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    Noida Salary Hike Protest | वेतन विवाद ने हिंसक झड़पों को जन्म दिया, क्या हैं मज़दूरों की मांगें?

    3 hours from now

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    दिल्ली से सटे औद्योगिक केंद्र नोएडा के फेज़ 2 इलाके में सोमवार को स्थिति तब बेकाबू हो गई, जब हज़ारों मज़दूरों का आक्रोश हिंसक झड़पों में बदल गया। होज़री कॉम्प्लेक्स और नोएडा स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (NSEZ) के मज़दूरों ने "व्यवस्थागत शोषण" के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सड़कों पर जमकर प्रदर्शन किया। होज़री कॉम्प्लेक्स और नोएडा स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (NSEZ) के हज़ारों मज़दूर सड़कों पर उतर आए और उन्होंने जिसे "व्यवस्थागत शोषण" बताया, उसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया; जिसके चलते एक तीखी झड़प हुई।इसे भी पढ़ें: Adani Group की JAL डील को फिर लगा ब्रेक, Vedanta की याचिका पर NCLAT में अहम सुनवाई टली यह प्रदर्शन, जो बेहतर वेतन के लिए धरने के रूप में शुरू हुआ था, तब एक हिंसक मोड़ ले गया जब प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पत्थरबाज़ी की और निजी वाहनों तथा फैक्ट्री की संपत्ति में तोड़फोड़ की। पुलिस की बड़ी टुकड़ियों को मौके पर तैनात किया गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। हिंसा प्रभावित इलाकों में PAC की टुकड़ियों को भी तैनात किया गया है।इसे भी पढ़ें: Lord Shiva Temple: Nepal के Pashupatinath जैसा वैभव, Thailand से Mauritius तक फैले हैं Lord Shiva के ये मंदिर सब्र का बांध टूटा: मज़दूर विरोध क्यों कर रहे हैं?इस अशांति की जड़ें काम करने की स्थितियों और रुके हुए वेतन को लेकर गहरी निराशा में छिपी हैं।कई कर्मचारी हर दिन 10 घंटे से ज़्यादा शारीरिक श्रम करते हैं, फिर भी उनका मासिक वेतन 12,000 से 15,000 रुपये के बीच ही अटका हुआ है। यह गुस्सा इस आरोप से और भी भड़क गया है कि ज़िला प्रशासन और श्रम विभाग ने इन उल्लंघनों पर आंखें मूंद रखी हैं।प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगेंउचित वेतन संशोधन: बढ़ती महंगाई को देखते हुए मूल वेतन में तत्काल बढ़ोतरी की जाए, और मौजूदा वेतन सीमा से बाहर निकला जाए।ओवरटाइम के लिए दोगुना वेतन अनिवार्य हो: प्रदर्शनकारियों की मांग है कि फैक्ट्रियां उन कानूनी नियमों का पालन करें जिनके तहत ओवरटाइम के घंटों के लिए दोगुना वेतन देने का प्रावधान है। मज़दूरों का आरोप है कि फिलहाल उन्हें अतिरिक्त शिफ्टों के लिए "एकल दर" (सामान्य दर) पर ही भुगतान किया जाता है—और वह भी तब, जब उन्हें भुगतान किया जाए।सख्ती से 8 घंटे की शिफ्ट: ज़बरदस्ती 10 से 12 घंटे काम कराने की प्रथा को खत्म किया जाए, और यह सुनिश्चित किया जाए कि 8 घंटे से ज़्यादा काम करना पूरी तरह से स्वैच्छिक हो और उसके लिए उचित भुगतान किया जाए।उनकी अन्य मांगों में बोनस, साप्ताहिक अवकाश, शिकायत निवारण प्रकोष्ठ (Grievance Redressal Cell), समय पर वेतन और वेतन पर्ची (Salary Slips) उपलब्ध कराना शामिल है। प्रशासन की चुनौतीफिलहाल पुलिस और प्रशासन मज़दूरों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर शांति बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं। नोएडा के औद्योगिक इलाकों में तनाव बना हुआ है और कई फैक्ट्रियों में काम पूरी तरह ठप है। प्रशासन के लिए अब चुनौती यह है कि वह औद्योगिक शांति और मज़दूरों के अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाता है। 
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