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    लखनऊ में 40 साल पुरानी कॉलोनियों का बदलेगा चेहरा:60% लोगों की सहमति जरूरी, सर्वे के लिए बनाई गई कमेटी

    5 hours ago

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    लखनऊ में करीब चार दशक पुरानी आवासीय कॉलोनियों के कायाकल्प की तैयारी शुरू हो गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) अब इन जर्जर हो चुकी कॉलोनियों को तोड़कर उनकी जगह आधुनिक हाईराइज बिल्डिंग बनाने की योजना पर काम कर रहा है। हालांकि, इसके लिए संबंधित कॉलोनी के 60% मकान मालिकों की लिखित सहमति अनिवार्य होगी। इसके लिए एक कमेटी भी बनाई गई है। एलडीए के वीसी प्रथमेश कुमार के मुताबिक, उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026 के तहत यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। बिना सहमति किसी भी मकान को नहीं तोड़ा जाएगा। सर्वे के लिए कमेटी गठित एलडीए ने पुरानी कॉलोनियों की स्थिति का आकलन करने के लिए अपर सचिव सीपी त्रिपाठी की अगुवाई में एक कमेटी बनाई है। यह टीम मौके पर जाकर भवनों की स्थिति, निवासियों की संख्या और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी। सर्वे के दौरान ही सहमति पत्र भी लिए जाएंगे। किरायेदारों को देना होगा साक्ष्य अगर कोई किरायेदार वर्षों से इन भवनों में रह रहा है, तो उसे योजना का लाभ पाने के लिए प्रमाण देना होगा। इसके लिए किरायानामा, एलडीए की रसीद, हाउस टैक्स या बिजली बिल जैसे दस्तावेज जरूरी होंगे। नए फ्लैट मिलेंगे, किराया भी मिलेगा पुरानी कॉलोनी तोड़ने के बाद बनने वाली नई इमारत में पात्र लोगों को फ्लैट दिए जाएंगे। निर्माण अवधि के दौरान किरायेदारों को 5 हजार से 10 हजार रुपए तक मासिक किराया भी एलडीए देगा, ताकि वे वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें। इन कॉलोनियों से होगी शुरुआत पहले चरण में वजीर हसन रोड, पेपर मिल कॉलोनी और कानपुर रोड योजना के सेक्टर-जी स्थित मल्टीस्टोरी भवनों को री-डेवलपमेंट के लिए चिन्हित किया गया है। इन पुरानी कॉलोनियों में कई जगह पार्क और पार्किंग पर अवैध कब्जे हो चुके हैं। कई फ्लैटों में मूल आवंटियों की जगह अन्य लोग रह रहे हैं। ऐसे में री-डेवलपमेंट से न सिर्फ अव्यवस्था दूर होगी, बल्कि प्राइम लोकेशन पर बेहतर सुविधाओं वाले नए आवास भी विकसित किए जा सकेंगे।
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