्री भी अब मेट्रो को अपना मानकर उसे गंदा करने से बचते हैं, जिससे कानपुर की छवि एक स्वच्छ और स्वस्थ शहर के रूप में उभर रही है।
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