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    केवीआईसी ने गाजियाबाद में 500 लोगों को मशीनें बांटी:आत्मनिर्भर भारत और ग्रामोद्योग को मिली नई मजबूती

    2 hours ago

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    खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्रालय के तहत गाजियाबाद में एक कार्यक्रम आयोजित किया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में हुए इस आयोजन का उद्देश्य 'स्वदेशी' और 'ग्राम स्वराज' के विचारों को 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत@2047' के लक्ष्यों से जोड़ना था। कार्यक्रम के दौरान, लगभग 500 लाभार्थियों को विभिन्न ग्रामोद्योग कार्यों के लिए कुल 896 मशीनें और टूलकिट वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त, 120 कारीगरों को वर्कशेड प्रदान किए गए और 11 खादी संस्थाओं को अपने भंडार सुधारने हेतु सहायता राशि मिली। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी दिए गए, जिससे उनके कौशल और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज कुमार ने इस अवसर पर कहा कि 'विकसित भारत' का सपना महात्मा गांधी के 'स्वदेशी' और 'ग्राम स्वराज' के विचारों का आधुनिक स्वरूप है। उन्होंने जोर देकर कहा कि खादी और ग्रामोद्योग अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गए हैं। वितरित की गई मशीनों और टूलकिट में हनी मिशन के तहत 600 मधुमक्खी बॉक्स, 200 इलेक्ट्रिक कुम्हार चाक, फुटवियर और प्लंबर टूलकिट शामिल थे। इसके अलावा, दोना-पत्तल बनाने वाली मशीनें, तेल निकालने की मशीनें और मसाला व फूड प्रोसेसिंग यूनिट भी प्रदान की गईं। इन उपकरणों से कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जुड़ने और बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त करने में मदद मिलेगी। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो, मेरठ क्षेत्र में 1920 व्यक्तियों को कुल 5132 मशीनें वितरित की जा चुकी हैं। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत 2347 नई इकाइयां स्थापित की गईं, जिनमें 100 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई और 28 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला। खादी क्षेत्र में भी 232 संस्थाओं से जुड़े 58 हजार से अधिक कारीगर कार्यरत हैं। पिछले पांच वर्षों में, इस क्षेत्र में 1771 करोड़ रुपये से अधिक का उत्पादन और 3135 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री दर्ज की गई है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि खादी देश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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