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    मेरठ की 22 साल की अनाव्या दत्ता बनीं मिसाल:संभाल रहीं मल्टी-सेक्टर कंपनी, मेल-डोमिनेट सेक्टर में खड़ी की नई पहचान

    2 hours ago

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    “लोग कहते थे महिलाएं ड्राइविंग में अच्छी नहीं होतीं, बस नहीं चला सकतीं… मैंने इसे चैलेंज के तौर पर लिया।” यह कहना है मेरठ की 22 साल की अनाव्या दत्ता का, जो आज एक मल्टी-सेक्टर कंपनी प्रोविज़ कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन में अहम भूमिका निभाते हुए महिलाओं को उस क्षेत्र में आगे ला रही हैं, जिसे अब तक पुरुष प्रधान माना जाता था। अनाव्या बताती हैं कि उन्होंने खुद बड़े व्हीकल चलाकर यह साबित किया कि अगर उनमें कॉन्फिडेंस आ सकता है, तो दूसरी महिलाओं में भी आ सकता है। उन्होंने जापान, अमेरिका और अफ्रीका जैसे देशों में महिलाओं को बस चलाते देखा, जिससे उन्हें प्रेरणा मिली। उनका कहना है की “जब महिलाएं बाइक, ट्रैक्टर और प्लेन तक चला सकती हैं, तो बस क्यों नहीं। कंपनी के तहत आज महिलाएं सिर्फ दफ्तरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बस बॉडी बिल्डिंग, टेक्नीशियन और ड्राइवर जैसी भूमिकाओं में भी काम कर रही हैं। अनाव्या के मुताबिक, यह सेक्टर पूरी तरह मेल-डोमिनेट था, जहां एक महिला को अपनी पहचान और कॉन्फिडेंस बनाने में समय लगता है। साथ ही 12x12 मीटर की बस चलाना आसान नहीं, इसके लिए स्किल और मजबूत ट्रेनिंग जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने एक सख्त ट्रेनिंग सिस्टम तैयार किया है। ड्राइवर बनने से पहले सिमुलेटर पर ट्रेनिंग दी जाती है, फिर ऑन-ग्राउंड प्रैक्टिस और हैवी व्हीकल ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य होता है। वहीं टेक्नीशियन और मैकेनिक बनने के लिए इंजीनियरिंग या डिप्लोमा के बाद तीन महीने की इंटर्नशिप कराई जाती है। अनाव्या का मानना है कि उनकी इस पहल से महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। “आज महिलाएं फाइटर जेट और प्लेन उड़ा रही हैं, अब बस ड्राइविंग में भी उनका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। वे अनस्किल्ड से सेमी-स्किल्ड और फिर स्किल्ड बनकर अपनी जिंदगी आगे बढ़ा सकती हैं।” अनाव्या कहती है की पहले महिला यात्री मेल ड्राइवर पर भरोसा करती थी, अब मेल यात्री भी फीमेल ड्राइवर पर भरोसा कर रहा है। यह असली समानता है, जो जमीन पर दिख रही है। उनका उद्देश्य सिर्फ बिजनेस बढ़ाना नहीं, बल्कि एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना है, जहां महिलाओं का टेक्निकल और फील्ड सेक्टर में होना सामान्य बात लगे। “जैसे आज महिलाएं हर क्षेत्र में हैं, वैसे ही ड्राइवर, टेक्नीशियन या मैकेनिक के रूप में भी उन्हें देखकर लोगों को अचरज न हो।” उन्होंने युवाओं और महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि “एजुकेटेड इंडिया के साथ हमें स्किल इंडिया पर भी बराबर काम करना होगा, ताकि युवा एक स्किल सीखकर अपनी ड्रीम लाइफ बना सकें। अनाव्या का लक्ष्य है ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को रोजगार देना और युवाओं को आगे बढ़ाना।
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