Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    कृषि विश्वविद्यालय में नाशपाती की खेती पर शोध:पहाड़ों का फल अब पूर्वांचल के मैदानों में उगेगा, 6 उन्नत प्रजातियां पर चल रहा परीक्षण

    3 hours ago

    2

    0

    आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या, पूर्वांचल के मैदानी इलाकों में नाशपाती की खेती पर एक महत्वपूर्ण शोध कर रहा है। यह पहल उन किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है, जिनके लिए अब तक नाशपाती केवल पहाड़ी और ठंडे क्षेत्रों की फसल मानी जाती थी। विश्वविद्यालय के उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ.निरंजन सिंह ने बताया कि विभागाध्यक्ष डॉ.भानु प्रताप के नेतृत्व में इस परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। इसका उद्देश्य बदलती कृषि तकनीक और वैज्ञानिक प्रयासों के माध्यम से नाशपाती को मैदानी क्षेत्रों में सफलतापूर्वक उगाना है। इस शोध के लिए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना से नाशपाती की छह प्रमुख प्रजातियां लाई गई हैं। इनमें पथरनाख, पंजाब नेक्टर, पंजाब गोल्ड, पंजाब शांफ्ट,मीजी सिक्की और बब्बू घोष शामिल हैं। इन किस्मों का परीक्षण विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर किया जा रहा है, ताकि पूर्वांचल की जलवायु के लिए सबसे उपयुक्त किस्म का चयन किया जा सके। यह शोध वर्ष 2023 में शुरू हुआ था और अब तक लगभग 50पौधे लगाए जा चुके हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन पौधों में 2026 तक फल आने शुरू हो जाएंगे।अगले 2-3 वर्षों में, सबसे बेहतर किस्म का चयन कर किसानों को उपलब्ध कराया जा सकेगा। डॉ. निरंजन सिंह ने नाशपाती के पोषण संबंधी महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह फल शरीर को अंदर से स्वस्थ रखने में सहायक है और इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, पोटेशियम, आयरन, कैल्शियम जैसे प्रमुख पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, यह फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट का भी अच्छा स्रोत है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, नाशपाती का नियमित सेवन हृदय रोगों, मधुमेह, मोटापे और पाचन संबंधी समस्याओं के जोखिम को कम कर सकता है। यह सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है। फल वैज्ञानिक डॉ. निरंजन सिंह ने कहा कि भविष्य में किसानों को न केवल उन्नत पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, बल्कि उन्हें नाशपाती की खेती से जुड़ी तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे पूर्वांचल के किसान बागवानी की ओर आकर्षित होंगे और पारंपरिक खेती के साथ-साथ नई फसलों से बेहतर आय अर्जित कर सकेंगे।
    Click here to Read more
    Prev Article
    कन्नौज में अज्ञात वाहन की टक्कर से दो की मौत:छिबरामऊ से शादी समारोह से लौट रहे थे स्कार्पियो सवार, 4 घायल
    Next Article
    धर्मेंद्र को याद कर भावुक हुईं हेमा मालिनी:कहा– मुझे उनकी याद आती है, उनके बिना जिंदगी कैसे जीऊंगी नहीं जानती

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment