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    मोहन भागवत बोले- RSS भाजपा का रिमोट कंट्रोल नहीं है:अमेरिकी टैरिफ पर लखनऊ में कहा- वे शक्ति के बल पर झुकाना चाहते

    14 hours ago

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    राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, संघ भाजपा का रिमोट कंट्रोल नहीं है। संघ के स्वयंसेवक भाजपा में जाते हैं। वहां आगे भी बढ़े हैं। लेकिन यह कहना गलत है कि संघ बीजेपी को चलाता है। बीजेपी का विरोध करने वाले लोग ही संघ का विरोध करते हैं। मोहन भागवत ने अमेरिकी टैरिफ पर भी बात की। उन्होंने कहा, यह उनकी पुरानी पद्धति है। वे आर्म्स और आर्थिक शक्ति के बल पर झुकाना चाहते है। लेकिन भारत इतना मजबूत है कि उनके आगे झुका नहीं है। हमारी जनता तैयार है। इसलिए इसका भारत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। संघ प्रमुख ने मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने और UGC गाइडलाइंस से जुड़े सवालों का जवाब दिया। कहा, सवाल यह है कि मंदिरों की देखभाल कौन करेगा, वहां नियमित पूजा पाठ हो, इसकी चिंता कौन करेगा। सिख समाज अपने गुरुद्वारे का संचालन बहुत अच्छा करता है। देश के धर्माचार्यों को इस पर मंथन करना चाहिए और समाज को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। वहीं, UGC पर मोहन भागवत ने बुधवार को बीच का रास्ता निकाला। कहा, यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। कोर्ट का जो भी आदेश आएगा, उस पर जो स्थिति बनेगी तब देखा जाएगा। एक दिन पहले भागवत ने कहा था, कानून सभी को मानना चाहिए। यदि कानून गलत है तो बदलने का उपाय भी है। जातियों के झगड़े का कारण नहीं बनना चाहिए। संघ की सफलता और असफलता के सवाल पर मोहन भागवत ने कहा, संघ ने अब तक बहुत काम किया है, लेकिन उसके पूर्ण सफल नहीं होने का कारण हिंदू समाज है। हिंदू समाज एकजुट नहीं है। लोग आते हैं। कुछ साल काम करते हैं, फिर चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि संघ ने 100 वर्ष में बहुत काम किए हैं। लखनऊ यूनिविर्सटी में लगे 'भागवत गो बैक' के नारे, स्टूडेंट्स को पुलिस टांगकर ले गई लखनऊ विश्वविद्यालय में बुधवार सुबह RSS प्रमुख मोहन भागवत के पहुंचते ही हंगामा शुरू हो गया। NSUI, समाजवादी छात्र सभा और भीम आर्मी से जुड़े छात्र ‘गो बैक मोहन भागवत’ के नारे लगाने लगे। पुलिस ने जब छात्रों को रोकने की कोशिश की, तो नोकझोंक और खींचतान शुरू हो गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को ठूंस-ठूंसकर जीप और बसों में भरा। कई छात्र लेट गए, तो उन्हें टांगकर ले जाया गया। सभी छात्रों को इको गार्डन भेजा गया। इसके बाद मोहन भागवत का कार्यक्रम हुआ। भागवत ने कहा-धूल का एक कण भी धर्म से अलग नहीं हो सकता। NSUI कार्यकर्ता शुभम यादव ने कहा- संघ से जुड़े लोगों को विश्वविद्यालय में कार्यक्रम करने की अनुमति दी जा रही है, जबकि विपक्षी छात्र संगठनों को हॉल तक नहीं मिलते। यूजीसी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दिया है। इसके बावजूद RSS प्रमुख की ओर से कोई बयान नहीं आया है। भागवत दो दिवसीय लखनऊ प्रवास पर हैं। आज लखनऊ यूनिवर्सिटी में संगोष्ठी कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में कार्यक्रम में भाग लेंगे। मंगलवार को निराला नगर में भागवत सरस्वती शिशु मंदिर आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में शामिल हुए थे। उन्होंने सामाजिक सद्भाव से जुड़े विषयों पर विभिन्न वर्गों के लोगों के सवालों के