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    मणिपुर में N Biren Singh का विरोधियों पर आरोप, बोले इस्तीफा देने के बाद भी हिंसा क्यों जारी

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    (सौरव रॉय बर्मन) (फाइल फोटो के साथ) इंफाल, 30 अक्टूबर मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने अपने कुछ सहकर्मियों पर उन्हें पद से हटाने की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कहा है कि भाजपा सरकार को अगले साल के आरंभ में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ‘‘लोगों का खोया हुआ भरोसा और विश्वास फिर से हासिल करना’’ चाहिए। उन्होंने इस तर्क को चुनौती दी कि राज्य में ध्रुवीकरण के लिए वह जिम्मेदार थे। उन्होंने सवाल किया कि फरवरी 2025 में उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बावजूद हिंसा क्यों जारी रही और अन्य समुदायों तक क्यों फैल गई?उन्होंने यह भी कहा कि जनता की ओर से उनके मुख्यमंत्री पद पर लौटने की जोरदार मांग की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिये एक विशेष साक्षात्कार में कहा, ‘‘2017 से मेरे साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया गया है। मैं दिल्ली में नेतृत्व पर आरोप नहीं लगा रहा हूं, बल्कि राज्य के कुछ नेताओं पर आरोप लगा रहा हूं, जिन्होंने कांग्रेस के साथ मिलकर मेरे खिलाफ साजिश रची।’’ बीरेन सिंह ने कहा, ‘‘कुछ विधायक ऐसे हैं जो यह कभी स्वीकार नहीं कर पाए कि कांग्रेस छोड़कर आने के बाद मैं दो बार मुख्यमंत्री कैसे बन गया।वे भाजपा को अपनी निजी संपत्ति मानते हैं। इसलिए उन्होंने साजिश रची और मुझसे इस्तीफा दिलवा दिया।’’ मौजूदा भाजपा सरकार का नेतृत्व वाई. खेमचंद सिंह कर रहे हैं। वह पार्टी के उन वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने 2025 में बीरेन सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग की थी।बीरेन सिंह ने नगा और कुकी समुदायों के बीच जारी हिंसा की ओर इशारा करते हुए इस तर्क पर भी सवाल उठाया कि उन्हें हटा देने से मणिपुर में शांति बहाल करने में मदद मिलेगी। उन्होंने इस साल फरवरी में खेमचंद सरकार बनने के बाद से शुरू हुई हिंसा की नयी लहर के संदर्भ में पूछा, ‘‘अब बीरेन हट गए हैं। तो, अब क्या हुआ?कितने नगा भाई मारे गए हैं? वे मुझ पर आरोप लगा रहे थे। वे कह रहे थे कि मैं बहुसंख्यकों का पक्ष लेता हूं।अब यह ईसाई बनाम ईसाई की लड़ाई है। यूरोपीय संघ कहां गया?’’ जुलाई 2023 में, यूरोपीय संसद ने एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें मणिपुर की जातीय हिंसा पर चिंता जताई गई थी और भारतीय प्रशासन से धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करने, हिंसा को समाप्त करने और स्वतंत्र जांच में मदद करने की अपील की गयी थी। मौजूदा सरकार के कामकाज से स्पष्ट रूप से नाखुश बीरेन सिंह (65) ने कहा कि उन्हें इस बात की चिंता है कि भाजपा जनता का भरोसा खो रही है, क्योंकि पार्टी के राजनीतिक एजेंडे के मुख्य मुद्दों पर कोई ठोस कार्य नहीं दिख रहा है।उनसे जब पूछा गया कि क्या जनता की बढ़ती बेचैनी विधानसभा चुनाव में भाजपा को नुकसान पहुंचा सकती है, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘‘यही तो मेरी मुख्य चिंता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘नशा-विरोधी अभियान, अफीम की खेती के खिलाफ अभियान - ऐसे अभियान हमें देखने को नहीं मिल रहे हैं। सरकार को संदिग्ध अवैध प्रवासियों की बायोमेट्रिक पहचान का काम भी जारी रखना चाहिए। कम से कम उनकी पहचान तो की जाए।और अगर आप अवैध प्रवासियों को वापस नहीं भेज सकते, तो कम से कम उन्हें शिविरों में तो रख सकते हैं। हमने जो शुरुआत की है, उसे जारी रखें। और भविष्य को बचाएं।हमें भविष्य को बचाना है।’’ संदिग्ध अवैध प्रवासन के प्रति अपनी तत्कालीन सरकार के रुख को याद करते हुए, बीरेन सिंह ने कहा, ‘‘मेरे शासन के दौरान, हम प्रेस में लोगों को बताते थे कि हमने इतने लोगों की पहचान की है। लेकिन पिछले डेढ़ साल से, इस बारे में किसी ने कुछ नहीं सुना है।’’ पूर्व मुख्यमंत्री से जब यह पूछा गया कि क्या विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के पास जनता का खोया हुआ भरोसा फिर से हासिल करने के लिए क्या पर्याप्त समय है, तो उन्होंने उम्मीद जताई कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व स्थिति को संभालने के लिए हस्तक्षेप करेगा। यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा के सत्ता में बने रहने पर वह खुद को फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देखते हैं, तो बीरेन सिंह ने कहा, ‘‘मैं ऐसा कैसे कह सकता हूं?मैं बस इतना कह सकता हूं कि जनता की जबरदस्त मांग है। लोग चाहते हैं कि मैं फिर से मुख्यमंत्री बनूं। लेकिन ऐसे फैसले इस बात पर निर्भर करते हैं कि हमें बहुमत मिलता है या नहीं।’’ पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनके कार्यकाल के आखिरी चरण के दौरान राज्य में स्थिति सामान्य होने की ओर बढ़ रही थी।उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन राजनेताओं ने राजनीति की। और उन्हें झुकना पड़ा।’’ बीरेन सिंह ने नौ फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा था और कांग्रेस की ओर से अविश्वास प्रस्ताव लाने का खतरा भी था। उनके मंत्रिमंडल के सदस्य रहे खेमचंद उन वरिष्ठ भाजपा नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने केंद्रीय नेतृत्व को कथित तौर पर चेतावनी दी थी कि अगर बीरेन सिंह को नहीं हटाया गया, तो सरकार गिर सकती है।
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