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    मुस्लिम पड़ोसियों ने हिंदू बुजुर्ग का किया अंतिम संस्कार:परिजन नहीं मिले तो पूरे रीति-रिवाज से निभाई अंतिम जिम्मेदारी, रक्तदाता समूह ने दिया सहयोग

    3 hours ago

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    इटावा शहर के कांशीराम कॉलोनी क्षेत्र में एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने इंसानियत, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की एक मजबूत मिसाल पेश की। यहां 72 वर्षीय रिटायर्ड होमगार्ड आनंद स्वरूप की मौत के बाद जब उनके कोई परिजन सामने नहीं आए, तब उनके मुस्लिम पड़ोसियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़कर न सिर्फ उनकी सेवा की, बल्कि पूरे सम्मान के साथ हिंदू रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार भी किया। इस कार्य में रक्तदाता समूह संगठन ने सहयोग किया। आरटीओ ऑफिस के पास कांशीराम कॉलोनी के कमरा नंबर 18 में रहने वाले आनंद स्वरूप पुत्र मदन गोपाल पिछले करीब 20 वर्षों से अकेले रह रहे थे। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी और शरीर भी काफी कमजोर हो गया था। ऐसे समय में उनके पड़ोसी मोहम्मद वाजिद अहमद और रेशमा ने उनकी देखभाल की जिम्मेदारी उठाई और हर संभव मदद की। अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत जब उनकी हालत ज्यादा गंभीर हो गई, तो मोहम्मद वाजिद उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया और भर्ती कर लिया। लेकिन मंगलवार को इलाज के दौरान आनंद स्वरूप ने अंतिम सांस ली। उनकी मौत के बाद सबसे बड़ी समस्या उनके अंतिम संस्कार को लेकर सामने आई, क्योंकि काफी प्रयासों के बावजूद उनके किसी भी परिजन का पता नहीं चल सका। मुस्लिम पड़ोसियों ने निभाई अंतिम जिम्मेदारी ऐसे मुश्किल समय में एक बार फिर उनके मुस्लिम पड़ोसी आगे आए। उन्होंने शव को कॉलोनी तक पहुंचाया और इस संबंध में रक्तदाता समूह के संचालक शरद तिवारी को सूचना दी। सूचना मिलते ही शरद तिवारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कराने के लिए पोस्टमार्टम कराया गया। यमुना घाट पर पूरे विधि-विधान से हुआ अंतिम संस्कार सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के सहयोग से आनंद स्वरूप का अंतिम संस्कार यमुना घाट पर पूरे विधि-विधान और हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार किया गया। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार में भाग लिया। उन्होंने न केवल शव को कंधा दिया, बल्कि सभी धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए अंतिम विदाई में सहभागी बने। अंतिम संस्कार में उमड़ा भाईचारे का संदेश अंतिम संस्कार में मोहम्मद वाजिद के साथ दिनेश, सौरव, संस्था के सदस्य सौरभ परिहार, अमित भदौरिया, आदित्य शाक्य और विमलेश तिवारी सहित कई लोग मौजूद रहे। सभी ने इस कार्य को सच्ची मानव सेवा और भाईचारे का प्रतीक बताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब समाज में धर्म और जाति के नाम पर विभाजन की बातें होती हैं, ऐसे उदाहरण यह साबित करते हैं कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है और मुश्किल समय में इंसान का साथ ही सबसे ज्यादा मायने रखता है।
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