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    Mumbai Ahmedabad Bullet Train रूट पर लगीं Movable Crossings, पटरी पर नहीं रहेगा कोई गैप

    38 minutes from now

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    मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) प्रोजेक्ट के तहत भारतीय रेलवे नेटवर्क पर पहली बार मूवेबल क्रॉसिंग वाले टर्नआउट (जिन्हें स्विंग-नोज़ क्रॉसिंग भी कहा जाता है) लगाए जा रहे हैं। इस टेक्नोलॉजी को 320 kmph तक की स्पीड पर सुरक्षित और भरोसेमंद ट्रेन ऑपरेशन के लिए डिज़ाइन किया गया है। एक आधिकारिक बयान में बताया गया है कि मूवेबल-क्रॉसिंग टेक्नोलॉजी आम रेलवे लाइनों पर इस्तेमाल होने वाले फिक्स्ड-क्रॉसिंग टर्नआउट से अलग है और यह हाई-स्पीड रेल सिस्टम का एक अहम हिस्सा है।इसे भी पढ़ें: 1599 में 22 सितंबर को East India Company की नींव रखने पर लंदन में हुई थी बैठक250-300 kmph से ज़्यादा स्पीड पर, फिक्स्ड क्रॉसिंग पर पहिए और पटरी के बीच संपर्क से ज़्यादा डायनामिक फ़ोर्स पैदा होता है, क्योंकि क्रॉसिंग नोज़ पर गैप होता है। इस रुकावट या गैप की वजह से ज़्यादा वाइब्रेशन, स्ट्रक्चर से होने वाला शोर, पहिए के फ्लैंज और क्रॉसिंग के हिस्सों में तेज़ी से घिसाव और ट्रैक में थोड़ी-बहुत खराबी होने पर पहिए का असामान्य व्यवहार जैसी समस्याएं होती हैं। मूवेबल क्रॉसिंग, स्विच रेल्स के साथ तालमेल बिठाकर क्रॉसिंग नोज़ को खिसकाती है, जिससे गैप खत्म हो जाता है। इससे एक लगातार चलने वाली सतह बनती है और टर्नआउट से गुजरते समय पहियों को बिना रुकावट गाइडेंस मिलती है। इस इनोवेशन से ट्रेन का गुज़रना आसान होने, डायनामिक इम्पैक्ट, वाइब्रेशन और अंदर के शोर को कम करने, और रेल्स व रोलिंग स्टॉक की टूट-फूट को घटाने की उम्मीद है।हाई-स्पीड टर्नआउट्स में दो अलग-अलग पॉइंट मशीनें लगी होती हैं: एक स्विच एंड पर स्विच रेल्स को ऑपरेट और लॉक करने के लिए, और दूसरी मूवेबल क्रॉसिंग नोज़ को ऑपरेट और लॉक करने के लिए। दोनों पॉइंट मशीनें एक कोऑर्डिनेटेड कंट्रोल सिस्टम के तहत काम करती हैं। सिग्नलिंग इंटरलॉकिंग रूट-सेटिंग कमांड से मूवमेंट शुरू होता है, और टर्नआउट पर ट्रेन के मूवमेंट की इजाज़त देने से पहले दोनों मशीनों से पोज़िशन डिटेक्शन और लॉकिंग कन्फर्मेशन ज़रूरी होता है।इसे भी पढ़ें: तेजस-HTT अंकुर-HTT...HAL का ट्रिपल धमाका, रक्षा मंत्री ने कर दिया बड़ा ऐलानडुअल पॉइंट-मशीन सिस्टम यह पक्का करता है कि दोनों अहम पॉइंट्स पर रेल का रास्ता लगातार बना रहे और मैकेनिकली सुरक्षित रहे। ये हाई-स्पीड पॉइंट मशीनें कड़े टेक्निकल स्टैंडर्ड्स को पूरा करती हैं, जिनमें सटीक स्ट्रोक कंट्रोल, टाइट पोज़िशनिंग टॉलरेंस और मज़बूत लॉकिंग मैकेनिज़्म शामिल हैं, जो तेज़ रफ़्तार पर काम करने के दौरान लगने वाले ज़ोर को झेल सकते हैं। कई तरह की डिटेक्शन और वेरिफिकेशन लेयर्स, स्विच रेल्स और मूवेबल क्रॉसिंग की आखिरी पोज़िशन और मैकेनिकल लॉकिंग पर नज़र रखती हैं। इंटरलॉकिंग रूट को तभी रिलीज़ करती है जब स्वतंत्र जाँच से यह पक्का हो जाता है कि टर्नआउट सही जगह पर है और लॉक है।
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