Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    लोकमंगल के लिए था देवर्षि नारद का संवाद: प्रो. संजय द्विवेदी

    3 hours from now

    1

    0

    कानपुर। भारतीय जन संचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक प्रो.संजय द्विवेदी का कहना है कि नारद जी की लोक छवि जैसी बनी और बनाई गई है, वे उससे सर्वथा अलग हैं। उनकी लोक छवि झगड़ा लगाने या कलह पैदा करने वाले व्यक्ति की है, जबकि उनके प्रत्येक संवाद में लोकमंगल की भावना ही है। ईश्वर के दूत के रूप में उनकी आवाजाही और कार्य हमें बताते हैं कि वे निरर्थक संवाद और प्रवास नहीं करते। उन्होंने कहा कि विश्वसनीयता, सतत प्रवास और उद्देश्य की पवित्रता तीन ऐसे गुण हैं जो किसी भी पत्रकार के लिए अनिवार्य हैं।प्रो. द्विवेदी यहां छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा देवर्षि नारद जी की जयंती के अवसर पर आयोजित विशेष व्याख्यान को आनलाइन संबोधित कर रहे थे। व्याख्यान का विषय था- ‘राष्ट्रवादी पत्रकारिता में स्व का बोध’, जिसमें पत्रकारिता के मूल्यों, जिम्मेदारियों और राष्ट्र निर्माण में मीडिया की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.विनय कुमार पाठक ने की। इस मौके पर प्रो. द्विवेदी ने कहा नारद जी देवताओं, राक्षसों और समाज के सब वर्गों से संवाद रखते हैं। सब उन पर भरोसा करते हैं। वे सबके सलाहकार, मित्र, आचार्य और मार्गदर्शक हैं। वे कालातीत हैं। सभी युगों और सभी लोकों में समान भाव से भ्रमण करने वाले। ईश्वर के विषय में जब वे हमें बताते हैं, तो उनका दार्शनिक व्यक्तित्व भी सामने आता है। प्रो.द्विवेदी ने कहा कि नारद जी महान ऋषि परंपरा से आते हैं, किंतु कोई आश्रम नहीं बनाते, कोई मठ नहीं बनाते। वे सतत प्रवास पर रहते हैं ,उनकी हर यात्रा उदेश्यपरक है। उनका उद्देश्य तो निरंतर संपर्क और संवाद ही है, किंतु वे जो कुछ कहते और करते हैं, उससे लोकमंगल संभव होता है। उनसे सतत संवाद,सतत प्रवास, सतत संपर्क, समाज हित के लिए संचार करने की सीख ग्रहण की जा सकती है। उनका कहना था कि सुंदर दुनिया बनाने के लिए सार्वजनिक संवाद में शुचिता और मूल्यबोध की चेतना आवश्यक है। इससे ही हमारा संवाद लोकहित केंद्रित बनेगा। कार्यक्रम के अध्यक्ष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि देवर्षि नारद को भारतीय परंपरा में प्रथम पत्रकार माना जाता है, जिन्होंने सदैव सत्य और लोकहित को प्राथमिकता दी। ऐसे में उनके आदर्श आज भी पत्रकारिता के छात्रों और पेशेवरों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के मूल्यों को बचाना ही आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती है । अपनी संस्कृति और कर्तव्यों का शाश्वत परिचय ही स्व का बोध है, 'स्व' का बोध राष्ट्र के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है ।विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहा कि आज का दिन केवल एक पौराणिक जयंती नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय पत्रकारिता के मूल्यों और आदर्शों पर आत्ममंथन करने का दिन है। महर्षि नारद जी का जीवन हमें सिखाता है कि सूचना की गति से अधिक उसकी सत्यता और उद्देश्य महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. हरिओम कुमार ने कहा कि वैश्विक पटल पर संवाद करने के लिए नारद संचार मॉडल को स्थापित करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. ओम शंकर गुप्ता ने कहा कि देवर्षि नारद जी का व्यक्तित्व और उनकी कार्यशैली मीडिया जगत के लिए एक मार्गदर्शक स्तंभ की तरह है। मीडिया छात्रों को नारद संवाद का अध्ययन करना चाहिए।अंत में धन्यवाद ज्ञापन विभाग के सह आचार्य डॉ.योगेंद्र कुमार पांडेय ने किया । इस कार्यक्रम में विभाग के सहायक आचार्य डॉ.जितेंद्र डबराल, प्रेम किशोर शुक्ला, सागर कनौजिया समेत कई छात्र -छात्राएं ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Assam Election Result की सटीक भविष्यवाणी से सब हैरान, CM Himanta का महीने पुराना Viral नोट हुआ सच
    Next Article
    मगनभाई पटेल ने अपने पोते शाम जतिनभाई पटेल का जन्मदिन HIV ग्रस्त महिलाओं को राशन किट और जीवनजरुरी चीज वस्तुएं देकर मनाया

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment