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    पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की आज जयंती:बलिया में जन्मे, सीधे प्रधानमंत्री बने, युवा तुर्क के नाम से मशहूर रहे

    8 hours ago

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    पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का जन्म 17 अप्रैल 1927 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ था। अपने कर्मठ स्वभाव और राजनीतिक सूझबूझ के कारण वे देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचे। चंद्रशेखर ने बलिया लोकसभा क्षेत्र का आठ बार प्रतिनिधित्व किया। वे भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ उदाहरण हैं, जो बिना किसी पूर्व मंत्री पद के सीधे प्रधानमंत्री की कुर्सी पर आसीन हुए। उन्हें 'युवा तुर्क' के नाम से भी जाना जाता था। उन्होंने कश्मीर से कन्याकुमारी तक की पदयात्रा कर पूरे देश में जन जागरण का कार्य किया था। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का निधन 8 जुलाई 2007 को हुआ था। कृषक परिवार में हुआ था जन्म पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर का जन्म 17 अप्रैल 1927 में पूर्वी उत्तरप्रदेश के बलिया जिले के इब्राहिमपट्टी गांव में एक कृषक परिवार में हुआ था।इनकी स्कूली शिक्षा भीमपुरा के राम करन इण्टर कॉलेज में हुई।उन्होंने एम ए डिग्री इलाहाबाद विश्वविद्यालय (प्रयागराज ) से किया। उन्हें विद्यार्थी राजनीति में एक "फायरब्रान्ड" के नाम से जाना जाता था।विद्यार्थी जीवन के पश्चात वह समाजवादी राजनीति में सक्रिय हुए। भारत के राजनीति में उनका जीवन 1962 से 1977 तक वह भारत के ऊपरी सदन राज्य सभा के सदस्य थे। उन्होंने 1984 में भारत की पदयात्रा की,जिससे उन्होंने देश को अच्छी तरह से समझने की कोशिश की। बागी बलिया के सपूत द्वारा की जा रही इस पदयात्रा से इन्दिरा गांधी को थोड़ी घबराहट हुई। सन 1977 मे जब जनता पार्टी की सरकार बनी तो उन्होने मंत्री पद न लेकर जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद लिया था। सन 1977 मे ही वो बलिया जिले से पहली बार लोकसभा के सांसद बने। इसके बाद बलिया से आठ बार सांसद होने से लेकर प्रधानमंत्री की कुर्सी को गौरवान्वित किये। चन्द्रशेखर ने सजपा की स्थापना की चन्द्रशेखर समाजवादी जनता पार्टी की स्थापना की। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने चुनाव ना करने के लिए समर्थन करने के बाद उनकी छोटे बहुमत की सरकार बन गयी। कांग्रेस ने उन पर हरियाणा पुलिस से राजीव गांधी की जासूसी कराने का आरोप लगाया जिसके कारण उन्होने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा घोषणा कर दी। प्रधानमंत्री के पद पर 7 महीने तक रहे चन्द्रशेखर ने मार्च 6 मार्च 1991 में राजीनामा किया। उन्होंने लेकिन राष्ट्रीय चुनाव तक प्रधानमन्त्री का पद संभाला। संसदीय वार्तालाप के लिए चर्चित थे चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर जी उनके संसदीय वार्तालाप के लिए बहुत चर्चित थे। 1995 में आउटस्टैण्डिंग पार्लिमेन्टेरियन अवार्ड भी चन्द्रशेखर जी को मिला था। चन्द्रशेखर जी देश में परिवारवाद राजनीति की घोर विरोधी रहे।चन्द्रशेखर जी को पक्ष और विपक्ष के नेता बड़े ध्यान से सुनते।चन्द्रशेखर जी हमेशा राजनीति की धारा के विपरीत अपनी आत्मा की आवाज सुनकर चले। 8 जुलाई 2007 को थम गई सांसे चन्द्रशेखर जी को लोग दाढ़ी बाबा भी कहते थे। कहा जाता है कि चन्द्रशेखर जी जब अपनी दाढ़ी खुजाते थे तो कुछ न कुछ बहुत बड़ी बात होती थी। सदन में हंगामे के बीच जब चन्द्रशेखर जी उद्बोधन के लिए खड़े होते थे, पूरे सदन में खामोशी हो जाती थी और सभी मौन होकर चन्द्रशेखर जी को सुनते थे। 8 जुलाई 2007 का वह काला दिन जब सदन को मौन कर देने वाले चन्द्रशेखर सदा के लिए मौन हो गये।
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