Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    ‘लड़कों से बात करती है, गलत जा रही है’:घरवालों ने खेल छुड़वाया, पतंजलि स्टोर पर नौकरी की; जानें एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट किरण की कहानी

    8 hours ago

    1

    0

    हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली एथलीट किरण पहल मंगलवार को एशियन गेम्स के रिले इवेंट में गोल्ड और टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीतकर देश-दुनिया में छा गईं। गन्नौर एरिया के गांव गुमड़ की गलियों से शुरू हुआ किरण का यह सफर कभी आसान नहीं रहा। तीसरी कक्षा में जिम्नास्टिक करती लड़कियों को देखकर किरण खेलों की ओर आकर्षित हुईं। स्कूल का मैदान दूर था, इसलिए पिता ने 300 रुपए में कबाड़ी से पुरानी साइकिल दिला दी, ताकि प्रैक्टिस न छूटे। इसी बीच गांव के एक व्यक्ति ने पिता और चाचा से झूठी शिकायत कर दी कि तुम्हारी लड़की लड़कों से बात करती है और गलत रास्ते पर जा रही है। इसके बाद परिवार ने उनका खेल बंद करा दिया। किरण ने किसी तरह परिवार को मनाया और पांच महीने बाद दोबारा मैदान पर लौटीं। प्रैक्टिस के लिए एथलीट वाले जूते चाहिए थे। बाजार में पता चला कि उनकी कीमत 11 हजार रुपए है। ऐसे में दादी सहारा बनीं। उन्होंने अपनी बुढ़ापा पेंशन के रुपए पोती को दे दिए। गांव से निकलकर रोहतक स्टेडियम पहुंचीं तो डाइट और किराए की समस्या खड़ी हो गई। इसका समाधान उन्होंने पतंजलि स्टोर पर काम करके निकाला। वहां से मिलने वाले 4 हजार रुपए से खेल, रहने और खाने का खर्च पूरा किया। साल 2022 में किरण के पिता ओमप्रकाश बीमार हुए तो वह प्रैक्टिस छोड़कर उनके पास पहुंचीं। पिता ने उनसे पूछा कि क्या वह ओलिंपिक में जाकर मेडल नहीं ला सकतीं। किरण ने वादा किया कि वह जरूर मेडल लेकर आएंगी। मगर इसी साल पिता का निधन हो गया। पिता से किया यही वादा किरण के लिए प्रेरणा बन गया। हरियाणवी छोरी के गोल्डन गर्ल बनने की पूरी कहानी… खेल के मैदान में आईं हर मुश्किलों से लड़कर पाया मुकाम… बहन बोलीं- चने के लड्डू पसंद, ओलिंपिक में भी साथ ले गई थी किरण की बहन तमन्ना के अनुसार, वह बहुत आध्यात्मिक है और खेल को लेकर पूरी तरह समर्पित रहती है। वह सामान्य तौर पर सुबह-शाम तीन से चार घंटे प्रैक्टिस करती है। बड़ी प्रतियोगिता आने पर वह दूसरी चीजों को पीछे छोड़कर सिर्फ ट्रेनिंग पर ध्यान देती है। किरण को चने के लड्डू बेहद पसंद हैं। वह ओलिंपिक के दौरान भी अपने साथ घर के बने चने के लड्डू लेकर गई थी। अब घर लौटने पर मां अपनी बेटी के लिए फिर से चने के लड्डू बनाएंगी। किरण 2023 तक पूरी तरह शाकाहारी रही। पेरिस ओलिंपिक के दौरान पोलैंड में रहने के समय खाने को लेकर उसे परेशानी हुई। वहां उपलब्ध भोजन में नॉनवेज अधिक होने के कारण डाइट संभालना मुश्किल हुआ। इसके बाद उसने नॉनवेज खाना भी शुरू कर दिया। 1 अक्टूबर को गांव पहुंचेगी मेडल विजेता बेटी एशियाई खेलों में गोल्ड और सिल्वर जीतने के बाद अब गुमड़ गांव में किरण के स्वागत की तैयारी है। वह 1 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचेगी, जिसके बाद उसे गांव लाकर भव्य स्वागत किया जाएगा। ----------------------------------- ये खबर भी पढ़ें…. जींद की नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स में जीता गोल्ड:उधार की गन से शुरू की थी प्रैक्टिस; राशन लेने गई मां को फोन पर मिली खुशखबरी जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स में जींद के गांव संगतपुरा की 26 वर्षीय शूटर नीरू ढांडा ने महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वह एशियन गेम्स में महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी हैं। (पूरी खबर पढ़ें)
    Click here to Read more
    Prev Article
    न्यूजीलैंड टेस्ट से पहले सीनियर खिलाड़ियों को रणजी खेलना होगा:गिल, राहुल और बुमराह उतर सकते हैं घरेलू रेड-बॉल मैच में
    Next Article
    रेप के आरोपी अभिषेक पोरेल की बंगाल टीम में वापसी:असम के खिलाफ प्रैक्टिस मैच खेलेंगे; 11 दिन पहले जमानत मिली थी

    Related स्पोर्ट्स Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment