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    कुशीनगर में पट्टे की जमीन पर विवाद:स्टे के बावजूद कार्रवाई के आरोप, SDM पर सवाल; देर रात पहुंचीं एसडीएम, न्याय का भरोसा

    2 hours ago

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    कुशीनगर के तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र स्थित बरवा राजापाकड़ के सीताराम चौराहे पर अनुसूचित जाति के पट्टे की जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई, न्यायिक प्रक्रिया और स्थानीय आरोपों के बीच उलझ गया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि यह जमीन उनके नाम पट्टे पर आवंटित की गई थी। हालांकि, एक अधिवक्ता ने मुकदमों की पैरवी के दौरान इसे अपने नाम खतौनी में दर्ज करा लिया। वर्ष 2003 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस जमीन को वैध पट्टा मानते हुए संबंधित चकों को निरस्त करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर इस आदेश का पूरी तरह पालन नहीं हुआ और विवाद बना रहा। पीड़ित पक्ष का यह भी आरोप है कि इस स्थिति का लाभ उठाकर धारा 24 के तहत बिना उन्हें पक्षकार बनाए एक आदेश पारित करा लिया गया। जब पीड़ित पक्ष को इसकी जानकारी हुई, तो उन्होंने एसडीएम तमकुहीराज न्यायालय में पक्षकार बनने के लिए आवेदन किया, जिसे निरस्त कर दिया गया। इस घटना से प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में एक कथित वीडियो का भी जिक्र है, जिसमें अधिवक्ता द्वारा नाम खारिज कराने की बात स्वीकार करने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह विवाद फिलहाल कई न्यायिक मंचों पर लंबित है। प्रयागराज स्थित बोर्ड ऑफ रिवेन्यू, डीडीसी न्यायालय पडरौना और इलाहाबाद उच्च न्यायालय में इस पर सुनवाई जारी है। डीडीसी न्यायालय से एक स्थगन आदेश (स्टे) भी प्रभावी बताया जा रहा है। इसी बीच, प्रशासनिक कार्रवाई से नाराज पीड़ित परिवार शनिवार देर रात जिलाधिकारी (DM) आवास पहुंच गया और धरने पर बैठ गया। परिजनों का आरोप है कि शोक की स्थिति में होने के बावजूद उन्हें समय नहीं दिया गया और धारा 151 के तहत कार्रवाई करते हुए परिवार के एक सदस्य को जेल भेज दिया गया। धरने की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। एसडीएम तमकुहीराज आकांक्षा मिश्रा रात में ही जिला मुख्यालय पहुंचीं और पीड़ित परिजनों से बातचीत की। उन्होंने निष्पक्ष जांच और न्याय का भरोसा दिलाया। बताया जा रहा है कि उन्होंने हिरासत में लिए गए परिवार के सदस्य की जमानत प्रक्रिया में भी सहयोग किया और उसे अपने साथ वापस लेकर लौटीं। इस दौरान डीएम आवास पर मौजूद अन्य अधिकारियों ने भी परिजनों को आश्वस्त किया कि मामले में किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। फिलहाल, यह मामला कई सवाल खड़े कर रहा है।
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