Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    मतदाता सूची पुनरीक्षण पर Election Commission ने Supreme Court में दिया जवाब, फॉर्म छह में बदलाव से इनकार

    1 day ago

    1

    0

    निर्वाचन आयोग ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का जोरदार बचाव करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया कानून के तहत अधिकृत है और इससे संबंधित आदेशों को आयोग के तीनों सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी। निर्वाचन आयोग ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ और एसआईआर के दौरान आयोग द्वारा लिए गए फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर 248 पृष्ठों के जवाब में फॉर्म छह में बदलाव किए जाने के आरोपों को खारिज किया और कहा कि मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले वैधानिक फॉर्म छह में कोई बदलाव नहीं किया गया है। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ मंगलवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआर के दौरान निर्वाचन आयोग द्वारा लिए गए फैसलों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने वाली है।निर्वाचन आयोग ने अपने जवाबी हलफनामे में याचिकाओं को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज करने का अनुरोध किया और आरोपों को ‘गलतफहमी पर आधारित’ बताया। आयोग ने कहा कि ये आरोप अखबार में प्रकाशित एक खबर पर आधारित हैं। आयोग की ओर से उप निर्वाचन आयुक्त भानु प्रकाश येतुरु द्वारा दाखिल हलफनामे में कहा गया, ‘‘निर्वाचन आयोग पर आक्षेप लगाने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है।’’ निर्वाचन आयोग ने कहा कि इस हलफनामे को दाखिल करने की मंजूरी भी आयोग के तीनों सदस्यों ने सर्वसम्मति से दी।उसने कहा कि 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को जारी एसआईआर संबंधी आदेश संविधान के अनुच्छेद 324 और मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं पदावधि) अधिनियम, 2023 की धारा 18 के अनुपालन में सर्वसम्मति से लिए गए फैसलों के आधार पर जारी किए गए थे। धारा 18 के अनुसार, आयोग के कामकाज से जुड़े फैसले यथासंभव सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए और सदस्यों के बीच मतभेद होने पर बहुमत से फैसला किया जाना चाहिए। इसमें कहा गया कि एसआईआर से संबंधित तीनों आदेश निर्वाचन आयोग के सर्वसम्मति से लिए गए फैसलों के अनुरूप जारी किए गए थे।ये आदेश भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 और मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं पदावधि) अधिनियम, 2023 की धारा 18 के प्रावधानों का उचित अनुपालन करते हुए जारी किए गए थे। आयोग ने कहा कि किसी फाइल पर प्रक्रिया के दौरान किसी निर्वाचन आयुक्त की ओर से दिया गया सुझाव, टिप्पणी या सवाल आयोग का फैसला नहीं माना जा सकता। उसने बताया कि फाइल पहले एक निर्वाचन आयुक्त, फिर दूसरे निर्वाचन आयुक्त और अंत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पास जाती है।मंजूर किए गए फैसलों पर तीनों के हस्ताक्षर होते हैं। आयोग ने कहा कि जब तत्काल आदेश जारी करना जरूरी हो और सदस्य व्यक्तिगत रूप से उपलब्ध न हों, तो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मंजूरी ली जाती है और बाद में उसे फाइल में दर्ज किया जाता है। फॉर्म छह के संबंध में आयोग ने कहा कि वह इस भ्रामक दावे को स्पष्ट रूप से खारिज करता है कि वैधानिक फॉर्म में बदलाव किया गया है।आयोग के अनुसार, फॉर्म छह वह आवेदन है जिसके माध्यम से पात्र व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने का अनुरोध करता है। हलफनामे में कहा गया कि एसआईआर के दौरान इसके साथ जो घोषणा पत्र दिया गया, वह एसआईआर संबंधी आदेशों के तहत निर्धारित एक अलग दस्तावेज है और “फॉर्म छह का हिस्सा नहीं है।” आयोग ने कहा कि बिहार में एसआईआर के दौरान इस्तेमाल किए गए घोषणा पत्र को बाद के आदेशों में बदल दिया गया था। इसका उद्देश्य आवेदकों को 2002-03 की मतदाता सूचियों में दर्ज अपने, अपने माता-पिता या दादा-दादी के विवरण देने की सुविधा देना था, ताकि विवरणों का सफलतापूर्वक मिलान हो जाने पर उन्हें अतिरिक्त दस्तावेज जमा न करने पड़ें।हालांकि, आयोग ने स्वीकार किया कि उसके ऑनलाइन मंच पर घोषणा पत्र को जिस तरह प्रदर्शित किया गया, उससे ऐसा लग सकता था कि फॉर्म छह में संशोधन किया गया है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Cyclone Arnab: ओडिशा के 6 जिलों में शिक्षण संस्थान बंद, तटीय क्षेत्रों से लोगों की निकासी शुरू
    Next Article
    चक्रवात Arnab का खतरा: Andhra Pradesh ने 20 जिलों के लिए 27 करोड़ रुपये किए मंजूर

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment