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    लखनऊ में जूनियर एडेड शिक्षक अभ्यर्थियों का प्रदर्शन:पद घटाने से भड़के अभ्यर्थी, बोले- मानसिक संतुलन बिगड़ गया है , नौकरी नहीं मिली तो जान दे दें

    10 hours ago

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    लखनऊ में बुधवार को जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन । नियुक्ति पत्र न मिलने से नाराज अभ्यर्थियों ने निशातगंज स्थित SCERT कार्यालय पर हंगामा करते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। नियुक्ति की मांग को लेकर प्रदेश भर से अभ्यर्थी जमा है।प्रदर्शनकारियों ने नारा लगाया ‘न्याय नहीं तो शोर होगा, हर सड़क पर जोर होगा’ हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर आए अभ्यर्थियों ने नौकरी न मिलने से सरकार पर नाराजगी जताई। अभ्यर्थियों ने बताया- 1 जनवरी 2021 को 1894 पदों पर भर्ती निकली जिसे बाद संशोधित 1262 कर दिया गया। संबंधित भर्ती की 17 अक्टूबर 2021 को प्रदेश भर में परीक्षा कराई गई। इस परीक्षा में लगभग 3 लाख छात्र शामिल हुए थे। इसमें 42 हजार से अधिक अभ्यर्थी सफल हुए। 6 सितंबर 2022 को परिणाम जारी किया गया था , उसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन हुआ सब कुछ होने बाद भी हमें नौकरी नहीं मिली। रायबरेली से आए जितेंद्र पाल ने कहा कि पिछले 5 सालों से नौकरी के लिए भटक रहे हैं। परीक्षा पास किया डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी हो गया , परिवार वालों को ये खुशखबरी भी सुना दिया और अब नियुक्ति में पेंच फंस गया। नवंबर 2025 में स्कूल लिस्ट के साथ हमे शॉर्ट लिस्ट कर दिया गया मगर फिर भी नौकरी नहीं मिली। 1262 सहायक अध्यापक पदों , और 253 प्रधानाध्यापक पदों पर प्रक्रिया पूरी कर ली गईं। उसके बाद हाईकोर्ट का एक जजमेंट आता है और भर्ती रुक गई। जिस कारण से हाईकोर्ट ने रोक लगाई है इसका मामला 2013 से सरकार के संज्ञान में था। तो सरकार ने 2021 में इन विवादित स्कूलों को भर्ती प्रक्रिया में क्यों शामिल किया इस त्रुटि को पहले ही क्यों नहीं दूर किया गया। विभाग और सरकार की लापरवाही का खामियाजा हम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। अब 1262 में 628 बच्चों को बाहर किया जा रहा है मात्र 634 पदों पर नियुक्ति की बात हो रही है। नियुक्ति निकालने के बाद परीक्षा होने के बाद सब कुछ प्रक्रिया हो गई तो अब नियम बदला जा रहा है यह सरासर हम अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है। हम लोग घर परिवार से भी बिल्कुल बेबस हो चुके हैं। हमारे साथ की जो भर्ती है उनकी रातों के नींद हराम हो चुकी है। हम लोग टॉर्चर हो चुके हैं मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है। समाज में हम लोग जवाब नहीं दे पा रहे हैं मुंह नहीं दिखा पा रहे हैं। हमारी मनोदशा कोई समझने को तैयार नहीं है।
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