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    प्रयागराज में भगत सिंह, सरदार पटेल को श्रद्धांजलि:लोकतांत्रिक चुनौतियों पर जनसभा, लोकतंत्र बचाने पर जोर

    2 hours ago

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    प्रयागराज में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की शहर पश्चिमी विधानसभा इकाई ने 28 मार्च 2026 को डाही नुमायां क्षेत्र में एक जनसभा और श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम "भारत के समक्ष लोकतांत्रिक चुनौतियां" विषय पर केंद्रित था, जिसमें स्वतंत्रता सेनानी सरदार भगत सिंह और सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने भगत सिंह और सरदार पटेल के योगदान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि दोनों महान नेताओं ने अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ अलग-अलग तरीकों से संघर्ष किया, लेकिन उनका साझा लक्ष्य एक मजबूत और लोकतांत्रिक भारत का निर्माण करना था। वक्ताओं ने लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद भगत सिंह के क्रांतिकारी कदमों का उल्लेख किया। इसके साथ ही, 1928 के बारडोली सत्याग्रह में सरदार पटेल के नेतृत्व में किसानों की ऐतिहासिक जीत को भी याद किया गया, जिसने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत किया। सभा में बताया गया कि अत्यधिक कर वसूली, महामंदी और महामारी जैसी चुनौतियों के बीच सरदार पटेल के नेतृत्व में हुआ बारडोली आंदोलन देश का पहला सफल किसान आंदोलन बना। इस संघर्ष ने ग्रामीण भारत में लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना की और आज भी प्रेरणा का स्रोत है। कार्यक्रम में वर्तमान समय की लोकतांत्रिक चुनौतियों पर भी गहन चर्चा हुई। वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की कि जनसंपत्तियों के आधार पर निजी और विदेशी शक्तियों का बढ़ता प्रभाव लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन रहा है। उन्होंने नई पीढ़ी से आह्वान किया कि वे अपने इतिहास और पूर्वजों के संघर्षों से सीख लें। साथ ही, वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की रक्षा करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। सभा में यह भी जोर दिया गया कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए आम नागरिकों को सरकारी तंत्र से जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से समाज में प्रश्न करने की संस्कृति विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। इस कार्यक्रम में बिशम्भर पटेल, अनु सिंह, घनानंद सिंह, शिवराम तेली, अरविंद निषाद, सुरजीत सिंह और विशाल पटेल सहित कई प्रमुख वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन दशान्नाद सिंह ने किया। अंत में, सभी उपस्थित लोगों ने स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों पर चलने और भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लिया।
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