जवाब दिए। UGC गाइडलाइंस पर भागवत ने कहा था- कानून सभी को मानना चाहिए। अगर कानून गलत है, तो उसे बदलने का उपाय भी है। कानून को जातियों के बीच झगड़े का कारण नहीं बनना चाहिए। स्टूडेंट्स के प्रदर्शन की PHOTOS- प्रदर्शनकारी छात्रों ने क्या कहा… प्रदर्शन से पहले ही अलर्ट मोड़ में आई पुलिस छात्रों के प्रदर्शन से पहले ही पुलिस अलर्ट मोड में आ गई थी। प्रदर्शन में शामिल होने की आशंका पर पुलिस सुबह 5 बजे ही समाजवादी छात्र सभा के सदस्य तौकील गाजी के हॉस्टल के रूम पर पहुंच गई। उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया। समाजवादी छात्र सभा के कई अन्य सदस्यों को हिरासत में ले लिया। उन्हें हसनगंज थाना ले गई। आज संघ प्रमुख ने क्या कहा, पढ़िए उनकी बड़ी बातें… लखनऊ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा- शिक्षा और स्वास्थ्य मूलभूत आवश्यकता है, इन्हें व्यवसाय नहीं बनाया जा सकता। दोनों क्षेत्र समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए सुलभ होने चाहिए। पश्चिमी देशों ने भारत की पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था को हटाकर अपनी प्रणाली थोपी, ताकि उन्हें 'काले अंग्रेज' तैयार करने में सुविधा हो। अंग्रेजों ने जो बिगाड़ा, उसे सुधारने की आवश्यकता है। शोधार्थियों से आह्वान कहा- भारत को समझने के लिए अपने ज्ञान शोध को प्रामाणिकता के साथ आगे बढ़ाएं। अज्ञानता के आधार पर भारत को नहीं समझा जा सकता। RSS प्रमुख ने लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में शोधार्थी संवाद कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित किया। 1. संघ का लक्ष्य- परम वैभव सम्पन्न भारत: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उद्देश्य भारत को परम वैभव सम्पन्न बनाना है। ‘मैं और मेरा परिवार’ तक सीमित सोच से ऊपर उठकर पूरे राष्ट्र के लिए सोचना होगा। संघ समाज की एकता और गुणवत्ता की चिंता करता है। संघ को समझना है तो उसके कार्य को अनुभव करना होगा। केवल पढ़कर उसे नहीं समझा जा सकता। 2. शोध की भूमिका पर दिया जोर: भारत की दिशा और दशा बदलने में शोध की महत्वपूर्ण भूमिका है। सत्यपरक और प्रामाणिक शोध समाज के सामने आना चाहिए। शोधार्थी उत्कृष्टता, निष्ठा और निःस्वार्थ भाव से राष्ट्रहित में कार्य करें। संघ को लेकर कई प्रकार के दुष्प्रचार होते हैं, ऐसे में शोधार्थियों की जिम्मेदारी है कि वे तथ्य आधारित अध्ययन प्रस्तुत करें। 3.वैश्वीकरण बनाम बाजारीकरण: वैश्वीकरण बाजारीकरण तक सीमित हो गया है, जो खतरनाक है। भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना में विश्वास करता है, जहां पूरा विश्व एक परिवार है। जब तक सभी सुखी नहीं होंगे, तब तक कोई भी व्यक्ति वास्तव में सुखी नहीं हो सकता। 4. धर्म और आचरण की व्याख्या की: धर्म का स्वरूप शाश्वत है। सृष्टि जिन नियमों से संचालित होती है। वही धर्म है। धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि धूल का एक कण भी धर्म से अलग नहीं हो सकता। आचरण देश और काल के अनुसार बदल सकता है, लेकिन धर्म का मूल स्वरूप स्थायी रहता है। धर्म हमें सबके साथ मिलकर जीना सिखाता है। 5.पर्यावरण संरक्षण का संदेश: पेड़ लगाना, जल संरक्षण करना और एकल उपयोग प्लास्टिक से बचना जैसे छोटे कदम भी बड़ा योगदान दे सकते हैं। उन्होंने आधुनिक तकनीक का उपयोग पर्यावरण संरक्षण के लिए करने की अपील की और कहा कि प्रकृति के प्रति मित्र भाव रखना ही भारतीय संस्कृति का मूल है। कल संघ प्रमुख ने क्या कहा था, पढ़िए… 1- मुगल और अंग्रेज हिंदू धर्म संस्कृति को मिटा नहीं सके संघ प्रमुख ने कहा, अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठे कुछ लोग हमारी सद्भावना के विरुद्ध योजना बना रहे हैं। इससे हमें सावधान रहना होगा। एक दूसरे के प्रति अविश्वास समाप्त करना होगा। एक दूसरे के दुख दर्द में शामिल होना होगा। जातिवाद पर मोहन भागवत ने कहा, 500 साल मुगल और 200 साल अंग्रेज शासन कर चले गए, लेकिन हिंदू धर्म संस्कृति इतनी मजबूत है कि उसे मिटा नहीं सके। जब इतने सालों में हिंदू धर्म का कोई कुछ नहीं बिगड़ सका तो कोई अब क्या बिगाड़ पाएगा। समाज में जो जाति की विषमता फैल रही है, उसे दूर करना होगा। यह किसी सरकार या संगठन का काम नहीं है, बल्कि इसे समाज के प्रत्येक वर्ग और व्यक्ति को मिलकर करना होगा।' 2- मोहन भागवत बोले- भारतीय मुसलमान भी हिंदू, घर वापसी करानी है संघ प्रमुख ने कहा- भारत में रहने वाले मुस्लिम भी हिंदू हैं, वे कोई अरब से नहीं आए है। घर वापसी का काम तेज होना चाहिए। जो लोग हिंदू धर्म में लौटें, उनका ध्यान भी हमें रखना होगा। संघ प्रमुख ने बढ़ती घुसपैठ पर कहा, घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना होगा। उन्हें रोजगार नहीं देना है। हिंदुओं की घटती जनसंख्या दर पर कहा, हिंदुओं के कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। अभी जनसंख्या दर 2.1 है। यह कम से कम 3 होनी चाहिए। जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह समाज भविष्य में समाप्त हो जाता है। अब जो भी बच्चे शादी कर रहे हैं, उन्हें बताइए कि कम से कम तीन बच्चे पैदा करें। 3- मातृशक्ति परिवार का आधार, महिलाएं अबला नहीं मोहन भागवत ने कहा, घर-परिवार का आधार मातृशक्ति है। हमारी परंपरा में कमाई का अधिकार पुरुषों को था, लेकिन खर्च कैसे हो, यह मातायें तय करती थी। मातृशक्ति विवाह के बाद दूसरे घर में आकर सभी को अपना बना लेती है। महिला को हमें अबला नहीं मानना है, वह असुर मर्दिनी है। हमने स्त्री की, प्रकृति की जो कल्पना की, वह बलशाली है। महिलाओं को आत्म संरक्षण का प्रशिक्षण होना चाहिए। पश्चिम में महिलाओं का स्तर पत्नी से है, हमारे यहां उन्हें माता माना जाता है। उनका सौंदर्य नहीं, वात्सल्य देखा जाता है। 4- मुस्लिम भी संघ से जुड़ना चाहते बैठक में पूछा गया सवाल RSS ने मुस्लिम मंच क्यों बनाया? मोहन भागवत ने कहा, मुस्लिम भी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ना चाहते हैं। उनके लोगों ने मंच बनाया है। भारत निकट भविष्य में विश्व को मार्गदर्शन देगा। विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान भारत के पास ही है। ----------------- यह खबर भी पढ़िए… गोरखपुर में संघ प्रमुख बोले- हम जाति की चिंता कर रहे, हमें बड़े हिंदू समाज के लिए काम करना चाहिए गोरखपुर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सवर्ण, ओबीसी और दलित समाज के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर भोजन किया। उन्होंने कहा- समाज उसे कहते हैं, जिसमें आपस में जुड़ाव हो। अर्थ और स्वार्थ से जुड़ा अपनापन टिकता नहीं है। उन्होंने कहा- हम जाति की चिंता कर रहे, जबकि हमें बड़े हिंदू समाज के लिए काम करना चाहिए। समाज में यदि सद्भावना नहीं है तो कानून और पुलिस के बावजूद समाज नहीं चलता। संघ प्रमुख तीन दिवसीय प्रवास पर गोरखपुर पहुंचे थे। रविवार को योगिराज बाबा गंभीरनाथ ऑडिटोरियम में RSS के 100 साल पूरे होने पर सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित किया। पढ़ें पूरी खबर…
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